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संस्‍कारहीन जागरण, वाराणसी ने हड़प लिए दर्जनों अध्‍यापकों का मानदेय

शायद दूसरों के पैसे मारकर ही दैन‍िक जागरण समूह ने खुद को धनी संस्‍थान बनाया है. मामला चंदौली जिले से जुड़ा हुआ है. अपने कर्मचारियों का खून चूसने वाला जागरण अक्‍सर सरोकारों की नौटंकी करता रहता है. इसी क्रम में दैनिक जागरण, वाराणसी ने इस साल फरवरी महीने में संस्‍कारशाला परीक्षा का आयोजन किया था. इसमें छात्रों से संस्‍कार से संबंधित सवाल पूछे गए थे. कितनी विडम्‍बना है कि जिस समूह में खुद संस्‍कार नहीं है वो संस्‍कारशाला का आयोजन कर रहा है, ठीक उसी तरह जैसे विद्या की देवी सरस्‍वती पूजा पढ़े लिखे कम और अनपढ़ ज्‍यादा करते हैं.  

शायद दूसरों के पैसे मारकर ही दैन‍िक जागरण समूह ने खुद को धनी संस्‍थान बनाया है. मामला चंदौली जिले से जुड़ा हुआ है. अपने कर्मचारियों का खून चूसने वाला जागरण अक्‍सर सरोकारों की नौटंकी करता रहता है. इसी क्रम में दैनिक जागरण, वाराणसी ने इस साल फरवरी महीने में संस्‍कारशाला परीक्षा का आयोजन किया था. इसमें छात्रों से संस्‍कार से संबंधित सवाल पूछे गए थे. कितनी विडम्‍बना है कि जिस समूह में खुद संस्‍कार नहीं है वो संस्‍कारशाला का आयोजन कर रहा है, ठीक उसी तरह जैसे विद्या की देवी सरस्‍वती पूजा पढ़े लिखे कम और अनपढ़ ज्‍यादा करते हैं.  

चंदौली जिले के लगभग आधा दर्जन स्‍कूलों में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था. इसमें जागरण की तरफ से वादा किया गया था परीक्षा में अव्‍वल आने वाले बच्‍चों को तो सम्‍मानित किया ही जाएगा, कक्ष निरीक्षक की भूमिका निभाने वाले अध्‍यापकों को भी मानदेय दिया जाएगा. अव्‍वल आने वाले छात्रों को तो किसी तरह पुरस्‍कार देकर सलटा लिया, परन्‍तु अध्‍यापकों को मानदेय अब तक नहीं दिया गया. इस परीक्षा का संयोजक विनय कुमार वर्मा को बनाया गया था. हर सेंटर पर तीन अध्‍यापकों की ड्यूटी लगाई गई थी.  

अखबार संस्‍थान का मामला होने के चलते अध्‍यापकों ने विश्‍वास कर लिया कि देर सवेर उन्‍हें मानदेय मिल जाएगा, परन्‍तु अखबार प्रबंधन ने उन्‍हें उनके मेहनत का पैसा देना भी गंवारा नहीं समझा. अध्‍यापक अपने मानदेय के बारे में एकाध बार पूछकर शांत हो गए कि इतना पैसा थोड़े ही है कि उनकी जिंदगी रूक जाएगी, पर उन्‍हें अखबार प्रबंधन के झूठ बोलने तथा धोखा देने के रवैये पर गुस्‍सा जरूर आया. इस बारे में जब परीक्षा संयोजक बनाए गए विनय वर्मा से पूछा गया था तो उन्‍होंने इसके लिए प्रबंधन से बात करने को कहा तथा कहा कि उनका इससे कोई लेना देना नहीं है, प्रबंधन ही पैसा नहीं दे रहा है.

इस संदर्भ में दैनिक जागरण के जीएम अंकुर चड्ढा को भी अध्‍यापकों का पैसा जागरण प्रबंधन द्वारा मारे जाने की बात से अवगत कराया गया. उन्‍होंने भी मामले को दिखवाने का आश्‍वासन दिया, पर शायद अंकुर की मंशा भी इन अध्‍यापकों का पैसा हड़प जाने की रही होगी. तभी तो अब तक अध्‍यापकों को उनका मानदेय नहीं मिला है. जागरण के इस भिखमंगई पर अध्‍यापक वर्ग थू थू कर रहा है. उनका कहना है कि पैसा महत्‍वपूर्ण नहीं पर बात तो सत्‍य बताना चाहिए था कि हम पैसा नहीं देंगे. जाहिर है जिन लोगों ने खुद शिक्षा को रखैल बना रखा हो उन्‍हें शिक्षा के महत्‍व क्‍या पता. जल्‍द ही जागरण से जुड़े ऐसे लोगों की पोल खोली जाएगी जो जागरण की नौकरी करते हुए भी विद्यापीठ से संस्‍थागत छात्र के रूप में परीक्षाएं पास की हैं. यानी शुद्ध रूप से चार सौ बीसी.

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