नई दिल्ली। सरकार ने कहा कि मीडिया को जवाबदेह होना चाहिए लेकिन इस विषय में तब तक स्वनियमन सर्वश्रेष्ठ उपाय है जब तक इस विषय पर लोग व्यापक चर्चा नहीं करते और बहुमत के विचार सामने नहीं आ जाते। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि सभी लोग यह समझते हैं कि प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अगर किसी तरह का नियंतण्रकरने की कोशिश की गई तो इसका विरोध न केवल मीडिया करेगा बल्कि स्वतंत्र विचार रखने वाले देश के सभी लोग इसका विरोध करेंगे।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,‘ हमने पिछली गलतियों से सीखा है। हम ऐसा कोई निर्णय नहीं करेंगे जो हमें नुकसान पहुंचाए या देश के लिए हानिकारक हो।’ उन्होंने कहा,‘ हम सभी जानते हैं कि अगर सरकार जवाबदेह है, तो ऐसा कोई वर्ग या संस्था नहीं है जिसे देश का शिक्षित, साक्षर और युवा वर्ग जवाबदेह नहीं ठहराएगा।’
सोनी ने कहा कि लोग चाहते हैं कि मीडिया जिम्मेदार हो। उन्होंने कहा कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारियों से भागना नहीं चाहिए। सोनी ने कहा, ‘हम विभिन्न प्रकार की व्यवस्था, नियामक संस्था या स्वनियमन या कोई अन्य तंत्र बना सकते हैं लेकिन वास्तव में
यह मीडिया की अपनी विसनीयता पर निर्भर करेगा।’ उन्होंने कहा कि भविष्य में मीडिया स्वनियमन तंत्र को पसंद नहीं करे क्योंकि उन्हें देश में कठोर लोकपाल के लिए आंदोलन के बारे में जानकारी है जिसे देश के नेतृत्व ने सराहा है। मंत्री ने कहा, ‘समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण (एनबीएसए) और प्रसारण सामग्री शिकायत परिषद (बीसीसीसी) का गठन किया गया है जिसमें जाने माने न्यायाधीश और अन्य लोग हैं।’ उन्होंने कहा कि मीडिया के लिए नियामक तंत्र के मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाई है। सोनी ने कहा,‘ इस विषय को लेकर आम सहमति नहीं हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कई प्रयास किए लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इस विषय पर चर्चा के बाद बहुमत के विचार को कोई रूप लेना चाहिए।’
भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष मार्कडेय काटजू की ओर से मीडिया के लिए नियामक तंत्र की जरूरत के बारे में बहस शुरू करने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इससे अच्छी कोई बात नहीं हो सकती कि लोगों के बीच चर्चा हो और बहुमत का विचार औपचारिक रूप ले।
(एजेंसी के हवाले से राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित खबर)





