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लोगों को ठीक से जानना ही असल यायावरी : असगर वज़ाहत

नई दिल्ली : जगहें देखना पर्याप्त नहीं होता, लोगों से मिलना और उनको ठीक से जानना ही असल में यायावरी है। सुप्रसिद्ध कथाकार असगर वज़ाहत ने गुरु गोबिंदसिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि मेरी यात्रा पुस्तकें एक सोशल टूरिस्ट की निगाह से लिखे गए वृत्तान्त हैं जिनका उद्देश्य केवल पर्यटकों की तरह देश-विदेश घूमना नहीं बल्कि लोगों और संसार को जानना है। यह गोष्ठी राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित असगर वज़ाहत की प्रसिद्ध पुस्तक 'चलते तो अच्छा था' के सन्दर्भ में आयोजित की गई थी।

नई दिल्ली : जगहें देखना पर्याप्त नहीं होता, लोगों से मिलना और उनको ठीक से जानना ही असल में यायावरी है। सुप्रसिद्ध कथाकार असगर वज़ाहत ने गुरु गोबिंदसिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि मेरी यात्रा पुस्तकें एक सोशल टूरिस्ट की निगाह से लिखे गए वृत्तान्त हैं जिनका उद्देश्य केवल पर्यटकों की तरह देश-विदेश घूमना नहीं बल्कि लोगों और संसार को जानना है। यह गोष्ठी राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित असगर वज़ाहत की प्रसिद्ध पुस्तक 'चलते तो अच्छा था' के सन्दर्भ में आयोजित की गई थी।

इस पुस्तक में असगर वज़ाहत ने इरान और मध्य एशिया के देशों की यात्रा के संस्मरण लिखे हैं। अपनी इस पुस्तक के सम्बन्ध में असगर वज़ाहत ने कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत की दुनिया मध्य एशिया थी और इस इलाके के देशों से राजनीतिक-सांस्कृतिक सम्बन्ध इस दुनिया का निर्माण करते थे। इस दोस्ती से पश्चिम को नुकसान था इसी वजह से इस क्षेत्र को तोड़ा गया। उन्होंने अफ़सोस के साथ कहा कि अब मध्य एशिया के देशों से हमारे सम्बन्ध नहीं हैं। इस संबंधहीनता से भूमंडलीकरण की शक्तियों को लाभ होता है। उन्होंने विशेष तौर पर इरान के सम्बन्ध में कहा कि हम वहां से तेल के अलावा भी बहुत कुछ ले सकते हैं।

इससे पहले मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो अनूप बेनीवाल ने प्रो असगर वज़ाहत का स्वागत करते हुए कहा कि युवा छात्रों के बीच ऐसे बड़े लेखक के सीधे संवाद से सृजनशीलता का नया वातावरण तैयार होगा। प्रो बेनीवाल ने अपने संकाय की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि नाटक पर कार्यशाला में भी हमारे समय के प्रतिनिधि रचनाकारों का सान्निध्य विद्यार्थियो को मिलेगा।

आयोजन में हिन्दू कालेज के सहायक आचार्य और युवा आलोचक पल्लव ने असगर वज़ाहत के कथा साहित्य पर वक्तव्य में कहा कि हिन्दी कहानी के विभिन्न  आन्दोलनों की धूल -गर्द को साफ़ कर कहानी को प्रेमचंद के प्रगतिशील रास्ते पर लाने वाले कथाकारों में वज़ाहत अग्रणी हैं। उन्होंने कहा कि अनेक मायनों में 'चलते तो अच्छा था' का महत्त्व ऐतिहासिक है क्योंकि इस किताब के साथ हिन्दी में यात्रा आख्यानों का नया दौर शुरू हुआ है। पल्लव ने इस अवसर पर कथाकार स्वयं प्रकाश द्वारा  असगर वज़ाहत पर लिखे रेखाचित्र 'ये जुनूने इश्क के अंदाज़' के प्रमुख अंशों का पाठ भी किया।

संगोष्ठी में एमए की चार छात्राओं ने  'चलते तो अच्छा था' पर पत्र वाचन किये। इनमे शीतल बाल्यान ने 'इरान के माध्यम से भारत को जानना', कनिका सिंघल ने 'इरान के साथ भारत का पुनर्संधान', स्नेहा समद्दर ने 'चलते तो अच्छा था-एक खोज' तथा प्रियंका बंसल ने 'भारत और इरान में सांस्कृतिक व कला सम्बन्ध' विषयों पर पत्र वाचन किये। छात्र राहुल पांडे ने  'चलते तो अच्छा था' के चुनिन्दा अंशों का पाठ किया। पत्र वाचन के सत्र की अध्यक्षता डॉ विवेक सचदेव ने की। इसके बाद हुई खुली चर्चा में संकाय के अन्य सदस्यों डॉ आशुतोष मोहन, डॉ मनप्रीत कंग, डॉ चेतना तिवारी,डॉ शुचि और डॉ राजीव रंजन द्विवेदी के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रो असगर वज़ाहत ने सभी सवालों और प्रतिक्रियाओं पर संतुलित विचार रखे। अंत में अधिष्ठाता प्रो अनूप बेनीवाल ने प्रो असगर वज़ाहत का आभार व्यक्त किया।

डॉ मनप्रीत कंग
अंग्रेजी विभाग
गुरु गोबिंदसिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय
द्वारका
नई दिल्ली

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