दैनिक जागरण समूह में फिर उठापटक होने की खबर है। पता चला है कि लखनऊ में चीफ रिपोर्टर-विदाउट इंक्रीमेंट राजीव ओझा ने पल्ला से झाड़ लिया है। उनकी नई पारी अब हिन्दुस्तान के साथ शुरू हुई है। अपने इतने बड़े स्थापित खम्भे के खिसक जाने से जागरण में अफरातफरी का माहौल बताया जाता है। राजीव फैजाबाद के ब्यूरो चीफ के तौर पर काम कर रहे थे।
राजीव यह वही शख्स हैं जिन्होंने दो साल पहले जागरण के भीतर हुई केंद्रीय परीक्षा में टाप किया था। इस रिजल्ट के चलते उन्हें वरिष्ठ संवाददाता के आगे चीफ रिपोर्टर का प्रमोशन दिया गया था। लेकिन हैरत की बात रही कि राजीव को इस नये पद का वेतनमान नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, परीक्षा में टॉप करने की सजा के तौर उन्हें फैजाबाद जैसे मंडलीय ब्यूरो प्रमुख के पद से हटा कर कनिष्ठ संवाददाता के समतुल्य मानते हुए लखीमपुर जिला का प्रभारी बना दिया गया था।
राजीव के करीबियों के अनुसार पिछले लम्बे समय से वे अपने साथ चल रहे अन्याय के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे। लेकिन बीती शाम प्रबंधन ने ऐलान कर दिया कि था कि न तो राजीव दीक्षित का घटाया गया कद वापस किया जाए और न ही इंक्रीमेंट मिलेगा। इसके बाद से ही राजीव ने तय किया कि वे अब जागरण समूह को छोड़ देंगे। नतीजतन, उन्होंने फौरन इस्तीफा दे दिया।
हालांकि बताते हैं कि पिछले लम्बे समय से ओझा हिन्दुस्तान समेत कई समूहों के संपादकों के सम्पर्क में थे। इस्तीफा के फौरन बाद ही उन्होंने अपने सम्पर्कों को फिर टटोला और आखिरकार हिन्दुस्तान ज्वाइन कर दिया। हालांकि अभी यह पता नहीं चला है कि राजीव की तैनाती कहां होगी, लेकिन जानकारी के मुताबिक राजीव को अपने फैजाबाद जिला का प्रभारी का दायित्व सौंपा जा सकता है। अगर यह फेरबदल हुई तो फैजाबाद के मौजूदा प्रभारी आशुतोष पांडेय को वापस वाराणसी भेजा जा सकता है, जो वाराणसी वापस जाने के लिए लम्बे से प्रयास कर रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक जागरण समूह में वरिष्ठ कई लोग लम्बे समय से अपने खोये गये अपने कद को वापस करने की जोड़तोड़ कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन उनकी बात मानने को तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि राजीव कांड के बाद हो सकता है कि जागरण से कई दिग्गज अपना पाला बदल दें।





