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अरबों के फर्जीवाड़े में फंसते जा रहे हैं शोभना भरितया, शशिशेखर समेत कई ‘हिंदुस्तानी’ दिग्गज, बयान दर्ज

: हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला – 36 माह के घाटे को पाटने के लिए हिन्दुस्तान ने की जालसाजी और गोरखधंधा :  मुंगेर ।बिहार।, 15 सितम्बर। हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के दौ सौ करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले में पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के मार्ग-निर्देशन में आरक्षी उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचाल की ओर से समर्पित पर्यवेक्षण -टिप्पणी में पृष्ठ संख्या-05 में मुंगेर के वरीय अधिवक्ता, पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट श्रीकृष्ण प्रसाद ने सरकार के प्रमुख गवाह के रूप में दैनिक हिन्दुस्तान के निबंधन के गोरखधंधे को सविस्तार उजागर कर दिया है। उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक को बयान दिया कि बिहार सरकार के वित्त विभाग की अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या-195।2005-06 में भागलपुर से दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन बिना निबंधन शुरू होने की बात दर्ज है।

: हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला – 36 माह के घाटे को पाटने के लिए हिन्दुस्तान ने की जालसाजी और गोरखधंधा :  मुंगेर ।बिहार।, 15 सितम्बर। हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के दौ सौ करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले में पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के मार्ग-निर्देशन में आरक्षी उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचाल की ओर से समर्पित पर्यवेक्षण -टिप्पणी में पृष्ठ संख्या-05 में मुंगेर के वरीय अधिवक्ता, पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट श्रीकृष्ण प्रसाद ने सरकार के प्रमुख गवाह के रूप में दैनिक हिन्दुस्तान के निबंधन के गोरखधंधे को सविस्तार उजागर कर दिया है। उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक को बयान दिया कि बिहार सरकार के वित्त विभाग की अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या-195।2005-06 में भागलपुर से दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन बिना निबंधन शुरू होने की बात दर्ज है।

गवाह श्रीकृष्ण प्रसाद ने पुलिस उपाधीक्षक को बयान दिया है कि भागलपुर और मुंगेर से मुद्रित एवं प्रकाशित होने वाले दैनिक हिन्दुस्तान में वर्ष 2001 से 30 जून, 2011 तक आरएनआई नं- 44348।86, जो पटना के हिन्दुस्तान संस्करण के लिए आवंटित है, का प्रयोग किया गया जबकि 01 जुलाई, 2011 से 16 अप्रैल, 2012 तक आरएनआई नंबर के स्थान पर 'आवेदित' छापा जाने लगा। पुनः दिनांक 17 अप्रैल, 2012 को उक्त समाचार-पत्र में आरएनआई नंबर- बीआईएचएचआईएन । 2011।41407 छापा गया।

पुलिस उपाधीक्षक की पर्यवेक्षण-टिप्पणी में सरकारी गवाह श्रीकृष्ण प्रसाद आगे बयान करते हैं कि दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर एवं मुंगेर संस्करणों में बार-बार निबंधन संख्या बदलते रहने से स्वतः स्पष्ट होता है कि अभियुक्तों द्वारा गलत एवं फर्जी तरीके से उक्त स्थानों से समाचार पत्र का मुद्रण-प्रकाशन किया जा रहा है तथा अभियुक्तों को अपने कृत्यों को छिपाने के लिए समाचार-पत्र में बार-बार निबंधन संख्या बदलकर प्रकाशित करना पड़ रहा है। इन्होंने अपने बयान में यह भी बताया कि भागलपुर एवं मुंगेर से प्रकाशन के साथ ही दैनिक हिन्दुस्तान में सरकारी विज्ञापनों का प्रकाशन भी किया जाने लगा जबकि बिहार सरकार और केन्द्र सरकार की विज्ञापन नीति में यह स्पष्ट है कि कोई भी अखबार सरकारी विज्ञापन तभी छाप सकता है और आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकता है जब वह अखबार प्रेस रजिस्ट्रार से विधिवत निबंधित हो।

36 माह के घाटे को पाटने के लिए हिन्दुस्तान ने की जालसाजी और गोरखधंधा

डीएवीपी की विज्ञापन सूची में किसी दैनिक अखबार का नाम तब दर्ज होगा जब दैनिक अखबार का प्रकाशन 36 माह तक बिना रूके हो चुका होगा अर्थात 36 माह तक किसी भी अखबार को बिना सरकारी विज्ञापन के ही अखबार निकालना होगा, परन्तु उक्त नियमों की अनदेखी की गई. इस प्रकार गलत तरीके से सरकारी विज्ञापनों का प्रकाशन करते हुए राजस्व को क्षति पहुंचाई गई.

टाइम्स आफ इंडिया के पत्रकार काशी प्रसाद भी सरकारी गवाह बने

हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले में दैनिक प्रदीप और सर्चलाइट के पूर्व संवाददाता और वर्तमान में टाइम्स आफ इंडिया के जिला संवाददाता श्रीकाशी प्रसाद भी सरकारी गवाह बने। उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक के समक्ष अपने बयान में गवाह श्रीकृष्ण प्रसाद, जो काशी प्रसाद के जयेष्ठ पुत्र भी हैं, के बयान का पूर्ण रूपेण समर्थन किया और उनके द्वारा दिए गए बयान को दुहराया.

अधिवक्ता व पत्रकार बिपिन कुमार मंडल भी सरकारी गवाह बने :

मुंगेर के युवा अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट बिपिन कुमार मंडल भी दैनिक हिन्दुस्तान घोटाले में सरकारी गवाह बने। उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक के समक्ष अपने बयान में प्राथमिकी में दर्ज बातों और गवाह श्रीकृष्ण प्रसाद के बयान का पूर्ण रूपेण समर्थन करते हुए उनके द्वारा दिए गए बयान को ही दुहराया।

सभी अभियुक्तों के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित

मुंगेर पुलिस ने कोतवाली कांड संख्या-445।2011 में सभी नामजद अभियुक्तों शोभना भरतिया, शशि शेखर, अकु श्रीवास्तव, बिनोद बंधु, अमित चोपड़ा के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420 । 471 । 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8 ।बी.।, 14 एवं 15 के तहत लगाए गए सभी आरोपों को अनुसंधान और पर्यवेक्षण में सत्य घोषित कर दिया है।

सांसदों और बिहार के विधायकों से इस विज्ञापन घोटाले को संसद और विधान सभा और विधान परिषद में उठाने की अपील :

देश के माननीय सांसदों और बिहार के माननीय विधायकों से इस विज्ञापन घोटाले को आगामी संसद सत्र और बिहार विधानसभा और विधान परिषद में उठाने की अपील की गई है। देश की आजादी के बाद यह पहला मौका है कि माननीय सांसद और विधायक देश के कोरपोरेट मीडिया के अरबों-खरबों के सरकारी विज्ञापन घोटाले का सबूत सदन के पटल पर रख सकेंगे। अब तक अखबार ही देश के भ्रष्टाचारियों को अपने अखबारों में नंगा करते आ रहे थे लेकिन अब ऐसा दौर आ गया है कि खुद अखबार ही भ्रष्टाचार में लिफ्त हो गए हैं। अब माननीय सांसद और विधायक भी आर्थिक अपराध में डूबे शक्तिशाली मीडिया हाउस के सरकारी विज्ञापन घोटाले को संसद और विधान सभा और विधान परिषद में पेश कर आर्थिक भ्रष्टाचारियों को नंगा कर सकेंगे।

गिरफ्तारी का आदेश और आरोप-पत्र समर्पित होना बाकी है

विश्व के इस सनसनीखेज हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले में पुलिस अधीक्षक के स्तर से पर्यवेक्षण रिपोर्ट-02 जारी होने के बाद अब कानूनतः इस कांड में सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध गिरफ्तारी का आदेश और आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित करने की प्रक्रिया शेष रह गई है। देखना है कि मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के नेतृत्व में बिहार में आर्थिक अपराधियों के विरूद्ध चले रहे युद्ध में सरकार कब तक इस मामले में गिरफ्तारी का आदेश और आरोप-पत्र न्यायालय में समर्पित करने का आदेश मुंगेर पुलिस को देती है?

क्या सरकार अभियुक्तों को सजा दिला पाएगी?

विश्व के पाठक अब प्रश्न कर रहे हैं कि क्या बिहार सरकार दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले में शामिल कंपनी की अध्यक्ष शोभना भरतिया, प्रधान संपादक शशि शेखर और अन्य संपादकों को सजा दिलाने में भविष्य में सफल होगी?

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. मोबाइल नं- 09470400813


इससे संबंधित अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें- हिंदुस्तान विज्ञापन घोटाला


मुंगेर से श्रीकृष्ण

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