विवादित फिल्म 'इनोसेंस ऑफ मुस्लिम्स' से जुड़े निकोला बासिल पकड़ लिए गए हैं. उन्हें लॉस एंजेल्स में अरेस्ट किया गया. एक अदालत ने उन्हें जेल की सज़ा सुनाई है. हालांकि अफसरों का कहना है कि उन्हें भड़काऊ वीडियो के संबंध में नहीं बल्कि एक अन्य मामले में अरेस्ट किया गया है. निकोला बासिल को बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में वर्ष 2011 में जेल से रिहा किया गया था.
प्रोबेशन के नियमों के उल्लंघन मामले में उनकी पड़ताल की गई थी. उन पर प्रोबेशन के दौरान अधिकारियों की अनुमति के बिना इंटरनेट का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया गया था जिसका उन्होंने उल्लंघन किया. इससे पहले ओबामा प्रशासन ने गूगल से विवादित वीडियो को यू-ट्यूब से हटाने का आग्रह किया था. लेकिन गूगल ने ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि इस फिल्म से किसी नियम का उल्लंघन नहीं होता है.
लॉस एंजेल्स स्थित यूएस अटॉर्नी के कार्यालय ने निकोला बासिल को गिरफ्तार करने की पुष्टि की थी. कार्यालय के प्रवक्ता थोम रोज़ेक ने कहा, ''निकोला बासिल को प्रोबेशन अधिकारी के इस आरोप पर गिरफ्तार किया गया था कि उन्होंने रिहाई की शर्तों का उल्लंघन किया है.'' वीडियो के जारी होने के बाद से ही निकोला कहीं छिपे हुए थे. अमरीका में बनी 'इनोसेंस ऑफ मुस्लिम्स' फिल्म की अरबी भाषा में डबिंग की गई. फिल्म में पैगंबर मोहम्मद को अपमानजनक तरीके से प्रदर्शित किया गया है.
इसकी वजह से मुस्लिम देशों में इस फिल्म और अमरीका के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए हैं. बहुत कम बजट में बनी इस फिल्म पर अमरीका का कहना है कि ये किसी अमरीकी क़ानून का उल्लंघन नहीं करती है क्योंकि अमरीका में संविधान के पहले ही संशोधन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है. इस फिल्म की क्लिप को यू-ट्यूब पर जुलाई में अपलोड किया गया था लेकिन हिंसक प्रदर्शनों की शुरूआत 11 सितंबर से हुई. हिंसा की सबसे प्रमुख घटना लीबिया के बेनगाज़ी शहर में हुई जहां अमरीकी दूतावास पर हमले में अमरीकी दूत क्रिस स्टीफेंस समते चार अमरीकी मारे गए.
फिल्म में काम करने वाले कुछ कलाकार सामने आए हैं जिनका कहना है कि उन्हें गुमराह किया गया है. उनका कहना है कि उन्हें डेज़र्ट वॉरियर नामक एक फिल्म के लिए लिया गया था जिसकी पटकथा में इस्लाम या पैगम्बर मोहम्मद का ज़िक्र नहीं था.





