: कानाफूसी : सहारा के निवेशकों के पैसे लौटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सहारा मीडिया की भी हालत खराब है. इस बारे में लोग फेसबुक पर भी चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं. निवेशकों से लिए गए 24 हजार करोड़ की रकम उन्हें लौटा पाना कोई आसान खेल नहीं हैं और लौटाने का फैसला भी देश की उच्चतम न्यायालय का है जिसके आगे अब कोई सोर्स सिफारिश नहीं चल सकती. तीन महीने में ये पैसे लौटाने हैं. इसे लेकर सहारा में कोहराम मचा हुआ है.
सहारा के अंदर हालात खराब होने का अंदेशा लगाया जा रहा है. कई सहाराकर्मी अभी से सुरक्षित स्थान की तलाश में जुट गए हैं क्योंकि अगर बात हजार दो हजार करोड़ की होती तो शायद कुछ कहानी बन भी जाती लेकिन इतनी बड़ी रकम अम्बानी की सहायता से भी नहीं जुटाई जा सकती। इसलिए सहारा मीडिया में कार्यरत कई सहाराकर्मी अन्य चैनलों की शरण की जुगत में लग गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर चौबीस हजार करोड़ रुपये तीन महीने में नहीं लौटाए गए तो सहारा समूह की कुर्की की जाएगी।
इन आदेशों से सबको यह लगने लगा है कि शायद सहारा का अंतकाल नजदीक है। ऐसे में समझदार लोगों ने अपना ठिकाना तलाशना प्रारंभ कर दिया है। परन्तु दिक्कत यह है कि आजकल छंटनी और बंदी के दौर में इतनी जल्दी दूसरी जगह नौकरी कैसे मिल जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सहारा मीडिया के बास उपेंद्र राय के कंधों पर है। उन्हें सहारा मीडिया को भी आगे ले जाना है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उपजी स्थितियों से पार पाने में भी सहाराश्री को मदद देना है. देखना है कि सहाराश्री के बंदे इस हालत से कैसे निपट पाते हैं।
आगरा से पत्रकार अभिषेक द्वारा प्रेषित मेल पर आधारित. अभिषेक से संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए झटके से उबर पाएगा सहारा समूह





