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सवालों से घिरे मीडिया के कई दिग्गज खीझे और झल्लाए

Mayank Saxena : दिल्ली में कल एसपी सिंह स्मृति समारोह का आयोजन हुआ. इसमें मीडिया के कई दिग्गज आए थे. ये लोग सवालों में घिरे और घेरे गए. कई बार लोगों, जूनियर पत्रकारों और छात्रों के सवालों ने घेरा. ठीक वैसे ही ये लोग सवालों से घिरे जैसे उनके शोज़ में अमूमन नेता और बाकी लोग घिरते हैं। आप यकीन मानिएगा कई बार इनमें से ज़्यादातर के पास नेताओं से बहुत अलग जवाब नहीं थे, कई बार ये नेताओं की ही तरह खीझे और झल्लाए, कई बार ये बचकाने स्पष्टीकरण देने लगे, कई बार सिर्फ सहमति दे कर चुप हो गए…

Mayank Saxena : दिल्ली में कल एसपी सिंह स्मृति समारोह का आयोजन हुआ. इसमें मीडिया के कई दिग्गज आए थे. ये लोग सवालों में घिरे और घेरे गए. कई बार लोगों, जूनियर पत्रकारों और छात्रों के सवालों ने घेरा. ठीक वैसे ही ये लोग सवालों से घिरे जैसे उनके शोज़ में अमूमन नेता और बाकी लोग घिरते हैं। आप यकीन मानिएगा कई बार इनमें से ज़्यादातर के पास नेताओं से बहुत अलग जवाब नहीं थे, कई बार ये नेताओं की ही तरह खीझे और झल्लाए, कई बार ये बचकाने स्पष्टीकरण देने लगे, कई बार सिर्फ सहमति दे कर चुप हो गए…

ये वही सब बाते हैं, जिनके लिए अपने पैनल में बैठे अपने शिकारों का ये मज़ाक उड़ाते हैं, भर्त्सना करते हैं, निंदा करते हैं। लेकिन दरअसल अंदर से उतना ही अमीर और कद्दावर बनना भी चाहते हैं, और वही राह उनको यहां ले आई है, जब मीडिया को बेहतर, प्रामाणिक और ईमानदार सिस्टम बनाने की बजाय इनका सारा ध्यान इस बात पर है कि इनकी जेब में लगा पेन कैसा होना चाहिए….जूते चमक रहे हैं या नहीं…हालांकि कई सारे जवाब बहुत अच्छे भी थे…पर हर अच्छे जवाब से आप सहमत हो जाएं, ये भी तो अच्छा नहीं है…

        निहाल सिंह JAI PATRKARITA…

        Shayak Alok यह प्रवृति है.. जिसे जहाँ मौका मिलता है वहां वह खुद को ऐसा ही नेता स्टायल 'बड़ा' 'व्यस्त' 'लापरवाह' 'दुनिया मेरे ठेंगे पर' दिखाने की जुगत करता है या इस जुगत का शिकार होता है .. हालांकि यह बनावटीपन भी बनावटी है ..वहां पे किसी पर्टिकुलर व्यक्ति से आपको निराशा हुई हो और कभी आपको वह किसी शादी के भोज में मिले तो अलग व्यवहार रखेगा.. उससे मिलने उसके कार्यालय पहुंचे तो अलग व्यवहार और पोर्ट ब्लेयर में बीच पर आपसे टकरा जाए तो अलग व्यवहार.. 🙂

टीवी जर्नलिस्ट मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से साभार.

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