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प्रेस की आजादी की रक्षा को यशवंत की रिहाई आवश्यक

बरेली। भड़ास4मीडिया के संचालक यशवंत सिंह की फर्जी मामले में गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि पुलिस की निगाह में पत्रकार वह ही इज्जत व सुरक्षा के लायक है, जो सत्तानुमुखी हो और शासन की तलबे चाटने का आदी हो। अन्यथा यशवंत सिंह को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाता जो उनके व्यक्तित्व के सर्वथा विपरीत है। यशवंत का गुनाह सिर्फ इतना है कि उन्होंने सच को सच कहने का साहस किया।

बरेली। भड़ास4मीडिया के संचालक यशवंत सिंह की फर्जी मामले में गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि पुलिस की निगाह में पत्रकार वह ही इज्जत व सुरक्षा के लायक है, जो सत्तानुमुखी हो और शासन की तलबे चाटने का आदी हो। अन्यथा यशवंत सिंह को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाता जो उनके व्यक्तित्व के सर्वथा विपरीत है। यशवंत का गुनाह सिर्फ इतना है कि उन्होंने सच को सच कहने का साहस किया।

शासन व पुलिस के लिए कोई भी साहसी व्यक्ति सजा का हकदार होता है। यदि वह साहसी व्यक्ति कलमकार भी हो तब तो किसी कीमत पर उसे क्षमा के योग्य नहीं माना जा सकता। यदि शासन अपने ऊपर लगे प्रेस दमन के दाग को धोना चाहता है तो उसे तत्काल यशवंत सिंह को बिना शर्त रिहा करने का आदेश पारित करना चाहिए। अन्यथा जनता में यह संदेश अवश्य जायेगा कि शासन प्रेस की स्वतंत्रता को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता।

यह निष्कर्ष है उस बैठक में शामिल मीडिया कर्मियों के विचारों का जो उन्होंने जनमोर्चा कार्यालय में सम्पन्न बैठक के दौरान व्यक्त किये। बैठक में मुख्य रूप से रमेश चन्द्र राय, दिनेश पवन, सुनील कुमार सांवेदी, अरूण द्विवेदी, मुकेश कुमार, गौरव गर्ग, ओपी शर्मा, शैलेश शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किये।


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