दैनिक जागरण में झूठी खबर छप जाने के बाद अपने जिन्दा होने का सबूत देता चल रहा है रामचंद्र. देव प्रखंड के बनुआ पंचायत का रहनेवाला रामचंद्र रिकियासन के बारे में कुछ दिन पहले दैनिक जागरण अखबार में एक खबर औरंगाबाद कार्यालय संवाददाता मनीष कुमार के नाम से छापी गई थी. इसके मुताबिक एड्स से हुई मौत के बाद युवक को लोगों ने नहीं दिया कफ़न. खबर में बताया गया है कि औरंगाबाद जिले के सीमा से सटे नावा गांव के रहने वाले रामचंद्र रिकियाशन की मौत एड्स से हो गई और मौत के बाद ग्रामीणों ने कफ़न तक नहीं दिया. तब रामचंद्र की पत्नी कलावती ने अपने आँचल को फाड़कर कफ़न बना दिया और अपने पति के शव को नहीं जलाया और उसे उसी इलाके के पहाड़ों में दफ़न कर दिया.
अखबार ने यहाँ तक लिखा की पंचायत के मुखिया और बीडीओ ने अपने क्षेत्राधिकार का रोना रोया. अखबार में मौत की खबर छपने के बाद रामचंद्र के परिवार वाले उसके घर जब पहुंचे तो उन्होंने पाया कि नावा गांव निवासी रामचंद्र रिकियाशन जीवित है और उन्हें कोई बीमारी नहीं है. इस बाबत पूछे जाने पर पंचायत के मुखिया ने बताया कि दैनिक जागरण अख़बार ने झूठी खबर को प्रकाशित किया है. जिस रामचंद्र की मौत अखबार में छापी गई है वो खबर झूठी है. ना ही उसे एड्स की बीमारी है. इस मामले पर पूछे जाने पर प्रखंड के बीडीओ अभय कुमार सिंह ने बताया कि खबर छप जाने के बाद जांचोपरांत पाया गया कि रामचंद्र रिकियासन जीवित है और आज वो अपने जिन्दा होने का सबूत मीडिया के कार्यालयों में देता चल रहा है.







