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बेबाक पत्रकारिता पर दलाल पत्रकारिता और भ्रष्ट पुलिस तंत्र का हमला तेज़ हुआ

यशवंत सिंह संपादक भड़ास4मिडिया की नोएडा पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी ने यह साबित कर दिया है कि वेब मीडिया की ताकत से दलाल पत्रकारों और भ्रष्ट पुलिस तंत्र के रखवालों के होश उड़ गये हैं. पिछले महीनों से संदुपुर -बाराबंकी, गोरखपुर, लखनऊ के पश्चात् नोएडा और लखीमपुर में जनसरोकार रखने वाले और निर्भीक पत्रकारों के पुलिसिया उत्पीडन से यह साफ हो गया है कि यह एक सुनियोजित साजिश है निर्भीक पत्रकारों की आवाज़ को दबाने की. एक के पश्चात एक घटित हो रही घटना यह सिद्ध करती है कि वेब मीडिया ने दलाल प्रवृति के पोषक और पत्रकारिता की आड़ में अधिकारियों की दलाली करने वाले प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों के काकस को भेद दिया है.

यशवंत सिंह संपादक भड़ास4मिडिया की नोएडा पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी ने यह साबित कर दिया है कि वेब मीडिया की ताकत से दलाल पत्रकारों और भ्रष्ट पुलिस तंत्र के रखवालों के होश उड़ गये हैं. पिछले महीनों से संदुपुर -बाराबंकी, गोरखपुर, लखनऊ के पश्चात् नोएडा और लखीमपुर में जनसरोकार रखने वाले और निर्भीक पत्रकारों के पुलिसिया उत्पीडन से यह साफ हो गया है कि यह एक सुनियोजित साजिश है निर्भीक पत्रकारों की आवाज़ को दबाने की. एक के पश्चात एक घटित हो रही घटना यह सिद्ध करती है कि वेब मीडिया ने दलाल प्रवृति के पोषक और पत्रकारिता की आड़ में अधिकारियों की दलाली करने वाले प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों के काकस को भेद दिया है.

यशवंत सिंह की गिरफ़्तारी प्रकरण के पश्चात् वेब मीडिया की ताकत और भी ज्यादा बढ़ेगी. पत्रकारिता जगत के काले कारनामों को उजागर करने की वजह से ही यशवंत सिंह और भड़ास4मीडिया भ्रष्ट-दलाल लोगों की आँखों की किरकिरी बन गये थे और आज भी बने हैं. शायद इन दलालों को अनुमान रहा हो कि यशवंत सिंह की फर्जी मुकदमों में गिरफ़्तारी के पश्चात् भड़ास का संचालन बंद हो जायेगा. यशवंत अकेले और अलग थलग पड़ जायेंगे, साथी साथ त्याग देंगे. लेकिन उनका अनुमान दुर्भाग्यवश गलत सिद्ध हो चुका है. यशवंत सिंह के साथ आज तमाम वरिष्ठ पत्रकार खड़े हैं. कुमार सौवीर, प्रकाश हिन्दुस्तानी, सुभाष राय, दयानंद पाण्डेय, हरे प्रकाश उपाध्याय, मदन तिवारी, सैयद असदर अली, अविनाश, कृष्णभानु आदि ने इस प्रकरण पर अपने विचार लिख कर निर्भीक पत्रकारिता को उर्जा व ताकत प्रदान की है. दलाली से इतर जनसरोकार व निर्भीक पत्रकारिता, बेबाक लेखन करने वालों को इस तरह की दिकक्तो से रूबरू होते ही रहना पड़ेगा. व्यवस्था को जड़ तक भ्रष्ट कर चुके लोगों को यह कतई नहीं गंवारा होता है कि कोई उनकी जड़ पर प्रहार करे. कमियां उजागर करने वालों को सदैव साजिशों का शिकार होना पड़ता है. बस जिस तरह दलाल पत्रकारों का साथ दलाल दे रहे हैं, उसी तरह अब निर्भीक व बेबाक लेखन का माद्दा रखने वालो कों दलाल पत्रकारिता के खिलाफ उनकी सज़िशों के खिलाफ अब कलमकारों की कलम अनवरत चलती रहनी चाहिए.  

अरविंद विद्रोही

पत्रकार

[email protected]


(पत्रकार अरविंद विद्रोही ने अपनी यह टिप्पणी भड़ास के पास छह जुलाई को मेल किया लेकिन तत्कालीन आपाधापी के कारण इसे प्रकाशित नहीं किया जा सका था. अगर आपने भी जुलाई-अगस्त महीने में कुछ लिखकर भड़ास के पास भेजा और उसका प्रकाशन नहीं हो पाया तो उसे फिर से भड़ास के पास [email protected] के जरिए भेज दें. -एडिटर, भड़ास4मीडिया)


संबंधित अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें… Yashwant Singh Jail


नीचे जो पत्र दिया जा रहा है, उसे यूपी के मुख्यमंत्री और बरेली के डीएम के पास छह जुलाई को प्रेषित किया गया….

 

दिनांकः- 06.07.2012

सेवा में,

मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश

लखनऊ।

द्वारा जिलाधिकारी, बरेली।

महोदय,

भड़ास4मीडिया पोर्टल के संचालक श्री यशवंत सिंह को द्वेषवश एक न्यूज चैनल के सम्पादक ने फर्जी ढंग से फंसाया है। पुलिस भी न्यूज चैनल से मिली हुई है और श्री यशवंत सिंह के खिलाफ फर्जी मुकदमें कायम की है। अतः आपसे निवेदन है कि श्री यशवंत सिंह को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए और उन पर कायम सभी फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए।

मुख्तार अंसारी
महामंत्री

सुरेन्द्र शर्मा
अध्यक्ष

रूहेलखण्ड मीडिया वर्कर्स एसो0 बरेली।

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