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दो महीने बाद कोडरमा जेल से रिहा हुआ प्रियभांशु

: निरूपमा पाठक मामले में हाइकोर्ट से तीन दिन पहले मिली थी जमानत : पत्रकार निरूपमा पाठक हत्याकांड में प्रियभांशु रंजन गुरुवार को दो महीने बाद कोडरमा मंडल कारा से रिहा हो गया। झारखंड हाइकोर्ट से गत सोमवार को जमानत मिलने के बावजूद तीन दिन बाद उसकी रिहाई संभव हो पायी। निरूपमा हत्याकांड में पुलिस ने प्रियभांशु को भी अभियुक्त बनाया था। दो साल पुराने और बहुचर्चित निरुपमा पाठक की मौत के मामले में उसके प्रेमी प्रियभांशु रंजन ने 5 जून को स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। कोर्ट ने आत्मसमर्पण के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 

: निरूपमा पाठक मामले में हाइकोर्ट से तीन दिन पहले मिली थी जमानत : पत्रकार निरूपमा पाठक हत्याकांड में प्रियभांशु रंजन गुरुवार को दो महीने बाद कोडरमा मंडल कारा से रिहा हो गया। झारखंड हाइकोर्ट से गत सोमवार को जमानत मिलने के बावजूद तीन दिन बाद उसकी रिहाई संभव हो पायी। निरूपमा हत्याकांड में पुलिस ने प्रियभांशु को भी अभियुक्त बनाया था। दो साल पुराने और बहुचर्चित निरुपमा पाठक की मौत के मामले में उसके प्रेमी प्रियभांशु रंजन ने 5 जून को स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। कोर्ट ने आत्मसमर्पण के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 

 
प्रियभांशु पर निरुपमा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है और इस बाबत भादवि की धारा 306 के तहत आरोप पत्र भी दाखिल किया गया है। ज्ञात हो कि बिजनेस स्टैंडर्ड की पत्रकार निरुपमा का शव 29 अप्रैल 2010 को कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया स्थित चित्रगुप्त नगर कॉलोनी में उसके निवास स्थान पर मिला था। प्रियभांषु रंजन ने निरुपमा के परिजनों पर उसकी हत्या का आरोप लगाया था। इस बाबत पुलिस ने निरुपमा की मां सुधा पाठक को गिरफ्तार किया  था। सुधा पाठक को तीन महीने बाद जमानत पर रिहा किया गया था। वहीं निरुपमा के परिजनों का आरोप था प्रियभांशु ने निरुपमा को आत्महत्या के लिए उकसाया था। घटना के बाद कई महीनों तक मौत की गुत्थी हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी रही। मामले में पिछले वर्ष एक नया मोड तब आया जब पुलिस ने अनुसंधान के दौरान निरुपमा के प्रेमी के अलावा उसके माता, पिता धर्मेंद्र पाठक और भाई समरेन्द्र पाठक पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला सही पाया और इसी आरोप में चारों के विरुद्ध न्यायालय में भादवि की धारा 306 के तहत अंतिम प्रपत्र समर्पित किया।
 
इस मामले में जहां निरुपमा की मां सुधा पाठक जमानत पर है, वहीं उसके पिता धर्मेद्र पाठक और समरेंद्र पाठक को अदालत से राहत मिली हुई है, जबकि प्रेमी प्रियभांशु की अग्रिम जमानत याचिका सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दी, जिसके बाद उसने कोडरमा न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। प्रियभांशु की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में उनका कोई संबंध नहीं है। पुलिस के पास उनके खिलाफ किसी प्रकार का साक्ष्य नहीं है। इस मामले में उसे घसीटा जा रहा है। सुनवाई के बाद झारखंड हाई कोर्ट में जस्टिस एचसी मिश्र की अदालत ने सोमवार को जमानत याचिका मंजूर कर ली और उसे जमानत पर रिहा करने का आदेष दिया।
 
कोडरमा से समीर की रिपोर्ट.
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