Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

चिदंबरम वाकई चोर हैं!

: उनकी सहमति से कंपनियों ने अरबों रुपये कमाए : दैनिक जागरण अखबार में आज नीलूरंजन की एक बाइलाइन खबर प्रकाशित हुई है. खबर 2जी स्कैम और चिदंबरम से जुड़ी है. खबर में साफ-साफ बताया गया है कि चिदंबरम गड़बड़-घोटाले को रोक सकते थे. पूरी खबर इस तरह है-

: उनकी सहमति से कंपनियों ने अरबों रुपये कमाए : दैनिक जागरण अखबार में आज नीलूरंजन की एक बाइलाइन खबर प्रकाशित हुई है. खबर 2जी स्कैम और चिदंबरम से जुड़ी है. खबर में साफ-साफ बताया गया है कि चिदंबरम गड़बड़-घोटाले को रोक सकते थे. पूरी खबर इस तरह है-

''तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम चाहते तो 2जी घोटाला करने वाली कंपनियों को इक्विटी बेचकर हजारों करोड़ (अरबों) की कमाई करने से रोक सकते थे।  दरअसल 2जी लाइसेंस पाने वाली कंपनियों के इक्विटी बेचने पर चिदंबरम ने सहमति दी थी। 5 नवंबर 2008 को ए. राजा द्वारा लिखे गए नोट से यह तथ्य उजागर हुआ है। यह नोट सीबीआइ द्वारा सुब्रह्मण्यम स्वामी को सौंपी 400 पेजों की फाइल का हिस्सा है। नोट के सामने आने से चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 2जी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका को लेकर यह दूसरा बड़ा खुलासा है। इससे पहले वित्त मंत्रालय के उस नोट से बवाल मचा था जिसमें कहा गया था कि चिदंबरम चाहते तो वित्तमंत्री रहते घोटाले को रोक सकते थे। घोटाले के बाद भी चिदंबरम के पास इन कंपनियों को इक्विटी बेचकर हजारों करोड़ रुपये कमाने से रोकने का दूसरा मौका था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 2जी स्पेक्ट्रम पाने के बाद ही स्वान और यूनिटेक ने विदेशी कंपनियों को 2008 की कीमत पर इक्विटी बेचकर हजारों करोड़ कमाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। संचार और वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने इसका विरोध भी किया था। 30 जनवरी 2008 को वित्त और संचार मंत्रालय की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। इसमें कंपनियों की खरीद-फरोख्त होने पर लाइसेंस रद करने जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई थी, पर बैठक में इसे टाल दिया गया। दूरसंचार सचिव को भेजे गए ए. राजा के नोट के अनुसार प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान वित्तमंत्री (चिदंबरम) ने लाइसेंस पाने वाली कंपनियों में विदेशी निवेश को सही ठहराया था। राजा के अनुसार वित्तमंत्री का मानना था कि विदेशी कंपनियों को इक्विटी बेचने को लाइसेंस बेचने के समान नहीं माना जा सकता। लिहाजा कंपनियां चाहें तो अपनी इक्विटी विदेशी कंपनियों को बेच सकती हैं। इसी के बाद स्वान ने दुबई की एतिसलात और यूनिटेक ने नार्वे की टेलीनॉर को इक्विटी बेची थी। सीबीआइ की चार्जशीट में आरोप है कि स्वान और यूनिटेक के प्रमोटरों को लाइसेंस फीस वगैरह के सारे खर्चे काटने के बाद भी इक्विटी बेचने से क्रमश: 2818 करोड़ और 2342 करोड़ का फायदा हुआ।''

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...