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फर्जी मामले में फंसाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पत्रकार

एनडीपीएस का कथित फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ लखनऊ के एक पत्रकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। पीड़ित ने ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 182 के तहत मुकदमा चलाने की मांग हाईकोर्ट से की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस आग्रह को जांच स्थानांतरित करने का मसला मानते हुए किसी अन्य शाखा से जांच कराने से इंकार कर दिया था।

एनडीपीएस का कथित फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ लखनऊ के एक पत्रकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। पीड़ित ने ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 182 के तहत मुकदमा चलाने की मांग हाईकोर्ट से की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस आग्रह को जांच स्थानांतरित करने का मसला मानते हुए किसी अन्य शाखा से जांच कराने से इंकार कर दिया था।

पुलिस की ज्यादती के कथित शिकार ज्ञानेश कुमार मिश्रा की ओर से लखनऊ पुलिस के खिलाफ अधिवक्ता पवन शुक्ला ने सर्वोच्च अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। जस्टिस पी.सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली पीठ शुक्रवार को मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में कहा गया है कि जिस मामले में ट्रायल समाप्त हो चुका हो, उसकी जांच स्थानांतरित करने का सवाल ही नहीं उठता। हाईकोर्ट में दायर याचिका में जांच स्थानांतरित करने का आग्रह नहीं किया गया फिर भी खंडपीठ ने इस तरह का आदेश दिया। याद रहे कि फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 के तहत मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान है। फर्जी मुकदमे का आरोप साबित होने पर छह माह की अधिकतम सजा हो सकती है।

गौरतलब है कि अलीगंज पुलिस ने मिश्रा के खिलाफ 2009 में स्मैक रखने तथा अवैध हथियार रखने के अपराध में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। ट्रायल कोर्ट ने इसी वर्ष पांच अप्रैल को उसे बरी कर दिया। इसके बाद मिश्रा ने फर्जी केस दर्ज करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 के तहत मुकदमा चलाने का अनुरोध किया। इस संबंध में दायर याचिका का हाई कोर्ट ने 29 मई को निपटारा किया। लेकिन हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में पुलिस के खिलाफ जांच का जिक्र नहीं किया बल्कि मिश्रा की याचिका को जांच स्थानांतरित करने की याचिका के रूप में निपटाया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जांच अलीगंज थाने से सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कराने की मांग की है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। साभार : अमर उजाला

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