दोस्तों, यशवंत जी की गिरफ्तारी के बारे में जो भी बातें सामने आ रही हैं, उनमें गहराई से जाने पर कई तकनीकी पेंच सामने आते हैं। एक तरफ तो कापड़ी जी खुद से रंगदारी मांगने के आरोप लगा रहे हैं, दूसरी ओर उनकी पत्नी को अश्लील एसएमएस भेजने की शिकायत कर रहे हैं। कापड़ी जी ने यशवंत जी की गिरफ्तारी के लिए जिस तरह से ताकत लगाई है उससे साफ है कि वे कोई दीन-हीन नहीं जिनसे कोई भी राह चलता रंगदारी मांग ले। रंगदारी का तकाजा करने वाले मोटरसाइकिल सवारों का सच सामने लाने के लिए भी यदि वे सच्चे हैं तो अब उन्हें ही प्रयास करने होंगे।
चलिए मान लेते हैं कि यशवंत जी ने उनसे रंगदारी मांगी थी, लेकिन उनका ऐसा क्या कारनामा था जिसके लिए वह ब्लैकमेल हो रहे थे, यह सच्चाई भी उन्हें सबके सामने रखनी चाहिए। कुछ लोगों ने पहले भी यशवंत जी पर नाजायज तरह के आरोप लगाए हैं, लेकिन आज तक कोई साबित नहीं कर पाया। यशवंत जी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें जिंदगी में कोई ज्यादा लालसा नहीं है और वे जो भी अच्छा बुरा करते हैं डंके की चोट पर करते हैं। जिन लोगों ने यशवंत जी के रहन-सहन और उनके परिवार को कभी देखा नहीं, वे कोई भी आरोप लगाने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं।
चलिए मुद्दे पर आते हैं, कापड़ी जी ने एक ओर रंगदारी की बात कही है तो दूसरी ओर उनकी पत्नी को अश्लील एसएमएस करने की शिकायत की है। इस आरोप में भी कई तरह शंकाएं पैदा होना लाजिमी है। जब यशवंत जी रंगदारी की मांग कर रहे हैं तो अश्लील एसएमएस क्यों भेजेंगे।
दोस्तों महाभारत में शिखंडी नामक पात्र की आड़ में हुए एक वध का वाकया सभी को याद होगा, कहीं ऐसा तो नहीं एक बार कलियुग में पात्र बदलकर साजिश रची गई हो। बहरहाल आरोप लगाने वालों को आने वाले दिनों में अपने आरोपों की सच्चाई साबित करने के लिए अदालत उचित अवसर देगी और यशवंत जी को भी खुद को पाक साफ साबित करने का मौका मिलेगा।
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फिलहाल इन सभी आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच कापड़ी जी को भी पहल करते हुए पूरा मामला साफ करने के लिए आगे आना चाहिए। किसी भी तरह की रंजिश में एक-दूसरे को हराने की बात करने की बजाए सामाजिक तौर पर यह एक मानवतावादी दृष्टिकोण रहा है कि गलती करने वाले को उसकी गलती का एहसास कराया जाए। कापड़ी जी के पास यदि ऐसे कोई तथ्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने में उन्हें कोई हिचक नहीं दिखानी चाहिए। कापड़ी जी से बड़प्पन दिखाने की अपेक्षा रखते हैं।
राकेश शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
कुरूक्षेत्र
(राकेश शर्मा का लिखा यह आलेख भड़ास को दो जुलाई को प्राप्त हुआ लेकिन तत्कालीन आपाधापी के कारण इसे प्रकाशित नहीं किया जा सका. अगर आपने भी जुलाई-अगस्त महीने में कुछ लिखकर भड़ास के पास भेजा था और उसका प्रकाशन नहीं हो पाया है तो उसे फिर से भड़ास के पास [email protected] के जरिए भेज दें. -एडिटर, भड़ास4मीडिया)
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