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आईपीसी से हटाया जाए ब्रिटिश काल का राजद्रोह से जुड़ा कानून

कार्टूनिस्ट त्रिवेदी पर देशद्रोह के आरोपों की निंदा करते हुए मुंबई प्रेस क्लब ने मांग की है कि आईपीसी से राजद्रोह के कानून को हटाया जाना चाहिए. कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी पर देशद्रोह का आरोप लगया गया है. हालांकि उन्हें मंगलवार को जमानत दे दी गयी. फिल्मकार महेश भट्ट, इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के सदस्य मयंक गांधी और वरिष्ठ पत्रकार गुरबीर सिंह ने त्रिवेदी के कार्टूनों की प्रतियां प्रदर्शित कीं और सरकार को अपने खिलाफ देशद्रोह के मामले दाखिल करने की चेतावनी दी.

कार्टूनिस्ट त्रिवेदी पर देशद्रोह के आरोपों की निंदा करते हुए मुंबई प्रेस क्लब ने मांग की है कि आईपीसी से राजद्रोह के कानून को हटाया जाना चाहिए. कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी पर देशद्रोह का आरोप लगया गया है. हालांकि उन्हें मंगलवार को जमानत दे दी गयी. फिल्मकार महेश भट्ट, इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के सदस्य मयंक गांधी और वरिष्ठ पत्रकार गुरबीर सिंह ने त्रिवेदी के कार्टूनों की प्रतियां प्रदर्शित कीं और सरकार को अपने खिलाफ देशद्रोह के मामले दाखिल करने की चेतावनी दी.

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एच सुरेश ने कहा कि राजद्रोह से जुड़ा कानून ब्रिटिश काल का है. उन्होंने इसकी तुलना टाडा जैसे कानून से करते हुए कहा कि यह पुराना हो गया है और इसे हटाया जाना चाहिए. सुरेश ने कहा कि ब्रिटिशकाल में राजद्रोह के संबंध में बनाये गये कानून को ब्रिटेन में हटा लिया गया है लेकिन भारत में यह अब भी बरकरार है.
   
अन्ना हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के साथ मंगलवार को त्रिवेदी से आर्थर रोड जेल में मिलने वाले मयंक गांधी ने कहा कि व्यंग्य चित्रकार ने फैसला किया है कि जब तक उनके खिलाफ देशद्रोह के आरोपों को वापस नहीं लिया जाता वह जमानत अर्जी दाखिल नहीं करेंगे.
   
गांधी ने कहा कि हम कार्टूनिस्ट त्रिवेदी से अनुरोध करेंगे कि जमानत के लिए आगे आएं और देशद्रोह के मामले को समाप्त करने के लिए बड़ी लड़ाई लड़ें. महेश भट्ट ने कहा कि जब तक देशद्रोह का कानून रहेगा तब तक सत्ता में बैठे लोग प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि त्रिवेदी जैसे युवाओं के खिलाफ देशद्रोह के प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए जो बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई लड़ना चाहते हैं.

कार्टूनिस्ट असीम के समर्थन में उतरे जस्टिस काटजू

भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मार्कंडेय काटजू ने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी पर राजद्रोह का आरोप लगाने की निंदा करते हुए इसे 'मूर्खतापूर्ण' करार दिया और उनकी गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार राजनेताओं तथा पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

काटजू ने एक समाचार चैनल से कहा कि आरोप मूखर्तापूर्ण हैं और यह राजद्रोह नहीं है। यह सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग है। जिन राजनेताओं और पुलिस कर्मियों ने यह गिरफ्तारी की है, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्रिवेदी के खिलाफ जो कुछ भी किया जा रहा है, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है।

काटजू ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिज्ञों की आलोचना करने वाले कार्टून प्रकाशित होते रहते हैं। राजनेताओं को इसके प्रति सहिष्णु होना चाहिए। काटजू ने कहा कि यह तानाशाही नहीं है। आप लोगों को इस तरह गिरफ्तार नहीं कर सकते। किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करना अपराध है, जिसने भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध नहीं किया हो।

मुम्बई की अदालत ने रविवार को त्रिवेदी को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। त्रिवेदी अन्ना हजारे के समर्थक और राजनीतिक कार्टूनिस्ट हैं। उन पर अपनी वेबसाइट पर 'घृणित व ईल' सामग्री डालने का आरोप है।

असीम पर राजद्रोह ‘अपमानजनक’ : भाकपा

भाकपा ने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार किए जाने की आलोचना की है और उनके खिलाफ राजद्रोह को ‘अपमानजनक’ करार दिया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने मुंबई में कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार किए जाने की आज आलोचना की और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्टून बनाए जाने पर उनके खिलाफ राजद्रोह के आरोप लगाने को ‘अपमानजनक’ करार दिया.
    
पार्टी ने उन्हें तुरंत रिहा करने और उनके खिलाफ लगे आरोपों को हटाने की मांग की. पार्टी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता में  मौजूद राजद्रोह से संबंधित धारा की तत्काल समीक्षा की जरूरत है, क्योंकि अब इसका बार-बार दुरुपयोग किया जा रहा है. भाकपा पोलित ब्यूरो ने एक बयान जारी कर कहा कि त्रिवेदी को एक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के लिए कार्टून बना कर प्रकाशित करने के लिए गिरफ्तार किया गया. यह अपमानजनक है कि उनके खिलाफ राजद्रोह के आरोप लगाए गए हैं.

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