नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के बहाने मीडिया पर अंकुश लगाने के मसले पर बुधवार को एक बार फिर बहस गरमा गई। उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी और प्रेस काउंसिल के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू ने मीडिया के लिए नियामक प्राधिकरण (रेगुलेटरी अथॉरिटी) बनाने की पैरवी की है, वहीं सरकार ने कहा है कि सबसे अच्छा तरीका तो यह है कि मीडिया खुद ही अपना नियमन करे।
कल प्रेस दिवस समारोह के मौके पर अंसारी, काटजू और सूचना-प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने अपने भाषणों में मीडिया के नियमन के मसले पर राय जाहिर की। उप राष्ट्रपति ने कहा कि किसी सरकारी नियामक की गैर मौजूदगी में मीडिया संस्थानों की ओर से आत्म नियंत्रण पर जोर देने की जरूरत बढ़ गई है। जनहित के बजाए निहित स्वार्थों और निजी हितों के हावी हो जाने की वजह से वैयक्तिक तौर पर आत्म नियंत्रण की कोशिश नाकाम हो चुकी है।
मीडिया नियामक को लेकर आपत्तियों का जिक्र करते हुए अंसारी ने सवाल उठाया कि अगर मीडिया द्वारा कॉरपोरेट्स और समूहों की कॉमर्शियल छवि को नियंत्रित करने से बचने के लिए अभिव्यक्ति के अधिकार जैसे संवैधानिक ढाल का इस्तेमाल किया गया तो क्या होगा। इसमें जनहित कहां खत्म हो रहा है और निजी हित कहां शुरू हो रहा है? काटजू ने ब्रॉडकास्ट मीडिया के स्व नियामक तंत्र बनाने के प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे इसकी पसंद के आधार पर किसी रेगुलेटरी अथॉरिटी के अधीन लाने पर जोर दिया।





