जैसे-जैसे आरटीआई से सूचना मिल रही है वैसे-वैसे जागरण के फर्जीवाड़े तथा आर्थिक अपराधों की पोल खुलती जा रही है. आरटीआई से मांगी कई एक सूचना में जानकारी मिली है कि बिहार विज्ञापन प्राधिकृत समिति ने 2008 में दैनिक जागरण के भागलपुर तथा मुजफ्फरपुर के अवैध संस्करणों को भी राज्य विज्ञापन स्वीकृत सूची में शामिल किया है. जाहिर है कि जागरण के इन अवैध संस्करणों को पिछले कई सालों में करोड़ों रुपये के सरकारी विज्ञापन मिल चुके हैं.






