: कोर्ट में सरकारी वकील करने लगा लापरवाही : मैनेज करने की इस कवायद का विरोध शुरू : मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता से की गई शिकायत : मुंगेर (बिहार) : दैनिक हिन्दुस्तान अखबार का प्रबंधन दौ सौ करोड़ रुपये के सरकारी विज्ञापन के घोटाले को मैनेज करने में जुट गया है. इस घोटाले में अखबार की मालकिन शोभना भरतिया और प्रधान संपादक शशि शेखर से लेकर दर्जनों लोग फंसे हुए हैं. घोटाले की प्रमुख अभियुक्त मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्षा शोभना भरतिया हैं. इसी कारण इस पूरे मामले को रद करने की गुहार हिंदुस्तान अखबार ने हाईकोर्ट में लगाई है.
घोटाले के इस मामले को क्वैश करने के लिए हिंदुस्तान प्रबंधन की तरफ से पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश की अदालत में चल रही है. पटना उच्च न्यायालय में चल रहे इस मामले का नाम कोर्ट की भाषा में ''क्रिमिनल मिसेलिनियस नं.-2951(2012) है. इसी मामले में चल रही सुनवाई को लेकर याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि याचिकाकर्ता के लिए केस लड़ने को राज्य सरकार की तरफ से मिले सरकारी वकील का रवैया सही नहीं है. अधिवक्ता है, सही तरीके से केस नहीं लड़ रहा है, इसकी शिकायत याचिकाकर्ताओं ने की है.
मुंगेर के वरीय अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, बिहार के महाधिवक्ता रामबालक महतो, मुख्य सचिव, गृह सचिव आदि को लिखित रूप में फैक्स और ई-मेल भेज कर सरकारी वकील की शिकायत की है. काशी प्रसाद ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले को लेकर जब हाईकोर्ट में सुनवाई हुई तो सरकारी अधिवक्ता ने आर्थिक अपराध से जुड़े मुकदमे में सरकारी पक्ष को सही ढंग से नहीं प्रस्तुत किया, जिससे न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के 18 सितंबर, 2012 के आदेश में अभियुक्त शोभना भरतिया के पक्ष में वह कानूनी बातें आ गईं जो भागलपुर के जिलाधिकारी के ऐफिडेविट में लिखा ही नहीं गया था. न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने 18 सितंबर 12 के अपने आदेश में पैरा-।। में लिखा है कि आवेदिका (शोभना भरतिया) दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण को भागलपुर में मुद्रित करने की अनुमति भागलपुर के जिलाधिकारी से प्राप्त कर चुकी हैं और यह तथ्य जिलाधिकारी के द्वारा न्यायालय में दाखिल ऐफिडेविट से स्पष्ट होता है. ((It has been submitted on behalf of the petitioner(Shobhana Bharatiya) that the grievance of the informant is that her newspaper concern was printing Hindi edition of 'Hindustan' in Munger without permission of the District Magistrate, Munger, whereas fact situation is that even the Munger Hindi edition of 'Hindustan' is being printed in Bhagalpur, for which permission has been obtained by the District Magistrate, Bhagalur as is evident from the counter affidavit filed by him.''
भागलपुर के जिलाधिकारी की ओर से इस मुकदमे में पेश ऐफिडेविट में जिलाधिकारी के द्वारा भागलपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस से दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण के मुद्रण की स्वीकृति देने से संबंधित कोई बात कही ही नहीं गई है. अभियुक्त ने जिलाधिकारी भागलपुर के समक्ष केवल घोषणा पत्र जमा किया है. विचारणीय है कि किसी भी अखबार के मुद्रण और प्रकाशन की अनुमति केवल प्रेस रजिस्ट्रार (नई दिल्ली) ही दे सकता है. तभी डीएम या एसडीएम प्रकाशक के द्वारा दायर घोषणा-पत्र को प्रमाणीकृत कर सकते हैं.
मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता, बिहार को भेजे ई-मेल में अधिवक्ता काशी प्रसाद ने आगे लिखा है कि- ''यदि 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान के सरकारी विज्ञापन घोटाले जैसे आर्थिक अपराध की प्राथमिकी पटना उच्च न्यायालय में सरकार की लापरवाही, खासकर सरकारी अधिवक्ता की लापरवाही, से रद्द हो जाती है, तो बिहार में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने जो आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध युद्ध चलाने की घोषणा की है, उस सरकारी मुहिम को जबर्दस्त धक्का लगेगा और आर्थिक अपराधियों का राज्य में मनोबल बढ़ेगा''
स्मरणीय है कि अभियुक्त शोभना भरतिया ने पटना उच्च न्यायालय में मुंगेर के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले से जुड़ी पुलिस प्राथमिकी को रद्द करने के लिए रिट दायर किया है जिसका क्रिमिनल मिससेलैनियस नंबर 2951।2012 है.
श्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि भागलपुर के जिलाधिकारी की ओर से जो ऐफिडेविट दाखिल किया गया है, उसमें अभियुक्त शोभना भरतिया और अन्य अभियुक्तों को बचाने की कोशिश की गई है. जिलाधिकारी, भागलपुर ने ऐफिडेविट में दैनिक हिन्दुस्तान के सरकारी विज्ञापन घोटाले से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य जैसे वित्त अंकेक्षण विभाग की रिपोर्ट और साक्ष्यों को कोई जगह नहीं दिया है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है.
श्री प्रसाद ने मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता से अनुरोध किया है कि चूंकि इस मुकदमे में अंतिम सुनवाई अगले सोमवार के बाद किसी भी दिन पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में होगी, मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता (बिहार) के कार्यालय से ऐसी व्यवस्था की जाए कि सरकारी अधिवक्ता न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय में सरकारी पक्ष जैसे मुकदमे में आरक्षी उपाधीक्षक और आरक्षी अधीक्षण की पर्यवेक्षण टिप्पणी और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य को, जो 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले को प्रमाणित करते हैं, को न्यायालय के समक्ष जोरदार ढंग से रखें जिससे न्यायालय को सही निर्णय लेने में मदद मिल सके.
श्री प्रसाद ने यह भी मांग की है कि भागलपुर के जिलाधिकारी को निर्देश दें कि वे पुनः रिज्वाइंडर न्यायालय में पेश करें और विज्ञापन घोटाले से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य जैसे अखबार ने किस प्रकार पटना संस्करण की निबंधन संख्या वर्षों वर्ष तक जालसाजी और धोखाधड़ी करके मुंगेर हिन्दुस्तान संस्करण में लिखता रहा और जब जांच शुरू हुई, तो अखबार ने आवेदित लिखना शुरू किया, को पेश करें. श्रीप्रसाद ने मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता को न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश के न्यायालय के 18 सितंबर, 2012 के आदेश और जिलाधिकारी, भागलपुर के ऐफिडेविट की प्रतियां भी अवलोकन के लिए भेजी है.
मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. श्रीकृष्ण प्रसाद से संपर्क 09470400813 के जरिए किया जा सकता है. इस घोटाले से जुड़ी अन्य खबरें और श्रीकृष्ण प्रसाद के अन्य आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें– भड़ास पर श्रीकृष्ण प्रसाद






