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अखिलेश के राज में अपराधियों से ज्‍यादा पुलिस का आतंक

सुल्‍तानपुर। अप्रचंड बहुमत पाकर सरकार बनाते ही प्रदेश के युवा तेज़ तर्रार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया था कि प्रदेश के अन्दर से अपराध खत्म कर दिया जायगा। लेकिन जनपद में दिनों दिन बढ़ते हुए अपराध के ग्राफ को देख ऐसा लग रहा है कि यहां तो लॉ-इन-आर्डर ही फेल हो चुका है। जिसकी मुख्य कुसूरवार कोई और नहीं बल्कि जनपद की पुलिस  अधिक्षिका हैं। बतौर बानगी टाटिया नगर कॉण्ड, लम्भुआ में सपा नेताओं द्वारा व्यापारी की ज़मीन पर कब्जे का मामला, सम्पन्न हुए निकाय चुनाव के बाद करौंदिया मोहल्ले में सभासद प्रत्याशी पर हमले का मामला या फिर ताज़ा तरीन ईटीवी के पत्रकार के घर लाखों की चोरी का मामला। इन सभी ने एसपी की लचरशीलता की पोल खोल कर रख दिया है।

सुल्‍तानपुर। अप्रचंड बहुमत पाकर सरकार बनाते ही प्रदेश के युवा तेज़ तर्रार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया था कि प्रदेश के अन्दर से अपराध खत्म कर दिया जायगा। लेकिन जनपद में दिनों दिन बढ़ते हुए अपराध के ग्राफ को देख ऐसा लग रहा है कि यहां तो लॉ-इन-आर्डर ही फेल हो चुका है। जिसकी मुख्य कुसूरवार कोई और नहीं बल्कि जनपद की पुलिस  अधिक्षिका हैं। बतौर बानगी टाटिया नगर कॉण्ड, लम्भुआ में सपा नेताओं द्वारा व्यापारी की ज़मीन पर कब्जे का मामला, सम्पन्न हुए निकाय चुनाव के बाद करौंदिया मोहल्ले में सभासद प्रत्याशी पर हमले का मामला या फिर ताज़ा तरीन ईटीवी के पत्रकार के घर लाखों की चोरी का मामला। इन सभी ने एसपी की लचरशीलता की पोल खोल कर रख दिया है।

गौरतलब हो कि क्षेत्राधिकारी के पद पर कार्य कर रही अलंकृता सिंह को तेज़ तर्रार सीएम के निर्देश पर जिले के पुलिस प्रमुख का प्रभार सौंपा गया। कयास यह लगाया गया था कि एसपी श्रीमती सिंह कानून व्यवस्था में चार चांद लगा देंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गुज़रे 16 जून को टाटिया नगर में यह इबारत लिखी गई। एसपी के चहेते व सजातीय होने का लाभ उठाते हुए एसओजी प्रभारी बने अभिषेक सिंह की एक नादानी ने तॉडव का रुप ले लिया था, जिसमें दर्जन भर पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी घायल हुए थे। तत्कालीन डीएम की गाड़ी भी तॉडव की भेंट चढ़ गई थी। इस पूरे तॉडव का सच उस समय और उजागर हुआ था जब खिसयानी बिल्ली के मानिंद हुई पुलिस ने घटना में मृतकों को भी नामजद कर दिया था।

अभी यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि लम्भुआ में सपा के विधानसभा प्रभारी व लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष ने एसपी समेत पुलिस को हमवार कर व्यापारी की जमीन पर मारपीट कर जबरन कब्जा कर लिया था। पहले मुकदमा न दर्ज करने की कसम खाकर बैठी एसपी ने बाद में उक्त मामले में सरकार और पुलिस की किरकिरी होने के बाद मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिये। उधर निकाय चुनाव के सम्पन्न होने के बाद कोतवाली नगर के करौंदिया इलाके में सभासद पवन सोनकर के घर पर विपक्षियों ने तॉडव रचते हुए हमला बोल दिया था। इन सभी मुद्दों पर पुलिस की भूमिका संदेहास्पद रही। रही सही कसर बीते मंगलवार की रात पूरी हो गई। एसपी साहिबा के बंगले से महज दो सौ कदम की दूरी पर स्थित करौंदिया मोहल्ले में किराये के भवन में रह रहे ई0टी0वी0 के पत्रकार आलीम शेख के घर पर चोरों ने धावा बोलते हुए उनकी मोटर साइकिल, वीडियो कैमरा, माइक व आईडी, आठ हजार की नगदी, एटीएम कार्ड, चेक बुक और पास बुक पर हाथ साफ करते हुए आराम से भाग निकलने में सफलता प्राप्त की।

इस घटना को देखने के बाद बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि घटना स्थल से मात्र पचास कदम की दूरी पर महिला थाना और सौ कदम की दूरी पर पुलिस लाइन स्थित है। आखिर पुलिस के उच्चाधिकारी और मातहत कौन सी कुंभकर्णी नींद सो रहे थे कि उन्हें कुछ पता नहीं चला। औपचारिकता निभाने के लिये पुलिस को जब सुबह घटना की भनक लगी तो तकनीकि टीमों के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचकर मामले की इतिश्री कर ली। पुलिस को घटना के बारह घंटें गुजरने के बाद भी घटना के आरोपी ढूढ़ें नहीं मिल रहे। जबकि दबाव व अन्य मामलों में पीठ थपथपवाने के लिये पुलिस मामले का खुलासा कर ही लेती है। अब पता नहीं कि पुलिस अगले दिनों में घटना का सत्यता के साथ पर्दाफाश कर भी पाती है या नहीं इस आशय का जवाब अतीत के गर्त में है। 

लेखक असगर नकवी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. 

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