यशवंत जी, मेरा नाम प्रकाश चंद कुकरेती है. मैं उत्तराखंड का मूल निवासी हूँ. मैं देल्ही मैं नौकरी करता हूँ. मैं देल्ही मैं गोविंदपुरी कालकाजी में रहता हूँ है. व मेरा फोन नंबर +91- 9818851861 है. मेरी शादी मैं कुमारी मीना निवासी पानीपत के साथ सन 2007 में हुई थी. शादी के कुछ समय बाद सन 2008 में मैं अपनी पत्नी को देल्ही लेकर आ गया. मगर बहुत जल्दी लड़की की अनैतिक मांगों के कारण हमारे बीच तनाव रहने लगा. जब मैंने लड़की की अनैतिक मांगों से समझौता करने से इंकार कर दिया तो लड़की मार-पीट का आरोप लगाकर अपने माँ के साथ पानीपत चली गयी.
उस वक्त मेरे पिताजी ने और लड़की के जीजाजी एवंम लड़की की माता जी ने हमारे बीच समझौता करवाया. और समझौते के अनुसार यह तय हुआ की मेरी पत्नी अब से मेरे गावं में मेरे माता एवं पिताजी के साथ रहेगी. फिर में सन 2009 में अपनी पत्नी को फिर देल्ही लेकर आया. मगर इस बार भी वही कहानी दोहराई गयी. और लड़की फिर मार पीट के आरोप लगाकर फिर अपनी माँ के पास पानीपत चली गयी. (दरअसल मेरे ससुर जी का कोई लड़का नहीं है उनकी चार लड़कियां हैं. लड़की चाहती थी कि में अपने सब घर वालों से रिश्ते नाते तोड़कर उसके साथ उसके माता पिता के साथ पानीपत में घर जंवाई बनकर रहूँ मगर मैं इसके लिए कैसे तैयार हो सकता हूँ.
इस मामले में न सिर्फ लड़की के घर वाले लड़की के साथ हैं बल्कि लड़की को वक्त बेवक्त भड़काने का कम भी करते रहते हैं) खैर लगभग दो महीने के बाद हमारे बीच समझौता हुआ. इस बार समझौता लड़की के जीजाजी ने अपने घर शामली (सहारनपुर) में करवाया. समझौते के हिसाब से लड़की फिर मेरे गाँव में मेरे माता पिता के साथ रहने लगी. इस दौरान हमारी एक लड़की भी हुई. मैंने सोचा कि चलो अब सब कुछ ठीक हो जायेगा. मगर मुझे क्या पता था कि लड़की के दिमाग मैं कुछ और ही चल रहा है. इसी वर्ष 24 मई 2011 को मेरे पिताजी का फोन आया की मेरी पत्नी किसी को बिना बताये अपनी लड़की को छोडकर कहीं चली गयी है. और जिसके फौरन बाद मैंने अपने ससुर जी एवं सास को फोन किया (इन फोन की मेरे पास रिकार्डिंग भी है) तब मुझे पता चला कि मेरी पत्नी पानीपत में अपने पिताजी के पास आ रही है. इस बार यह बताया गया की मेरे पिताजी और माता जी नै उसे तीन दिनों से खाना नहीं दिया है और लड़की के साथ मार–पिटाई भी की है.
24 मई 2011 से लेकर कई बार हमारी आपस में बात हुई. हर बार लड़की के पिताजी यही कहते रहे कि मैं आपके पास आ रहा हूँ. यहाँ तक कि इसी वर्ष जुलाई मैं मेरे दादाजी का देहांत हुआ. मगर फिर भी लड़की के पिताजी हमारेघर नहीं आये. कई बार फोन करने के बाबजूद अंततः लड़की वाले इसी महीने की 13 तारीख को समझौते के लिए आये मगर हमारे यह कहने पर कि जो भी समझौता होगा वह लिखित में होगा, वह तैयार नहीं हुए और वापस अपने घर चले गए. (इस दौरान हमारी जो भी बात हुई वह भी मेरे पास रिकॉर्डेड है. यहाँ तक कि दो साल पहले हमारी जो-जो बातें हुई मेरे पास वह सब रिकॉर्डेड है इसके अलावा मैंने उसी दिन यानि जिस दिन मेरी पत्नी घर से बिना बताये चली गई थी यानि कि 24 मई को एक फैक्स S.P. पानीपत S.P. पौड़ी गढवाल व कमिश्नर पौड़ी गढ़वाल को भी भेजा था जिसमे मैंने लगभग सारी बातें लिखी थी जिस पर लड़की वालों से और हमसे पूछताछ भी हुई थी.
जहाँ तक मेरी जानकारी है लड़की ने या लड़की के घर वालों ने थाने में कहा था कि उससे मारपीट कि गई थी जो कि झूठ है और इसका मेरे पास ऑडियो सबूत भी है. तब से वह कह रही है कि या तो हमारे सामने झुको वरना हम तुम सबको दहेज के केस में अंदर कर देंगे. तब से हम काफी भयभीत हैं. और मानसिक रूप से काफी परेशान हैं. हम भी इंसान हैं.आखिर हमारी गलती क्या है.क्या हमारी गलती यही है की हमने किसी की नाजायज मांगें नहीं मानी. आखिर यह कहाँ का न्याय है कि अगर आप नाजायज मांगें नहीं मानें तो आपको दहेज के केस मैं बंद करवा दिया जाये. क्या किसी को धमकी देकर अपनी नाजायज बात मनवाना गैर कानूनी नहीं है.
इसलिए मेरा सबसे एक सवाल है कि अगर मैंने कुछ किया ही नहीं तो फिर मेरे ऊपर दहेज का केस क्यूँ दर्ज होना चाहिए. कई लोग कह सकतें है कि अगर तुम सच्चे हो तो केस से डरते क्यूँ हो. उन सबको मैं कहना चाहता हूँ कि मैं बिल्कुल भी नहीं डरता हूँ मगर अगर लड़की वाले केस करेंगे तो वह वह कम से कम सात से दस लोगों के ऊपर केस करेंगे सबको अरेस्ट होना पड़ेगा सबको जेल जाना पड़ेगा और फिर सबको जमानत लेनी पड़ेगी तो फिर बताइए इस केस से कौन नहीं डरेगा. मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ जिससे मुझे कोर्ट कचहरी का चक्कर न लगाना पड़े. अगर झुककर लड़की को लाता हूँ तो फिर वही सब ड्रामा दुबारा शुरू हो जायेगा और अगर नहीं लाता हूँ तो केस दर्ज हो जायेगा तो समझ मैं नहीं आ रहा है कि क्या करूँ. अगर कोई बता सके तो उसकी बड़ी कृपा होगी.
नोट – यहाँ पर यह भी ध्यान देने वाली बात है की लड़की के जीजाजी जिन्होंने एक बार हमारा समझोता करवाया था ( मतलब मेरी पत्नी के जीजाजी यानी की मेरी पत्नी की दीदी के पति हैं) उन पर भी यह सब गुजर चुकी है. उनको भी मेरे ससुर ने इसी तरह धमकाकर या दहेज के केस की धमकी देकर अपने सामने झुका दिया था. आज उनकी हालत यह है कि वह अपनी पत्नी के साथ किराये के मकान में शामली जो की सहारनपुर में आता है में रह रहे हैं जबकि उनका दो मंजिला मकान शामली में ही है. यानी कि लड़का अपना मकान होते हुए भी अपने माँ बाप से मात्र सौ मीटर दूरी पर किराये के मकान में रह रहा है. कुल मिलकर मतलब यह है कि मेरी पत्नी के घरवाले इन सब बातों में निपुण हैं.
धन्यवाद
आपकी मदद का आकांक्षी
प्रकाश चंद कुकरेती





