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पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों पर उखड़ गए अंबाला के डीसी

 उत्तर भारत के सबसे पुराने पत्रकारिता स्थल अंबाला में मंगलवार को डिप्टी कमिश्रर की प्रेस कांफ्रेंस में जबरदस्त हंगामा हुआ। हालत ये हो गई कि डीसी कुर्सी को जोर से सरकार कर पूरे गुस्से में उठ खड़े हुए। उधर शहर में जलभराव में दो बच्चों व एक युवा की जान जाने पर अपना स्पष्टीकरण प्रेस कांफ्रेंस में देने से पहले पत्रकारों के लिए यहां मलिक होटल में प्रशासन ने करीब 25 हजार खर्च करके पत्रकारों का लंच रखा। पर विडंबना यह रही कि जिनके बच्चे मरे उनको महज पांच हजार का चेक थमाया गया।

 उत्तर भारत के सबसे पुराने पत्रकारिता स्थल अंबाला में मंगलवार को डिप्टी कमिश्रर की प्रेस कांफ्रेंस में जबरदस्त हंगामा हुआ। हालत ये हो गई कि डीसी कुर्सी को जोर से सरकार कर पूरे गुस्से में उठ खड़े हुए। उधर शहर में जलभराव में दो बच्चों व एक युवा की जान जाने पर अपना स्पष्टीकरण प्रेस कांफ्रेंस में देने से पहले पत्रकारों के लिए यहां मलिक होटल में प्रशासन ने करीब 25 हजार खर्च करके पत्रकारों का लंच रखा। पर विडंबना यह रही कि जिनके बच्चे मरे उनको महज पांच हजार का चेक थमाया गया।

रुचिकर बात ये है कि पत्रकार लंच पर डीसी के न आने से उखड़ गए और खाना भी छोड़ दिया। हां, ट्रस्ट के अखबार के एक बुजुर्ग प्रतिनिधि ने अपने कुछ चेलों के साथ बैठकर खाना जरूर खाया। अंबाला के ये बुजुर्ग पत्रकार महोदय लंच का लालच कम ही त्याग पाते हैं। बाकी 90 प्रतिशत ने तो सरकारी खाने को हाथ तक नहीं लगाया। हरियाणा के मुख्‍यमंत्री ने चंद दिन पहले कहा कि हर डिप्टी कमिश्रर अपने जिले में हर माह प्रेस कांफ्रेंस करे। अभी तक हरियाणा में साल में बमुश्किल कोई डीसी एक आध प्रेस कांफ्रेंस  करते थे।

चेक शर्ट में खड़े डीसी

सीएम के आदेशों के बाद डीसी अंबाला शेखर विद्यार्थी ने आज शहर के पंचायत भवन में प्रेस कांफ्रेंस की। पहले तो पत्रकार यूं नाराज रहे कि जब डीसी का न्यौता है तो डीसी खाने पर साथ क्यों नहीं। ऐसे में जिला सूचना एवं लोकसंपर्क अधिकारी केवल बिंद्रा, जो खुद को सरकार का खास बताने का कोई मौका नहीं चूकते, ने पूरी कोशिश की कि पत्रकारों को मना लें। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब रही बात डीसी साहब की बात तो वो पत्रकारों के सामने ये साबित करने में लग गए कि अंबाला, जो कि बाढ़ की दृष्टि से बहुत संवेदनशील क्षेत्र है, में अपनी तरफ से बाढ़ बचाव के पर्याप्त काम कर चुके हैं।

जब पत्रकारों ने कहा कि इस तरह एकतरफा बात करने का तो कोई औचित्य नहीं। पत्रकार बोले की हम गिनवातें हैं कि कहां कमियां रहीं। बच्चों की मौत का हिसाब दो। डीसी बोले कोई एक दो मरे तो मैं पूरे प्रशासन को वहां नहीं लगा सकता। पत्रकारों ने कहा कि आप कतई गैर जिम्‍मेदार बनया दे रहे हैं। बस इतनी बात जनाब को कहां बर्दाश्‍त थी। डीसी पूरे गुस्सें में आगे रखे माइकों पर हाथ मारा और पैर मारकर अपनी चेयर पीछे धकेली और बोले जाओ पत्रकारों जो तुम्‍हे लिखना है और जो तुम्‍हे करना है कर लो।

उधर जनसम्‍पर्क अधिकारी बिंद्रा पत्रकारों को एहसास कराने में लगे कि पत्रकार किस मुंह से उखड़ रहे हैं, इनके ढेरों काम भी तो हम करके देते हैं। वैसे भी बिंद्रा पत्रकारों के बीच चुगली चर्चा करके फूट डालने में माहिर व्यक्ति हैं। ऐसे में डीसी शेखर विद्यार्थी और जनसम्‍पर्क अधिकारी केवल बिंद्रा की जिद के आगे बाढ़ बचाव के अधूरे कामों तथा 12 लोगों की जान पर संकट को लेकर प्रेस बात नहीं कर पाई।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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