समाचार प्लस चैनल के कई खुलासों ने उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा रखा है. इसकी जद में भ्रष्टाचार के कई मामलों को लेकर चर्चा में आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और उनके चेले चपाटी भी हैं. निशंक के कार्यकाल में उनकी स्टेट मशीनरी और पुलिस के निशाने पर रहे पत्रकार उमेश कुमार के चैनल समाचार प्लस ने राज्य में भ्रष्टाचार के गड़े मुर्दे उखाड़ने शुरू किए तो निशंक के चेलों के पेट में दर्द शुरू हो गया है. पिछले दिनों उनके खास माने जाने वाले गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने भी उमेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उमेश की गिरफ्तारी की मांग भी की.
इस बारे में पूछे जाने पर उमेश कुमार कहते हैं कि पहले तो निशंक के लोगों को अपनी सामान्य ज्ञान दुरुस्त रखनी चाहिए. लोकतंत्र है वे कोई भी आरोप लगा सकते हैं. हम इसका प्रतिवाद नहीं करते, परन्तु जब हमने भ्रष्टाचार के पोल खोलने शुरू किए तो निशंक एंड कंपनी बौखला गई है. रघुनाथ सिंह नेगी ने भी इसी बौखलाहट में मेरी गिरफ्तारी की मांग करते हुए कई आरोप जड़ डाले. जाहिर है सारे मामले राजनीति प्रेरित रहे और निशंक के भ्रष्टाचार की पोल खोलने के एवज में लगाए गए. पर नेगी यह बताना भूल गए कि उनकी ही पार्टी की खंडूरी सरकार ने उनके ऊपर लगाए गए अधिकांश फर्जी मुकदमे वापस ले लिए.
उमेश कुमार ने बताया कि खंडूड़ी सरकार ने ही उनके उपर रखे गए इनाम को भी खतम कर दिया. जांच में मामला फर्जी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर को भी निरस्त किया जा चुका है. तमाम मामलों में जांच के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है, परन्तु बौखलाहट में नेगी उनके खिलाफ मुकदमों की गिनती बढ़ा कर अपनी खीझ निकाल रहे हैं. आखिर अचानक ऐसी कौन सी जरूरत आन पड़ी कि मेरी गिरफ्तारी की मांग करने लगे. उमेश कहते हैं निशंक एंड कंपनी को शंका है कि एक पत्रकार होने के नाते मैं इन लोगों की करतूतों की पोल खोलकर रख दूंगा. इसलिए बिना मौसम के मेढ़क की तरह टर्र टर्र करने लगे हैं. हालांकि इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूंगा. जिनको भौंकना है वो भौंकता रहे. कलम और खबरें चलती रहेंगी.





