Om Thanvi : कल भाजपा नेता केदारनाथ साहनी के निधन से संबंधित एक खबर के साथ दिल्ली से हाल ही शुरू हुए एक 'नेशनल' हिंदी दैनिक ने प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह का फोटो छाप दिया. ईश्वर कविश्री को लम्बी उम्र दे. उन्हें कोई फ़ोन आया तो उन्होंने कहा कि भूल हुई होगी, वे लोग कल सुधार लेंगे. लेकिन अख़बार में आज भी कोई भूल-सुधार नहीं छपा तो उन्हें हैरानी हुई. सज्जन कवि के साथ यह बर्ताव उचित नहीं. टाइम्स नाउ चैनल ने जस्टिस पीबी सावंत का फ़ोटो किन्हीं जस्टिस सामंत की जगह दिखा दिया तो श्री सावंत ने चैनल पर मुक़दमा कर दिया था और अदालत ने चैनल पर सौ करोड़ रुपये का ज़ुर्माना सुना दिया था. यह ठीक है कि केदारनाथ सिंह जस्टिस सावंत नहीं हैं, पर भूल-चूक अख़बारों पर हो या चैनलों से — जो हो ही सकती है — पर उसका फ़ौरन सखेद सुधार भी कर देना चाहिए.
Pradeep Vashishtha शीघ्रातिशीघ्र इस तरह की त्रुटियों में सुधार किया जाना चाहिए.
Harsh Vardhan These comments from a senior editor of an esteemed daily deserve applaud.
Danish Azmi thanvi sahab sahi hai ki bhool ho jati hai ,lekin ek sawal uthta hai ki internet ke iss yug me bhayankar galti ,aur aise vyakti ke haath me page bnane kaa kaam dena jisko kuch maloom nhi kisi ko pehchanta nhi …mein samajhta ho ye blunder mistake hai
Vartika Nanda बिल्कुल। दुखद। खेद इस बात का भी है कि हमने खेद व्यक्त करना ही छोड़ दिया है…
अजय राय । दुखद।
Kalpana Pant khedajanak
Vikas Dhulia ji sir, mai ek journalist hoo, to unki taraf se is blunder ke liye xama mangta hoo
Pawan Koundal दरअसर मुसीबत यह है कि इस इंटरनेट ने सबकी आदतें खराब कर दी हैं। लोग गूगल इमेज पर जाकर सर्च तो कर लेते हैं फलां फला नाम पर पुष्टि नहीं करते कि जो उन्होंने ढूंढा है वह फलां व्यक्ति है भी कि नहीं। ऐसा भी कई बार देखा गया है कि जो भी फोटो किसी एक अखबार में छपा है, दूसरे अखबारों में भी देखा गया है जिसे इंटरनेट के जरिए हूबहू डाउनलोड किया गया है। सहीं में यह खेदजनक तो है ही पर इसके साथ मीडिया संस्थानों में काम कर रहे लोगों की ''शार्टकट'' प्रव़त्ति को भी भी यह उजागर करता है।
Masaud Akhtar हो सकता है कि उन्हें अभी तक अपनी भूल का एहसास ही ना हुआ हो
Om Purohit Kagad एक समाचार पत्र के लिए इस से शर्मनाक क्या हो सकता है !
संवाद संकलन के वक्त सूचना की प्रमाणिकता भी पुष्ट होनी चाहिए ।
जो भी हुआ है वह क्षम्य तो हरगिज नहीं है !
Gautam Kewaliya Hari Bol…
Jayram Shukla andho ke haatho me tupak ka aisa hi istemal hota hai ..akhbaar ke malik kam ,,,sampadak to satta ki dosti ke chalte mada..ndh hai kya kahiyega.. iswr kedarji ko chirjeevee rakhe
जनसत्ता अखबार के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से साभार.





