एक लाख 76 हजार करोड़ के कथित कोयला घोटाले में कई मीडिया हाउस ने ‘हल्दी लगे न फिटकरी, रंग चढ़े चोखा’ मुहावरे को चरितार्थ करते हुए पत्रकारिता की हनक की आड़ में मोटा माल कमाया है। इसमें से एक मीडिया टायकून विजय दर्डा के यहां सीबीआई का छापा पड़ चुका है। वो महाराष्ट्र के बड़े अखबार ‘लोकमत’ समूह के सर्वेसर्वा हैं। उन पर आरोप है कि कोयला खदान हासिल करने में उन्होंने ‘अखबार’ और ‘पत्रकार’ दोनों का जम कर दुरूपयोग किया था। सूत्र बताते हैं कि दो अन्य मीडिया हाउस के मालिकान के यहां कभी भी छापा पड़ सकता है। सीबीआई छापे से पूर्व की औपचारिकता पूरी करने में जुटी हुई है। इस संभावित छापे से बचने के लिए मालिकान को मीडिया के प्रभाव का ही इस्तेमाल कर कार्रवाई कवाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
गत 4 सितंबर को सीबीआई ने केस दर्ज कर पांच लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब सीबीआई इन लोगों से पूछताछ कर कोयला घोटाले के राज उगलवाना चाहती है। इनमें सबसे अहम नाम कांग्रेस सांसद विजय दर्डा का है जो चर्चित अखबार ‘लोकमत’ के मालिक हैं। वे महाराष्ट्र सरकार में शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्डा के भाई हैं। इन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोल ब्लॉक आवंटित कराने का आरोप है। सीबीआई विजय दर्डा से संसद सत्र के बाद पूछताछ करेगी। सीबीआई इन लोगो से यह जानना चाहती है कि दर्डा परिवार में से कौन सा शख्स कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में था। आरंभिक जांच में पता चला है कि कोल आवंटन कमेटी की बैठकों में अक्सर देवेंद्र दर्डा शामिल होते थे।
दर्ड़ा बंधुओं ने एक भी पैसा लगाए बिना करोड़ों कैसे कमाया, जरा उस पर गौर फरमाइए। सीबीआई ने नागपुर की कंपनी जस इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह कंपनी अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर की सिस्टर कंसर्न है। इस कंपनी में सांसद विजय दर्डा व उनके बेटे देवेंद्र दर्ड़ा की 2 प्रतिशत भागीदारी है। 2010 में दर्डा बंधुओं ने एक नई कंपनी बनाई। इस कंपनी के पास बांका (बिहार) में पावर प्लांट लगाने की जिम्मेदारी थी। इस कंपनी का पूरा मालिकाना हक विजय दर्डा,राजेंद्र दर्डा और उनके दो बेटों के नाम है। इसका उल्लेख 2010 में विजय दर्डा द्वारा राज्यसभा में दिए गए संपत्ति के ब्यौरे में भी किया गया है।
आरोप है कि दर्डा बंधुओं ने दो वित्तीय संस्थाओं से लोन लेने की बात कही और बदले में वित्तीय संस्थाओं को कंपनी के 25 फीसदी शेयर देने की बात कही, कोल ब्लॉक लेने के लिए जो दस्तावेज पेश किए उसमें कर्ज में ली जाने वाली रकम को भी अपनी हैसियत में जोड़कर दिखा दिया। इतना ही नहीं दर्डा बंधुओं ने कई कागजी कंपनियां बनाई और शेयर की हेराफेरी कर करोड़ों के वारे न्यारे किए। सूत्रों ने बताया कि उनकी अधिकांश कंपिनियों का पता कोलकाता का है। जांच अधिकारियों को संदेह है कि वे कागजी कंपनियां हैं जिसकी जांच की जानी है। सीबीआई ने अभी तक पांच कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं और कई कंपनियों के खिलाफ आरंभिक जांच चल रही है।
कोल आबंटन घोटाले में एक अन्य नाम ऊषा मार्टिन समूह का भी है। यह समूह ‘प्रभात खबर’ के नाम से बिहार व झारखंड में अखबार प्रकाशित करता है। सूत्र बताते हैं कि ऊषा मार्टिन समूह को दो कोयला ब्लॉक आवंटित हुए हैं। हालांकि ऊषा मार्टिन समूह कौन सा पावर प्रोजेक्ट चलाती है यह तो वह ही जाने पर बताया जा रहा है कि झारखंड में कोयला ब्लॉक लेकर उसने भी करोड़ों के वारे न्यारे किए हैं। मालूम हो कि कोल ब्लॉक आवंटन में अनुचित लाभ से संबंधित कैग की रिपोर्ट में जिन 57 ब्लॉकों की सूची दी गई है उनमें लगभग आधे यानी 27 ब्लॉक झारखंड में हैं। इन कोल ब्लॉकों में करीब 4 अरब 12 करोड़ टन का भूगर्भीय कोयला भंडार है। अनुचित लाभ लेने वालों में कई दिग्गज निजी कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कोई भी निर्धारित समय के अंदर कोयला खनन नहीं शुरू कर पाई है।
सबसे अधिक 12 ब्लॉक स्पंज आयरन उद्योग को, नौ पावर प्लांट को एवं छह स्टील प्लांट को आवंटित किए गए। 57 ब्लॉकों में स्पंज आयरन और स्टील उद्योग के लिए देश में 34 ब्लॉक आवंटित हुए। इनमें अकेले झारखंड में 18 जबकि अन्य राज्यों में 16 ब्लॉक हैं। झारखंड में जिन कंपनियों को कोयला ब्लॉक मिले हैं उनमें अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (तीन ब्लॉक), टाटा स्टील लिमिटेड (दो ब्लॉक), टाटा स्टील लिमेटेड एवं आधुनिक थर्मल इनर्जी लि. उषा मार्टिन, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स (दो ब्लॉक), एस्सार पावर जेनरेशन एवं एस्सार पावर लिमिटेड (दो ब्लॉक),आर्सेलर मित्तल इंडिया लि.एंड जीवीके पावर्स, हिंडाल्को एंड टाटा पावर लिमिटेड, उगंटा माइंस लि, रूंगटा माइंस एंड सनफ्लैग आयरन-स्टील लि, रूंगटा माइंस लि./कोहिनूर स्टील प्रा. लि, नीलांचल आयरन व पावर जेनरेशन एंड बजरंग इस्पात, जेएसपीएल, सीईएससी लि. एंड जेएएस इंफ्रास्ट्राक्चर, जेएसपीएल एंड गगन स्पंज आयरन लि,जेएसडब्ल्यू स्टील- भूषण स्टील एंड पावर-जय बालाजी इंडस्ट्रीज, मुकुंद लि,विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लि, जायसवाल निको लि, कारपोरेट इस्पात एंड एलवॉयज लि, डोमको स्मोकलेस फ्यूएल प्रा.लि, भूषण पावर एंड स्टील लि और बहार स्पांज आयरन कंपनी लिमेटेड आदि हैं।
तीसरा मीडिया हाउस ‘दैनिक भास्कर’ समूह है। बताया जा रहा है कि इसने भी कोयला खदान आवंटन में जम कर चांदी काटी है। समूह की कंपनी डीबी पावर को भी कई कोल ब्लॉक आवंटित हुए हैं और इसके लिए ‘पत्र’ और ‘पत्रकार’ का जम कर उपयोग किया गया। कोयला ब्लाक आवंटन पर कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में दुर्गापुर-2 सरिया कोयला ब्लाक का जिक्र किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीबी पावर लिमिटेड को यह ब्लाक छह नवंबर, 2007 को आवंटित किया था और इस ब्लाक में 66.921 मीलियन टन कोयला मौजूद है। इस ब्लाक में छह नवंबर 2011 से कोयला का उत्पादन शुरू किया जाना चाहिए था जो आज तक शुरू नहीं हो पाया है।
सूत्रों ने बताया कि कोयला मंत्रालय ने भी डीबी पावर लिमिटेड को नोटिस जारी कर कोयला ब्लाक से उत्पादन शुरू होने में हो रही देरी पर जवाब मांगा है। 30 अप्रैल को भेजे गए कारण बताओ नोटिस में कहा गया कि कंपनी कोयला उत्पादन शुरू करने में होने वाली देरी की वजह बताने में नाकाम रहती है तो दुर्गापुर और सरिया ब्लाक आवंटन रद किया जा सकता है। डीबी पावर लिमिटेड को भेजे गए इस नोटिस में साफ कहा गया है कि अगर कंपनी कोयला मंत्रालय से किए गए वादे को पूरा करने में विफल रहती है तो आवंटन रद करने के लिए जरूरी कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि कंपनी नोटिस का जवाब मंत्रालय को भेज चुकी है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर नोटिस के जवाब मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि जवाब का अध्ययन किया जा रहा है। इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया गया है।
उधर कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट पर पैदा हुए बवंडर के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) खनन शुरू नहीं कर पाने वाली कंपनियों को आवंटित ब्लॉक रद नहीं करने पर कोयला मंत्रालय से खफा है। सूत्र बताते हैं कि कम से कम चार दर्जन कोयला ब्लॉकों के रद होने की स्थिति बनती है। मोटे तौर पर वे सभी कोयला ब्लॉक जहां अभी शुरुआती अनुमति भी नहीं ली गई है उनके आवंटन रद होने के ज्यादा आसार हैं। लेकिन रद्द करना आसान नहीं होगा क्योंकि 58 ब्लॉकों में कंपनियां 40 हजार करोड़ रुपये निवेश कर चुकी हैं। इतना ही नहीं इन ब्लॉकों से संबंधित परियोजनाओं में निवेश के लिए बैंक लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक का कर्ज मुहैया करा चुके हैं। इतिहास बताता है कि पूर्व में जब भी कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद करने की बात उठी तो कोयला मंत्रालय में उसका विरोध हुआ है। कोयला मंत्रालय हमेशा कंपनियों को और वक्त देने और उनकी दिक्कतों को आपसी समझ-बूझ से सुलझाने का पक्ष लेता रहा है।
लेखक संदीप ठाकुर दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. इन दिनों साप्ताहिक अखबार हमवतन से जुड़े हुए हैं.
भड़ास के पास एक सज्जन ने एक अखबार की कटिंग को मेल किया है जिसमें कोयला घोटाले और भास्कर ग्रुप के बीच संबंधों की चर्चा की गई है. नीचे कटिंग है, उस पर क्लिक कर दें ताकि एनलार्ज होकर पढ़ने लायक हो जाए….






