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भास्कर के पत्रकार दिलनवाज पाशा से नोएडा में लूट की कोशिश

Dilnawaz Pasha : अभी करीब सात बजे मैं अपने साथी Mukesh Kumar 'Gajendra' के साथ दफ्तर से निकला। नोयडा सैक्टर 63 में हमारा दफ्तर है। आज रविवार होने के कारण बाकी कंपनियों में छुट्टी थी लिहाजा ऑटो या रिक्शा भी नहीं मिला। कुछ दूर पैदल चले..मैं मोबाइल पर ही चैट करता हू जा रहा था… करीब 100 मीटर दूर एक ऑटो मिला जिसे लेकर मुकेश जी गेस्ट हाउस चले गए। मैं अकेला ही मेन रोड की ओर जाने लगा….

Dilnawaz Pasha : अभी करीब सात बजे मैं अपने साथी Mukesh Kumar 'Gajendra' के साथ दफ्तर से निकला। नोयडा सैक्टर 63 में हमारा दफ्तर है। आज रविवार होने के कारण बाकी कंपनियों में छुट्टी थी लिहाजा ऑटो या रिक्शा भी नहीं मिला। कुछ दूर पैदल चले..मैं मोबाइल पर ही चैट करता हू जा रहा था… करीब 100 मीटर दूर एक ऑटो मिला जिसे लेकर मुकेश जी गेस्ट हाउस चले गए। मैं अकेला ही मेन रोड की ओर जाने लगा….

अभी कुछ दूर ही चला था.. संडे की वजह से रास्ता सूनसान था लिहाजा मैंने अपना सैमसंग मोबाइल जेब में रख लिया और नोकिया को कान से लगाकर फोन लगा ही रहा था कि एक पल्सर एकदम करीब आकर हल्की हुई, मोबाइल छीनने की कोशिश की, मैंने कसकर फोन पकड़ रखा था इसलिए वो फोन नहीं छीन पाए…बाइक की स्पीड उन्होंने तेज की…मैंने नंबर देखने की कोशिश की और तीन चीजे नोट कर सका

हिंदी के अक्षरों में ऊपर यूपी लिखा था जिसके बाद का नंबर मुझे 96 लगा…पूरा नंबर हिंदी में था जिसे मैं तुरंत पढ़ नहीं पाया, ऊपर और नीचे के नंबरों के बीच लाल रंग से कुछ लिखा था…

मैंने तुरंत 100 नंबर पर कॉल किया, बताया कि मेरा मोबाइल छीनने की कोशिश की गई, काली रंग की पल्सर फोर्टिस की दिशा में भाग रही है…नंबर हिंदी में लिखा है…ऊपर का नंबर ही सही से देख पाया जो कि 96 था… फोन उठाने वाले व्यक्ति ने मेरी पूरी बात सुनी, लोकेशन पूछी और फोन रख दिया…

मैं दोबारा थोड़ा और सतर्क होकर आगे चलने लगा…अब एक-दो लोग और मेरे साथ चलने लगे… करीब 500 मीटर दूर…वाजिदपुर गांव के बाजार के पास (टीसीएस के नजदीक अपोजिट साइड में..) सड़क पर ही एक बाइक खड़ी थी..जो स्टार्ट थी…इंडीकेटर जल रहा था, एक बंदा उस पर बैठा फोन पर किसी से बात कर रहा था…मैंने थोड़ा नजदीक से देखा तो नंबर हिंदी में लिखा था..ऊपर का नंबर और नीचे लाल रंग से कुछ लिखा था (जो करीब से पढ़ने पर अंग्रेजी में Chahalलिखा था)। मुझे 90 प्रतिशत यकीन हुआ कि यह वही बाइक है जिसने करीब दस मिनट पहले मेरा फोन छीनने की कोशिश की थी…

मैंने तुरंत अपने मोबाइल से बाइक का फोटो लिया ताकि अगर वो भागे भी तो नंबर मेरे पास रहे…मैंने दोबारा 100 नंबर पर फोन किया…मेरे फोटो खींचने और पुलिस को फोन करने के दौरान बाइकर वहां से भागा नहीं बल्कि खड़ा रहा..उसने पूछा- क्या हुआ तो मैंने बताया…उसने कहा- मैं नहीं था, मैं तो अभी आया हूं.. (होता भी तो मानता थोड़े ही, मैंने फोटो पहले ही ले लिया था शायद इसलिए वो नहीं भागा..)…

नंबर की हिंदी में लिखावट, पल्सर और बाइक रोड के किनारे इग्नीशन मोड पर रखने के कारण मैं 90 प्रतिशत मुतमईन था कि यह वही हो सकता है, हालांकि शक्ल मैंने नहीं देखी थी.. करीब 5 मिनट बाद पुलिस आई, सेक्टर 63 की चौकी पर हम गए, वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को पूरी बात बताई…

पुलिस ने उस युवक को बाइक के साथ पूछताछ के लिए थाने में रोक लिया है… अपनी पूरी बात बताकर मैं आ गया हूं, लिखित में शिकायत दो कारणों से नहीं दी… पहला तो फोन छिनने से बाल-बाल बच गया (वैसे प्रयास भी अपराध की श्रेणी में ही आता है, but what can i Do with typical Indian mentality, जब तक असल में कुछ नहीं होता हम अपराथ मानते ही नहीं..)… दूसरा मैं 90 प्रतिशत मुतमइन था कि बाइक वही है, दस प्रतिशत नहीं, क्योंकि मैंने नंबर पूरा नहीं पढ़ा था…

मैं तो वापस दफ्तर आ गया हूं, अब ऑफिस कैब से ही घर के लिए निकलूंगा, लेकिन उस युवक को पूछताछ के लिए पुलिस ने रोक लिया है… पूछताछ जारी है…आते-आते कह आया हूं कि दस प्रतिशत गुंजाइश युवक के बेगुनाह होने की है… और बहुत असंमजस में हूं… कभी-कभी घटनाएं इतनी तेजी से घटती हैं कि हम उन पर नियंत्रण कमजोर कर बैठते हैं… पूरी बात इसलिए शब्द-शब्द दर लिख दी है कि जरूरत पढ़ने पर याद रहे और किसी भी परिस्थिति में मुझे अपना बयान न बदलना पड़े…
 
दिलनवाज पाशा ने अपने फेसबुक एकाउंट पर खुद के साथ हुई घटना को बयान किया है, वहीं से साभार.

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