आज अखबारों में छपी एक खबर पर आपकी निगाह गई होगी. नयी दिल्ली डेटलाइन से इस खबर में कहा गया है कि भारतीय प्रेस परिषद की कल हुई बैठक हंगामेदार रही जिसमें सदस्यों ने इसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के पत्रकारों के संबंध में दिये गये बयान पर कड़ी आपत्ति प्रकट की और काटजू ने बयान वापस लेने से इनकार कर दिया जिसके बाद चार प्रकाशक सदस्य बैठक छोडकर बाहर चले गये.
नवगठित परिषद की पहली बैठक में करीब करीब सभी सदस्यों ने काटजू के विवादास्पद बयान के लिए उनकी आलोचना की. काटजू ने कहा था कि मीडिया में अधिकतर लोगों का बुद्धिमानी का स्तर बहुत खराब है और उन्हें अर्थशास्त्र या राजनीति विज्ञान, दर्शनशास्त्र, साहित्य की जानकारी नहीं है.
सदस्यों ने कहा कि काटजू को सभी मीडियाकर्मियों को एक ही चश्मे से नहीं देखना चाहिए. बैठक में शामिल हुए एक सदस्य ने कहा, ‘‘अधिकतर सदस्यों का मानना था कि उनके बयान अपमानजनक और अनुचित हैं और वह उस संस्थान को कमजोर कर रहे हैं जिसके वह प्रमुख हैं.’’ चार प्रकाशक सदस्यों. डॉ आर लक्ष्मीपति दिनामालार, वी के चोपडा फ़िल्मी दुनिया, संजय गुप्ता जागरण और विजय कुमार चोपडा पंजाब केसरी ने अध्यक्ष काटजू की टिप्पणियों पर सख्त ऐतराज जताया और उनसे बयान वापस लेने की मांग की.
जब काटजू ने बयान वापस लेने से मना कर दिया तो चारों सदस्य बैठक छोडकर चले गये. सूत्रों के मुताबिक काटजू ने कहा कि वह धमकाने पर माफी नहीं मांगेंगे और इस मुद्दे पर पहले ही स्पष्टीकरण दे चुके हैं. बैठक में शामिल एक सदस्य ने कहा कि दो सदस्यों ने काटजू की सफाई पर समर्थन जताया.
इस खबर में चार प्रकाशकों के नाम हैं जो काटजू से इसलिए नाराज हैं कि उन्होंने मीडिया में काम कर रहे ज्यादातर लोगों का बौद्धिक स्तर खराब बताया था. दैनिक जागरण के संपादक संजय गुप्ता भी इन चार प्रकाशकों में से एक हैं. आप सभी को याद होगा कि ये वही संजय गुप्ता हैं जिनके नेतृत्व में पूरे देश में दैनिक जागरण ने पेड न्यूज का अभियान चलाया. प्रभाष जोशी जैसे लोगों ने इनसे इस मुद्दे पर संवाद करना चाहा तो इन्होंने कभी मुंह नहीं खोला और कभी सामने नहीं आए. ये वही संजय गुप्ता हैं जिनके नेतृत्व में दैनिक जागरण में ज्यादातर ऐसे पत्रकार रखे जाते हैं जिनका आईक्यू लेवल बेहद कमजोर होता है, जिनका सामान्य ज्ञान बेहद घटिया होता है, उनमें चापलूसी उगाही चरण स्पर्श जैसी योग्यताएं होती हैं इसी कारण वे आगे बढ़ते रहते हैं.
दैनिक जागरण ने कभी भी अपने यहां बेहद तेजतर्रार, बुद्धिमान और बेबाक लोगों को बर्दाश्त नहीं किया. तो ये महाशय संजय गुप्ता जो कई तरह के पापों के पिता हैं, काटजू और उनके बयान की आलोचना कर रहे हैं और विरोध में बैठक छोड़कर चले जा रहे हैं. संजय गुप्ता जी, पहले आप पेड न्यूज और भाई-भतीजावाद पर कुछ बोलिए. प्रायश्चित कीजिए, फिर काटजू पर उंगली उठाइएगा. जो खुद सिर से पांव तक अनैतिकता में डूबा हो, वह नैतिकता की बात कैसे कर सकता है. काटजू ने अपने पूरे करियर में जिस बेबाकी, इमानदारी और जनपक्षधरता का जीवन जिया है, उसका अगर एक प्रतिशत भी संजय गुप्ता जी लें, सीख लें तो वे मीडिया इंडस्ट्री का बहुत भला कर सकते हैं.
आजकल का दौर ऐसा है कि जो सच बोलता है, बेबाकी से जीता है उसे सारे चोर-उचक्के घेर-घार कर मार डालने की तैयारी कर लेते हैं. काटजू के साथ भी यही सुलूक हो रहा है. हम पत्रकार काटजू से कहना चाहेंगे कि बंधु आप लगे रहो, चढ़े रहो इन पर. आपका बयान बिलकुल सही है. मीडिया मालिकों ने अपने कर्मियों का बौद्धिक स्तर बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया. न कोई ट्रेनिंग सिस्टम है, न कोई पढ़ाई लिखाई के लिए अवकाश की व्यवस्था है, न कोई रिफ्रेशर कोर्स है. मीडिया मालिक तो पत्रकारों को कम पैसा देकर इतना ज्यादा काम करा लेना चाहते हैं कि बनियागिरी का नया कीर्तिमान स्थापित हो जाए. बारह घंटे तक रोजाना कोल्हू के बैल की तरह काम करने वाले पत्रकार के पास सामान्य ज्ञान अपडेट करने के लिए वक्त ही नहीं होता, ऐसे में वह कैसे खुद का मानसिक स्तर बढ़ा सकता है. बुद्धिमानी के खराब स्तर के लिए और कोई नहीं बल्कि ये संजय गुप्ता जैसे लोग ही जिम्मेदार हैं.





