डीजल कीमतों में 13 फीसदी से भी अधिक वृद्धि करने और प्रति परिवार रसोई गैस सिलिंडरों की संख्या तय करते हुए सब्सिडी सीमित करने के बाद सरकार अपने इस फैसले को जायज ठहराने के लिए देशभर में मीडिया के जरिये प्रचार अभियान चलाने की योजना बना रही है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार माध्यमों के जरिये अगले कुछ दिनों में प्रचार अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
इंडियन ऑयल के एक अधिकारी ने कहा कि फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और अंतिम निर्णय लेना बाकी है। जून 2011 में सरकार ने जब डीजल, केरोसिन और रसोई गैस कीमतों में वृद्धि की थी, उस समय भी इस कदम के पीछे के कारणों को उजागर करने के लिए ऐसे ही प्रयास किए गए थे।
प्रचार अभियान के तहत सरकार जनता को यह बताने की कोशिश करेगी कि उसे क्यों यह फैसला लेना पड़ा। संभवत: इसमें कच्चे तेल के दाम बढऩे और अंतरराष्ट्रीय उत्पादों के मूल्य में अंतर का हवाला दिया जा सकता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी अवमूल्यन का भी जिक्र किया जा सकता है जिससे तेल आयात काफी महंगा हो गया है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)





