‘द हिंदू’ ग्रुप की पाक्षिक मैगजीन ‘फ्रंटलाइन’ आज से पाठकों को नये तेवर और कलेवर के साथ पढ़ने को मिलेगी. इस मैगजीन को आज उपराष्ट्रपति, हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में री-लॉन्च किया है. री-लॉन्च की गई मैगजीन की पहली कॉपी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रोमिला थापर को दी गई.
उप-राष्ट्रपति ने बदले हुए समय में नये पाठकों के लिए पत्रिका की प्रासंगिकता को बनाए रखने की इस पहल के लिए सम्पादकों और प्रकाशकों की सराहना की. उन्होंने विचारशील पाठकों की सेवा में ‘फ्रंटलाइन’ की लगातार सफलता की कामना की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि फ्रंटलाइन हमेशा से हर मुद्दे पर अच्छी पठन सामग्री प्रदान करने के अलावा उनका ज्ञानवर्धन करती रही है. इसलिए बॉलीवुड की भाषा में इसमें रीमिक्स की जरूरत नहीं है और न ही अनुमानों के साथ इसमें रोमांच डालने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि नये अवतार में पत्रिका में कला, संस्कृति, परम्परा, वन्यजीव, पर्यावरण और भूमि तथा लोगों के बारे में आकर्षक तस्वीरों के साथ लेख देखने को मिलेंगे. इसमें मीडिया और साहित्य, भारत के विकास संबंधी तस्वीरें, विज्ञान पत्रिका के अलावा सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर गहरा विश्लेषण पढ़ने को मिलेगा.
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि हिन्दू समूह की समृद्ध विरासत है और उसने निष्पक्षता और न्याय के अपने शुरूआती आदर्श वाक्य को बनाए रखा है. फ्रंटलाइन भी इसे आगे जारी रखेगी. श्री अंसारी ने कहा कि आज के युग में दृश्य–श्रव्य मीडिया, करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों संस्कृति और मनोरंजन की खबरों के लिए प्रमुख माध्यम बन गया है, इसके बावजूद महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर प्रकाशनों की वास्तविक और लोकप्रिय मांग बनी हुई है, जिसका स्थान ब्रेकिंग न्यूज़ की संस्कृति और इलैक्ट्रोनिक मीडिया की कतरने नहीं ले सकती.
री-लॉन्चिंग समारोह में “प्रजातंत्र में, संप्रभुता, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता” विषय पर एक बहस का ओयजन भी किया गया है जिसमें कांग्रेस नेता दिग्गविजय सिंह, लेखक-पत्रकार अरूण शौरी, कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य सीताराम येचुरी और जेएनयू के रिसर्च फेलो प्रभात पटनायाक हिस्सा लेंगे. इस सेशन को ‘फ्रंटलाइन’ और ‘द हिंदू’ के पूर्व संपादक एन राम मॉडरेट करेंगे.
इसके अलावा एनडीए के चेयरमैन लाल कृष्ण आडवाणी, कम्युनिस्ट पार्टी के प्रकाश करात और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी आयोजन में शामिल होंगे. यह आयोजन इंडियन हैबिटेट सेंटर में आज किया जा रहा है.
मैग्जीन में कुछ नई चीजें जोड़ी जा रही हैं जिनमें वर्ल्डव्यू होगा जिसमें पूरे विश्वभर की सारी घटनाओं का जिक्र किया जायेगा. नेशनल में पूरे देश भर की घटनाओं का जिक्र होगी. साइंस नोटबुक में विश्वभर की साइंस और टेक्नॉलोजी पर लिखा जायेगा. इसके साथ ही मीडिया और साहित्य पर नये कॉलम और कुछ प्रोफाइल्स होंगी. इस समारोह के अलावा ‘द हिंदू’ दुर्लभ फोटोग्राफ की प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी.
‘फ्रंटलाइन’ की शुरुआत दिसंबर 1984 में की गई थी. प्रबंधन के अनुसार ‘फ्रंटलाइन’ एक बहुआयामी पाक्षिक पत्रिका है जिसमें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अलावा, साहित्य, इकॉनोमी, विकास, इन डेप्थ-फीचर्स, कला, सिनेमा, प्रकृति के अलावा उन सब मुद्दों को उठा जाता है जिससे ना केवल इंडिया या एशिया के देशों के लोग बल्कि पूरे विश्व के लोग प्रभावित होते हैं. प्रबंधन का दावा है कि इस समय मैनस्ट्रीम मैगजीन ने अपना रूख लाइफ-स्टाइल की तरफ मोड़ लिया है तब भी फ्रंटलाइन आम आदमी से जुड़े मुद्दे उठाती है.





