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”विनोद कापड़ी ने बताया… विनोद कापड़ी के अनुसार… कापड़ी ने कहा…”

: मानो विनोद कापड़ी न हों, स्वयं ईश्वर ने आकर सब कुछ सही-सही घटनाक्रम बयान किया हो : इस एकतरफा खबर पर हिंदुस्तान अखबार पर मानहानि का मुकदमा ठोकना चाहिये : सेवा में, भड़ास4मीडिया, हिन्दुस्तान के नोएडा स्थित कार्यालय संवाददाता की डेटलाइन से जो खबर आज यानि सोमवार 2 जुलाई मेरठ संस्करण के पेज नम्बर 9 पर छपी है उसका शीर्षक है ‘अभद्र एसएमएस पर हुई यशवंत की गिरफ्तारी’. एकतरफा अर्थात एक पक्षीय खबर लिखने का जो मानदंड अपने को राष्ट्रीय अखबार घोषित करने वाले इस समाचार समूह ने स्थापित किया है, उसका उदाहरण विरला ही मिलता है।

: मानो विनोद कापड़ी न हों, स्वयं ईश्वर ने आकर सब कुछ सही-सही घटनाक्रम बयान किया हो : इस एकतरफा खबर पर हिंदुस्तान अखबार पर मानहानि का मुकदमा ठोकना चाहिये : सेवा में, भड़ास4मीडिया, हिन्दुस्तान के नोएडा स्थित कार्यालय संवाददाता की डेटलाइन से जो खबर आज यानि सोमवार 2 जुलाई मेरठ संस्करण के पेज नम्बर 9 पर छपी है उसका शीर्षक है ‘अभद्र एसएमएस पर हुई यशवंत की गिरफ्तारी’. एकतरफा अर्थात एक पक्षीय खबर लिखने का जो मानदंड अपने को राष्ट्रीय अखबार घोषित करने वाले इस समाचार समूह ने स्थापित किया है, उसका उदाहरण विरला ही मिलता है।

पूरी खबर विनोद कापड़ी के हवाले से प्रकाशित है तथा प्रत्येक पैराग्राफ इसी पंक्ति से शुरू होता है- विनोद कापड़ी ने बताया, विनोद कापड़ी के अनुसार, कापड़ी ने बताया…. मानो विनोद कापड़ी न हों, स्वयं ईश्वर ने आकर सब कुछ सही-सही घटनाक्रम बयान किया हो। अंत में 10 प्वाइंट बोल्ड शीर्षक में लिखा गया है- न्यायिक हिरासत में जेल गया यशवंत। इसमें कहीं भी किसी पुलिस अधिकारी का बयान नहीं लिया गया है, यशवंत के वकील को कहीं उद्धृत नहीं किया गया है, एफआईआर का कोई जिक्र नहीं है और न ही यह जानने की कोशिश की गयी है कि किसी चैनल के ‘प्रबंध संपादक’ की शिकायत पर ‘पत्रकारों से जुड़ी’ सोशल वेबसाइट के ‘संपादक’ के खिलाफ की गयी कार्रवाई किसी साजिश, रंजिश अथवा प्रतिद्वंद्विता का परिणाम तो नहीं है।

होना तो यह चाहिए कि यशवंत के वकील को ‘मुकदमे से पहले’ ही किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर दूसरे के खिलाफ एकतरफा खबर लिखने के लिये अखबार के मालिक, प्रकाशक, मुद्रक, संपादक और संवाददाता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा कायम कर देना चाहिये। अगर यह मामला यशवंत का न होकर किसी पूंजीपति, कोई नेता अथवा किसी व्यापारी, कोई शिक्षक, कोई वकील, कोई सैन्य अधिकारी अथवा चिकित्सक का होता तब भी इस खबर को इसी तरह एकतरफा बयान के आधार पर छाप दिया जाता। कम से कम मैंने तो अपने पूरे पत्रकारीय जीवन में इस तरह की खबर किसी अखबार में इतने बड़े स्पेस के साथ छपती हुई नहीं देखी।

न्यू मीडिया के प्रति बड़े समाचार समूहों का रवैया भले ही नकारात्मक, उपेक्षापूर्ण अथवा हिकारत भरा हो लेकिन न्यू मीडिया को सिरे से ही नकार देना अथवा इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को पत्रकार न मानना अव्वल दर्जे की बेवकूफी नहीं तो और क्या है? मीडिया के अंदर की बुराई रूपी कैंसर को सार्वजनिक प्लेटफार्म पर जाहिर करना पत्रकारिता को व्यवसाय बना चुके पूंजीपतियों को चिंतित तो करता ही होगा, उन्हें चिंतित होना स्वाभाविक भी है लेकिन पत्रकारिता जैसे पेशे से जुड़े नामचीन संपादक, पत्रकार जब न्यू मीडिया की सफलता को व्यक्तिगत रंजिश मानकर चलते हैं तो इस बात की चिंता हर उस शख्स को होनी चाहिए, जो एक मिशन के रूप में पत्रकारिता से अपने जुड़ाव को महसूस करता है।

मीडिया हाउस के अंदर की खबर छापना निश्चित ही सैद्धांतिक रूप से उचित नहीं माना जाता लेकिन जब तक आम जनता के हितों की दुहाई देने के नाम पर अखबार और चैनल स्वयं पत्रकारों का शोषण करते रहेंगे और पत्रकारिता के कपड़े उतारकर उसे बाजार में बेचने के लिये नंगा खड़े करते रहेंगे, तब तक यशवंत जैसा कोई दिलेर, दुःसाहसी नौजवान अपने करियर, अपने जीवन और अपना परिवार दांव पर लगाकर इन दलालों की पोल खोलता रहेगा। इस मिशन में यशवंत अकेला नहीं है।

तमाम बुराइयों और विरोधाभासों के बावजूद यशवंत ने स्वतंत्र मीडिया लेखन का जो प्लेटफार्म तैयार किया है, यह उनके उद्यमशीलता का ही प्रतिफल है। तमाम व्यवसायिक दुष्वारियों के बावजूद पिछले चार वर्षों से वह ‘भड़ास’ को न केवल चला रहे हैं बल्कि जी भी रहे हैं और इसमें तमाम पत्रकारों का सहयोग भी उन्हें मिल रहा है।

उम्मीद है कि मामूली आरोपों के अन्तर्गत न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बावजूद यशवंत जल्द ही हमारे समाने वापस आयेंगे और अपने खिलाफ लगाये गये आरोपों का सिलसिलेवार ढ़ंग से जवाब देंगे, जैसा कि वो पहले भी करते आयें हैं। हमें सिर्फ होशियार रहना होगा पूंजीपतियों की, जो पत्रकारों को कामगार मानते हैं और पत्रकारिता को व्यवसाय, इस चाल से कि न्यू मीडिया जैसे संप्रेषण के माध्यमों को दबाने, समाप्त कर दिया जाय और पत्रकारों की आवाज को हमेशा के लिये दफन कर दिया जाय।

आप सभी से आह्वान है कि सभी साथ आयें ताकि यशवंत सकुशल हमारे और अपने परिवार के साथ जुड़ जायें। ईश्वर यशवंत से चिढ़ने वालों कारपोरेट एडिटर्स को सद्बुद्धि दे।

ए. निखिल

मेरठ

[email protected]

(ए. निखिल का लिखा यह आलेख भड़ास को दो जुलाई को प्राप्त हुआ लेकिन तत्कालीन आपाधापी के कारण इसे प्रकाशित नहीं किया जा सका. अगर आपने भी जुलाई-अगस्त महीने में कुछ लिखकर भड़ास के पास भेजा था और उसका प्रकाशन नहीं हो पाया है तो उसे फिर से भड़ास के पास [email protected] के जरिए भेज दें. -एडिटर, भड़ास4मीडिया)


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