सपा सरकार में पत्रकारों पर पुलिसिया उत्पीड़न की जो कहानी शुरू हुई वह सपा की सरकार में और बढ़ गई है। आये दिन किसी ना किसी पत्रकार को मारने पीटने और झूठे मुकदमे में फंसाने का काम पुलिस कर रही है। नोएडा पुलिस के इस वार के शिकार यशवंत सिंह तो हुए ही हैं, शाहजहांपुर में भी पुलिस ने पत्रकार जगेन्द्र सिंह को अपना निशाना बनाया है। पुलिसिया उत्पीड़न के दूसरे शिकार जगेंद्र सिंह की गलती बस इतनी है कि उन्होंने भ्रष्टाचारियों की पोल खोलने की कोशिश की।
जगेंद्र सिंह शाहाजहांपुर में पिछले 15 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकार के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। अभी हाल में जगेंद्र सिंह ने शाहजहांपुर में पत्रकारिता जगत के मठाधीशों के खिलाफ मोर्चा खोला और कई अहम खुलासे किये। शाहजहांपुर पत्रकारिता जगत के इन मठाधीशों को जगेंद्र सिंह के खुलासों से अपनी सत्ता जाती दिखी तो एक सोची समझी साजिश के तहत पुलिस से साठगांठ कर एक दलाल टाईप पत्रकार को इन मठाधीशों ने जगेंद्र सिंह से भिड़ा दिया और थाना सदर बाजार में एक फर्जी मुकदमा जगेंद्र सिंह के नाम दर्ज करा दिया।
पहले मामले की तरह पुलिस ने यहां भी तेजी से कार्रवाई करते हुए जगेंद्र सिंह पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया। इस कार्रवाई की तेजी से सभी भौचक्क रह गए। यूपी पुलिस जहां मारपीट की घटनाओं में लहूलुहान होकर आए पीडि़तों की रिपोर्ट नहीं लिखती वहीं पुलिस ने जगेंद्र के मामले में तुरंत कार्रवाई की। शाहजहांपुर में अभी एक जुलाई को नगर निकाय के चुनाव में एक अपराधी ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्र व्यवहार किया और बूथ पर पथराव और गोलीबारी की, पर पुलिस ने सत्ता के दबाव में इस अपराधी को मात्र 151 में चालान करके छोड़ दिया। सरकार और यूपी पुलिस जहां एक तरफ अपराधियों को पूरा संरक्षण दे रही है वहीं दूसरी तरफ पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर रही है।
शाहजहांपुर से सौरभ दीक्षित की रिपोर्ट.





