जी न्यूज और जी बिजनेस के एडिटर द्वय सुधीर चौधरी व समीर अहलूवालिया ने नवीन जिंदल से अगर पैसे की मांग की थी तो अपने लिए नहीं की, अपने आका सुभाष चंद्रा के लिए की जो जी ग्रुप के मालिक हैं. सुभाष चंद्रा भी हरियाणा के हैं और नवीन जिंदल भी. इनमें आपस में बिजनेस राइवलरी है. मौका मिला तो सुभाष चंद्रा ने नवीन जिंदल को निपटाने व दूहने की ठानी. इसके लिए अपने दोनों एडिटरों को लगा दिया. ब्लैकमेलिंग व उगाही के पुराने धंधे की पोल इस बार खुल जाएगी, ये सुभाष चंद्रा को भी अंदाजा नहीं था. नए जमाने की तकनीक जानने वाले नवीन जिंदल ने नहले पर दहला दे मारा और दोनों संपादकों का स्टिंग करा लिया. बस, इससे बाजी पलट गई.
खबर रोकने के लिए पचास करोड़ रुपये मांगने से संबंधित एफआईआर नवीन जिंदल के आदमियों द्वारा दर्ज कराने के बाद भी यह एफआईआर मीडिया में खबर न बन सकी क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई वाला सिद्धांत यहां काम कर रहा था. आखिरकार फिर न्यू मीडिया ने यहां पहलकदमी की और भड़ास ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट छापकर मीडिया जगत में सनसनी फैला दी. हर कोई एक दूसरे से इस खबर के बारे में पता करने लगा, पूछने लगा और भड़ास का हवाला देने लगा. पर कोई जुबां खोलने को तैयार नहीं. आखिरकार जब पानी सिर के उपर गुजरने लगा तो समाचार एजेंसी पीटीआई ने खबर रिलीज की, तब जाकर अंग्रेजी अखबारों की नींद टूटी और उन्होंने खबरें प्रकाशित की.
पर हिंदी अखबार और न्यूज चैनल अब भी चुप हैं. कहां गया इनका सबसे पहले खबर ब्रेक करने का कंपटीशन. इतने बड़े घटनाक्रम पर ये चुप्पी क्यों साधे हैं. छोटी मोटी बातों को लेकर तूफान मचा देने वाले न्यूज चैनल आखिर अपनी बिरादरी के दो न्यूज चैनलों व उनके संपादकों की करतूत पर मौन क्यों हैं. और कहां हैं हिंदी अखबार जो भड़ास के यशवंत सिंह को खलनायक बनाने के लिए बड़ी बड़ी खबरें व तस्वीरें प्रकाशित कर रहे थे लेकिन अबकी वे पूरी तरह मौन साधे हैं. यशवंत सिंह खलनायक इसलिए बनाए गए क्योंकि वे मीडिया इंडस्ट्री के स्याह सफेद का बिना डरे खुलासा करते हैं और उन्हें गलत आरोपों व फर्जी मुकदमों में फंसाकर तुरत-फुरत जेल भिजवा दिया गया. लेकिन जिन संपादकों के खिलाफ आडियो-वीडियो सुबूत तक है उनसे पुलिस ने अब तक पूछताछ तक नहीं की है, कहीं किसी न्यूज चैनल पर खबर नहीं है, किसी हिंदी अखबार ने इसे खबर लायक नहीं माना.
यही है कारपोरेट मीडिया का खेल. पूंजी के मारे ये बिचारे जब अपने ही बनाए गेम में फंस जाते हैं तो ऐसी चुप्पी साध लेते हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो, लेकिन जब कोई इनके करप्शन की तरफ उंगली दिखा दे तो ये उसे खलनायक की तरह पेश करने लगते हैं. इस प्रकरण पर यशवंत ने परसों ही फेसबुक पर एक टिप्पणी डाली, जिस पर कई लोगों के कमेंट आए. क्या इस प्रकरण को संपादक जी लोग अपने अपने फेसबुक वॉल पर लिखकर कोई बहस चलाना चाहेंगे? फेसबुक पर यशवंत द्वारा परसों जो स्टेटस अपडेट किया गया, वह इस प्रकार है…
Yashwant Singh : जी न्यूज के एडिटर सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के एडिटर समीर अहलूवालिया पर कई करोड़ रुपये मांगने के खिलाफ नवीन जिंदल ने दिल्ली में रिपोर्ट दर्ज कराई है.. मैंने कई बड़े मीडिया वालों से पूछ पता कर लिया, सब चुप्पी साधे हैं.. .लेकिन रिपोर्ट तो दर्ज हुई है… लोग कह रहे हैं कि आडियो वीडियो सुबूत के साथ… आखिर इतनी चुप्पी क्यों है?
Tarun Kumar : Tarun sab loot rahe hain lootne dijie, hum janata hain, sir pitne dijie.
Vinod Rajput : aakhir mausere bhai jo hain
Vinod Rajput : maine apko ek msg kiya tha kuch din pahle,plz check
Tarun Kumar Tarun : Gone are the days of editor, now all are ediator!
Veerendra Bansal : acha
Amit Kumar : sudhir choudhary or samir ka original face samne aa gaya hai or unka kala pathar FIR me darj hai
Shashi Kant Gupta : khelme khel chal raha hi
पद्मसंभव श्रीवास्तव : यशवंत भाई, जब ऐसी ही दुखद घटना आपके साथ घटी थी , तो एकाध ही के जुबाँ खुली थी. आपके विशाल मित्रमंडली के सदस्य तो चुप्पी साधे दूसरे सदस्यों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे थे.ऐसे कई मगरमच्छों का बसेरा वसुंधरा, वैशाली और दक्षिणी दिल्ली के आसपास है, जिनकी जीवन शैली देख अच्छे-अच्छे व्यवसायी भी शर्मा जायें. अभी तो एक मामला सामने आया है…न जाने कितने तो पुलिस के थानों में ही निपटा दिये गये हैं…! विश्वास न हो , तो नये ' समाचारपत्रों/ न्यूज़ चैनलों के प्रबंधकों से पता करे.
Dinker Srivastava : इतना सन्नाटा क्यों है भाई…?
Padampati Sharma : Sudhir Apane purane channel me Maha pap kar chuke hain. Jindal ne Jo kukarm kiye 5 companies ek din me bana kar is hisab Se agar Zee Ke Malikon ki bhumika Rahi ho to kya kahenge… Hazaron karod koyle Se kamae to kuchh karod media….!
Padampati Sharma : Beti ki umra wali Se bush karne wale ne Tim per jab case kiya tha tab Maine kya tweet kiya tha dekhne ….
Padampati Sharma : Bush nahi Bhai Byah padho
Piyush Rathi : Lagta hai barf padne wali hai…lol
Shravan Kumar Shukla : सच भी हो सकती है……..!
Sanjaya Kumar Singh : मुझे नहीं लगता कि जिन्दल बगैर सबूत के यह सब करेंगे। अगर एफआईआर है तो सच ही होगा भले अदालत में साबित न हो या अदालत के बाहर समझौता हो जाए। चुप्पी इसलिए कि हमाम में सब नंगे हैं। इसलिए, भौंचक्क हैं कि अब क्या होगा।
Ankit Singhal sab patrakar ek jaise hain aur inke gake par hath daalo to kehte hain ki hamari abhivayakti ka hanan kar rahe hain
Shravan Kumar Shukla : SKS..bilkul sahi kaha.. ankit… jiske status pe ho uske bare me kya IDEA hai?..!
Ankit Singhal : wo bhi isi biradri ke hain to wae bhi aise hi hain abhi inki gardan bhi dabai thi police ne
Ujalacity Lucknow : media ko to badnam karke chhoda hai in channels ne
Abhishek Sharma : is baat pe itnee khamoshi kyu hai bhai….
Ankit Singhal : dusro se paisa aithna jante hain bus jab salary badhane ya appointment k time salary ki baat aati hai to ye kehte hain ki 5.000 lelo 5000 me aaj k zamane me kiska ghar chalta hai
Piyush Tripathi : sach kabtak chhipega
Nirbhay Saxena : moon varat kyon
Yashwant Singh : ताजी सूचना ये आई है कि एसीपी राजेश बक्शी को जिंदल द्वारा जी के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर का जांच अधिकारी बनाया गया है. आरोप है कि जी के संपादकों ने दिल्ली के हयात होटल में नवीन जिंदल से मुलाकात कर खबर रोकने के लिए पैसे मांगे. जिंदल ने बातचीत को रिकार्ड कर लिया. ये सूचना मीडिया के एक वरिष्ठ साथी ने मुझे एसएमएस किया है. सूचना में कितनी सच्चाई है, ये तो नहीं पता लेकिन मीडिया के ढेर सारे दिग्गजों को फोन कर लिया, कोई कनफर्म नहीं कर रहा कि क्या हुआ है… आखिर इतनी चुप्पी ?
Abhishek Sharma : shshssssssssssssssss!
Harsh Upadhyay : koi kuch nahi kahegaaa……
Deepak Yadav : जनाब… कोयले की कालिख औऱ धुंआ बड़ी दूर तक जाता है ….
Mohit Sharma : dhuaa agar dikh raha bhai to kahi na kahi aag bhi zaroor laga hua hai………
सुभाष चंद्रा को यह बताना होगा कि क्या उनके निर्देश पर उनके संपादक लोग सांसद नवीन जिंदल से खबर रोकने के लिए पैसा मांगने गए थे या फिर उन लोगों ने खुद के लिए पैसा मांगने का इरादा बनाया था? लोगों का कहना है कि जी न्यूज और जी बिजनेस के दो संपादक अगर पैसे मांगने हयात होटल गए तो जरूर इसमें मालिक सुभाष चंद्रा की सहमति रही होगी. बिना उनकी मर्जी के इतने बड़े मीडिया हाउस के दो एडिटर एक साथ ऐसी डील किसी के साथ नहीं कर सकते थे. उधर, सूत्रों का कहना है कि कोल ब्लाक के प्रकरण में चपेटे में आई कुछ और कंपनियां कुछ मीडिया हाउसों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं. उनके पास भी ब्लैकमेलिंग से जुड़े कई प्रमाण हैं. पूरे प्रकरण पर भड़ास की नजर है. जिंदल जी ब्लैकमेलिंग प्रकरण का सबसे पहले खुलासा भड़ास ने किया और जो पहली खबर भड़ास ने प्रकाशित किया, उसे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
http://bhadas4media.com/edhar-udhar/6050-2012-10-06-09-52-05.html





