भड़ास ४ मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह ने जिस तरह सफ़ेद लिबास में छिपे काले चेहरों के नकाब उतरने शुरू किये है उससे कई लोग खार खाए हुए हैं, उन्होंने पत्रकारिता को एक नया आयाम देते हुए उन लोगों के बारे में खबरें देनी शुरू की जिन्होंने सिर्फ दूसरों पर अंगुली उठाने का काम किया था.
उन्होंने कभी सच के साथ समझौता नहीं किया यही वजह है कि लोग उनके पीछे पड़े रहते हैं, लेकिन कहावत वही है, कि गिरते है सह्सवार ही मैदाने जंग में, साजिश के तहत यशवंत की गिरफ़्तारी से सारा पत्रकार समाज झुब्ध है, पूर्वांचल प्रेस क्लब के हम सभी पत्रकार यशवंत की गिरफ़्तारी का विरोध करते हैं, हम सभी यशवंत की गिरफ़्तारी की निंदा करते हैं.
हरीश सिंह
अध्यक्ष
पूर्वांचल प्रेस क्लब
साजिश के शिकार बने है यशवंत भाई
गोरखपुर। भड़ास4मीडिया के संपादक और पत्रकारों के हक की लड़ाई लड़ने वाले यशवंत भाई दलालों के आँख की करकिरी बने थे। यशवंत भाई किसी सजिश के शिकार बने हैं। जेल से छूटने के बाद असलियत सामने आएगी। गोरखपुर के बहुत से पत्रकार यशवंत भाई के साथ हैं, संघर्ष में जेल तो होता है, लेकिन शेर दिल इंसान पर ऐसा घिनौना आरोप हजम नहीं होता।
संजय
पत्रकार
गोरखपुर
(उपरोक्त बयान क्रमशः दो और तीन जुलाई को भड़ास के पास मेल किया गया लेकिन तत्कालीन आपाधापी के कारण इसे प्रकाशित नहीं किया जा सका था. अगर आपने भी जुलाई-अगस्त महीने में कुछ लिखकर भड़ास के पास भेजा और उसका प्रकाशन नहीं हो पाया तो उसे फिर से भड़ास के पास [email protected] के जरिए भेज दें. -एडिटर, भड़ास4मीडिया)
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