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सन्‍मार्ग, रांची को फिर एक संपादक की तलाश

: लेट-लतीफ मिल रहा है कर्मचारियों को वेतन : सन्मार्ग के रांची संस्करण को फिर एक संपादक की तलाश है. पांच महीने तक साथ देने के बाद झारखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार तथा संपादक हरि नारायण सिंह 30 जून को संस्थान से इस्‍तीफा दे चुके हैं. उनके पूर्ववर्ती संपादक वैजनाथ मिश्र न्यूज़ 11 से वापस लौटने को तैयार नहीं हैं. इस संस्करण के फ्रेंचाइजी प्रेम चाहकर भी इस पद पर स्वयं को ज्यादा दिनों तक विराजमान नहीं रख सकते. कारण उनकी छवि है. उन्हें संपादक के रूप में मीडिया जगत स्वीकार नहीं करेगा. प्रशासनिक महकमे में भी इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा.

: लेट-लतीफ मिल रहा है कर्मचारियों को वेतन : सन्मार्ग के रांची संस्करण को फिर एक संपादक की तलाश है. पांच महीने तक साथ देने के बाद झारखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार तथा संपादक हरि नारायण सिंह 30 जून को संस्थान से इस्‍तीफा दे चुके हैं. उनके पूर्ववर्ती संपादक वैजनाथ मिश्र न्यूज़ 11 से वापस लौटने को तैयार नहीं हैं. इस संस्करण के फ्रेंचाइजी प्रेम चाहकर भी इस पद पर स्वयं को ज्यादा दिनों तक विराजमान नहीं रख सकते. कारण उनकी छवि है. उन्हें संपादक के रूप में मीडिया जगत स्वीकार नहीं करेगा. प्रशासनिक महकमे में भी इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा.

इसलिए उन्हें एक ऐसा नामी-गिरामी चेहरा चाहिए जो उनके आदेशों पर काम करे तथा मीडिया में उसकी अच्‍छी खासी पकड़ हो जिससे धौंस जमाया जा सके. पिछले तीन वर्षों में छह संपादक आजमाए जा चुके हैं. अब सातवें की तलाश है. अभी तक कोई उनकी कसौटी पर खरा नहीं उतरा. झारखंड के कई लब्ध प्रतिष्ठित पत्रकार इस संस्थान में आकर अपनी भद्द पिटवा चुके हैं. पता नहीं अब किसकी बारी है. अभी इस संस्थान से एक अंग्रेजी अखबार मॉर्निंग इंडिया को लॉंच करने की तैयारी है. एक उर्दू अखबार अवामी न्यूज़ पहले से बाजार में है. सन्मार्ग को मिलाकर अभी तीन अखबार छप रहे हैं. उनमें दो को डीएवीपी और आईपीआरडी में सूचीबद्ध कराया जा चुका है. सरकारी-गैर सरकारी मिलाकर महीने में करीब 20 -25 लाख के विज्ञापन आ जा रहे हैं.

संस्थान लाभ में है और लगातार अपने उत्पाद बढ़ाता जा रहा है. लेकिन कर्मियों को सुविधाएं और भत्ते की बात तो दूर समय पर वेतन तक नहीं दिया जा रहा है. अभी तक अप्रैल महीने के वेतन का भी भुगतान नहीं हुआ है. किसी कर्मी का पीएफ नहीं कटता है. रजत गुप्ता ने इसके लिए दबाव बनाया तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. हरि नारायण सिंह ने समय पर वेतन भुगतान का प्रयास किया तो ऐसा माहौल बनाया गया कि वे संस्थान छोड़कर चले जाएँ. अब हरि नारायण जी अपना कोई अखबार शुरू करने जा रहे हैं ऐसी चर्चा है. प्रेम को डर है कि सन्मार्ग के कुछ लोग उनके अखबार में जा सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि इसी आशंका के कारण कर्मियों का वेतन रोक रखा गया है. इस संस्थान में कर्मियों को दो वक़्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है. किसी नए अखबार के आगमन के इन्तजार में वे सिर्फ अपने दिन काट रहे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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