नई दिल्ली। सीबीआई ने राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण अधिकार मामले में प्रसार भारती के पूर्व सीईओ बीएस लाली को क्लीनचिट देने की तैयारी कर ली है। शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामला जांच एजेंसी को सौंपा था। साल भर की जांच के बाद सीबीआई का कहना है कि आरोपों में कोई दम नहीं है और फैसले सामूहिक और विवेकपूर्ण तरीके से लिए गए।
सूत्रों के मुताबिक लाली के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का फैसला किया गया है। प्रसार भारती ने 246 करोड़ रुपये का अधिकांश बजट एसआईएस को खेलों के प्रसारण के लिए दिया था। एसआईएस ने यह काम सिर्फ 176 करोड़ रुपये में जूम को दे दिया। इस तरह सरकार को 100 करोड़ रुपये का चूना लगा। सीबीआई ने लाली और जूम कम्यूनिकेशंस के एमडी वसीम देहलवी के खिलाफ केस दर्ज किया था। देहलवी ब्रिटिश कंपनी एसआइएस लाइव के रेजीडेंट डायरेक्टर भी हैं। आरोपों के बाद लाली को निलंबित कर दिया गया था।
सीबीआई अब कह रही है कि प्रसार भारती ने भुगतान के समय कोई बदलाव नहीं किया। संविदा के मसौदे में बदलाव भी एसआईएस को लाभ पहुंचाने के मकसद से नहीं किया गया था। कांट्रैक्ट के अंतिम प्रारूप पर सॉलिसिटर जनरल की सहमति थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अगुआई वाली निगरानी समिति ने इसे मंजूर किया था। सूत्रों के मुताबिक संविदा के स्पष्ट तौर पर एसआईएस के पक्ष में होने के बावजूद यह एक सामूहिक प्रशासनिक निर्णय था। राष्ट्रमंडल के 17 में 10 खेलों को कवर न करने के दूरदर्शन के फैसले में भी सीबीआई को जांच में कोई खामी नहीं मिली। (एजेंसी)





