देवबंद (सहारनपुर) : जागरण प्रबन्ध तंत्र की उत्पीड़नात्मक नीतियों ने वरिष्ठ पत्रकार अमरीश त्यागी की जान ले ली। जागरण अखबार ने लगभग दो दशक से संस्थान की सेवा कर रहे अमरीश त्यागी के निधन पर प्रकाशित समाचार में उनके जागरण से जुडने तक का जिक्र करना भी गंवारा नहीं किया। इस घटना से नगर के पत्रकारों तथा अमरीश को जानने वालों में जागरण समूह के प्रति रोष पनप रहा है। लोग इस समूह के नाश होने की कामना करने लगे हैं।
मृदुल स्वभाव के 49 वर्षीय पत्रकार अमरीश त्यागी देवबंद प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष थे और वर्ष 1996 में दैनिक जागरण के तहसील प्रभारी बने थे। उस समय देवबंद में जागरण की 350 प्रतियां वितरित होती थी। अमरीश त्यागी ने कड़ी मेहनत कर देवबंद क्षेत्र में जागरण को बुलंदिया देते हुए अखबार की प्रसार संख्या को 2500 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। जागरण प्रबधंतंत्र ने कुछ दिन पूर्व उनकी सेवाओं को नकारते हुए जी हजूरी करने वाले उनके एक जूनियर को देवबंद का प्रभारी बना दिया। जूनियर को प्रभारी बनाये जाने से उनके सम्मान को ठेस पहुंची और उनके खबर लगाए जाने भी बंद कर दिए गए थे। इससे आहत होकर

अमरीश त्यागी
इसके बाद मानसिक तनाव ने 25 जून को उनकी जिंदगी को निगल लिया। अमरीश त्यागी के आकस्मिक निधन से जनपद भर के पत्रकारों में शोक की लहर है। असमय उनके जाने का किसी को विश्वास नहीं हो रहा है। सभी इसके लिए दैनिक जागरण प्रबंधन को ही जिम्मेदार मान रहे हैं। स्थानीय पत्रकारों में भी बेवजह अमरीश त्यागी को जागरण समूह द्वारा उत्पीड़न किये जाने का मलाल है। बनियों के इस समूह ने एक पत्रकार को असमय काल के गाल में भेज दिया। अमरीश त्यागी कुलसत गांव के किसान परिवार से ताल्लुकात रखते थे। देवबंद के लोग अमरीश त्यागी के निधन के बाद जागरण समूह से दूरी बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।
पिंटू शर्मा की रिपोर्ट.





