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टीवी के समाचारों और इन चैनलों का सम्पादक कौन है, यह हम नहीं जानते : ओम थानवी

: जरूरी चीजों का चुनाव टीआरपी से नहीं किया जा सकता : दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला : दिल्ली : मीडिया पर अब पूंजी का दबदबा साफ़ दिखाई दे रहा है. जब मीडिया व्यापार की वस्तु होगा तो वहां भाषा पर व्यापार का असर कैसे रोका जा सकता है. सुपरिचित लेखक और जनसत्ता के सम्पादक ओम थानवी ने हिन्दू कालेज में आयोजित एक व्याख्यान में कहा कि हमें यह ध्यान देना होगा कि जूते के कारोबार और अखबार में फर्क है क्योंकि सिर्फ सूचना देना ही मीडिया का काम नहीं बल्कि पाठकों की समझ बढ़ाना भी मीडिया की जिम्मेदारी है.

: जरूरी चीजों का चुनाव टीआरपी से नहीं किया जा सकता : दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला : दिल्ली : मीडिया पर अब पूंजी का दबदबा साफ़ दिखाई दे रहा है. जब मीडिया व्यापार की वस्तु होगा तो वहां भाषा पर व्यापार का असर कैसे रोका जा सकता है. सुपरिचित लेखक और जनसत्ता के सम्पादक ओम थानवी ने हिन्दू कालेज में आयोजित एक व्याख्यान में कहा कि हमें यह ध्यान देना होगा कि जूते के कारोबार और अखबार में फर्क है क्योंकि सिर्फ सूचना देना ही मीडिया का काम नहीं बल्कि पाठकों की समझ बढ़ाना भी मीडिया की जिम्मेदारी है.

हिन्दी साहित्य सभा द्वारा वार्षिक दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला श्रृंखला में 'मीडिया : साहित्य और संस्कृति ' विषय पर थानवी ने कहा कि अपराध की जानकारी से ज्यादा प्रस्तुतीकरण पर जोर ही मीडिया के उद्देश्य को स्पष्ट कर देता है.

उन्होंने सम्पादक संस्था के ह्रास पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टीवी के समाचारों और इन चैनलों का सम्पादक कौन है, यह हम नहीं जानते. मीडिया और भाषा के संबध पर विस्तार से चर्चा करते हुए थानवी का कहना था कि अच्छी भाषा के बाद ही संस्कृति-कला और साहित्य की बात आती है.  साथ ही उन्होंने साहित्य और अखबार की भाषा का भेद बताते हुए कहा कि साहित्य का गृहीता अलग है और अखबार का अलग, अत: भाषा यहाँ हमेशा जिम्मेदारी का बर्ताव मांगती है.

उन्होंने बोलचाल की भाषा का मीडिया लेखन में जोरदार पक्ष लेते हुए कहा कि हिन्दी भाषा की जगह अंग्रेजी का बढ़ता प्रयोग गलत है. उन्होंने कहा कि जिस देश में केवल एक प्रतिशत लोग अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हों वहां यह भ्रम है कि अंग्रेजी भारत की संपर्क भाषा है. व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों के सवालों के उत्तर देते हुए थानवी ने टी आर पी को भी भ्रामक एवं रूचि को विकृत करने वाला बताया. उन्होंने कहा कि 'शोले' के मुकाबले 'पाथेर पांचाली' दर्शक कम हो सकते हैं लेकिन जरूरी चीजों का चुनाव टी आर पी से नहीं किया जा सकता.

इससे पहले साहित्य सभा के परामर्शदाता डॉ. पल्लव ने सभा के छात्र पदाधिकारियों एवं वार्षिक गतिविधियों का परिचय दिया. सभा के अध्यक्ष एम ए के छात्र भीमसेन ,शैलेश शुक्ल और असीम अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर आयोजन का शुभारम्भ किया. ओम थानवी का परिचय छात्रा चंचल गौर ने दिया. विभाग की प्रभारी डॉ. रचना सिंह ने दीपक सिन्हा के व्यक्तित्त्व को रेखांकित किया. संयोजन श्वेतांशु शेखर और प्रियव्रत मिश्रा ने किया.  अंत में सभा के महासचिव शैलेश शुक्ल ने आभार ज्ञापित किया. आयोजन में बड़ी संख्या में युवा विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित थे.

हिन्दू कालेज के हिन्दी साहित्य सभा के मीडिया प्रभारी नितिन मिश्रा द्वारा जारी प्रेस रिलीज.

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