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यूपी में जंगलराज के दौरान लोस चुनाव में पचास सीटें कैसे जीत पाएंगे नेताजी?

जंगलराज इसे ही कहते हैं. जंगलराज में कोई भी खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता. वो चाहे अफसर हो, उद्योगपति हो, पत्रकार हो, जेल में बंद मुल्जिम हो या आम नागरिक हो…. सभी के अंदर दहशत है. कौन कब निपटा दिया जाए, कोई ठिकाना नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी में अब समाजवाद है. जी हां, सपा सरकार का राज है. मेरठ में एक बड़े उद्योगपति का अपहरण हो जाता है. गाजियाबाद में सरेआम कचहरी में गोली चलाकर पेशी पर आए जेल में बंद एक मुल्जिम को मौत के घाट उतारने की कोशिश होती है.

जंगलराज इसे ही कहते हैं. जंगलराज में कोई भी खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता. वो चाहे अफसर हो, उद्योगपति हो, पत्रकार हो, जेल में बंद मुल्जिम हो या आम नागरिक हो…. सभी के अंदर दहशत है. कौन कब निपटा दिया जाए, कोई ठिकाना नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी में अब समाजवाद है. जी हां, सपा सरकार का राज है. मेरठ में एक बड़े उद्योगपति का अपहरण हो जाता है. गाजियाबाद में सरेआम कचहरी में गोली चलाकर पेशी पर आए जेल में बंद एक मुल्जिम को मौत के घाट उतारने की कोशिश होती है.

गाजियाबाद में वसूली में लगे सिपाहियों की जब एक पत्रकार मोबाइल से रिकार्डिंग करता है तो उसका मोबाइल छीनकर उसे धमकाने की कोशिश की जाती है. गोंडा में मंत्री के लोग सीएमओ को अगवा कर उन्हें पीट देते हैं. ये सब घटनाएं पिछले एक दो रोज की ही हैं. रोजाना कई घटनाएं हो रही हैं जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यूपी में फिर जंगलराज लौट आया है. यूपी के लोगों की मजबूरी ये है कि अगले चार साल तक इन्हें इस जंगलराज को झेलने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा. 

मजेदार तो यह है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव सहित पूरी समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव 2014 में उत्तर प्रदेश की 50 से ज्यादा सीट जीतकर केन्द्रीय राजनीत का केंद्रबिंदु बनने का ख्वाब देख रही है जबकि प्रदेश की बिगड़ती हुई कानून व्यवस्था व राज्य सरकार की ढुल-मुल कार्यप्रणाली इस ख्वाब को तोड़ने में लगी हुई है. ऐसे जंगलराज जैसे हालात में पचास सीटें जीतने का नेताजी का सपना कहीं मुंगेरीलाल के हसीन सपने सरीखा ना हो जाए।

अभी तक सिर्फ अपराधियों द्वारा ही कानून व्यवस्था को चुनौती दी जाती थी पर अब राज्य सरकार के मंत्री भी खुलेआम दबंगई पर उतर आये है। राज्य सरकार के राजस्व राज्य मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ़ पंडित सिंह पर गोंडा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अगवा कर पिटाई का आरोप लगा। आरोप है कि मनमाफिक काम न करने पर मंत्री ने अपने गुर्गों के द्वारा गोंडा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अगवा करा लिया और उन्हें जमकर मारा पीटा। पंडित सिंह की पिटाई से डरे मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपना कार्यालय छोड़ कर लखनऊ भाग आये थे। इतना ही नहीं,  गोंडा जिले के डीएम भी छुट्टी पर चले गए थे। हालांकि इस घटना पर राज्य सरकार ने जांच हेतु एक कमेटी बैठा दी है पर जांच कहां तक निष्पक्ष होगी,  ये कहना संभव नहीं है क्योंकि अभी तक विनोद कुमार सिंह उर्फ़ पंडित सिंह राज्यमंत्री के पद आसीन हैं और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वो जांच को प्रभावित नहीं करेंगे।

जहाँ तक बात मंत्री जी की है तो यह सर्वविदित है कि वो एक दबंग नेता हैं। ये माना जाता रहा है कि वो सपा प्रमुख मुलायम सिंह के बहुत करीबी हैं। ऐसे में पूर्ववर्ती माया सरकार में हर आरोपी मंत्री की बर्खास्तगी और जांच की मांग करने वाली समाजवादी पार्टी जांच कमेटी की रिपोर्ट आने पर तथा उस रिपोर्ट में मंत्री जी के दोषी  होने पर उनके विरोध में कार्यवाही करेगी या नहीं, यह देखने योग्य होगा। पर इतना तय है कि जो व्यवस्था वर्तमान दौर में उत्तर प्रदेश में चल रही है उसका खामियाजा समाजवादी पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। लगता ये है कि युवा मुख्यमंत्री की सरकार की जो हनक प्रशासनिक अधिकारियों व मंत्रियों पर होनी चाहिए वो हनक ये सरकार नहीं बना पायी है। ऐसा लगता है कि सभी सरकार को इतनी अपनी सरकार मान बैठे हैं कि खुद को कानून एवं संविधान से ऊपर मान बैठे हैं। इनका सोचना है कि क्या होगा सरकार तो अपनी है।    
 
हालांकि यह भी सत्य है कि मंत्रियों द्वारा कानून व्यवस्था को हाथ में लेना कोई नहीं बात नहीं है। इससे पहले भी कई सरकारों में ऐसे घटनायें हुई हैं। कारण ये है कि आज ज्यादातर मंत्री भी वही बन रहा है जो अपराध की दुनिया से आया है। आज की राजनीत में शरीफ और इमानदारों का चेहरा न के बराबर है। चुनावों में हर दल की पसंद वो चाहे भाजपा हो सपा हो, बसपा हो या फिर कांग्रेस…. जिताऊ उम्मीदवार होता है और यहीं से राजनीति के अपराधीकरण की शुरुवात होती है। चुनाव के समय राजनैतिक पार्टियां प्रतिबद्ध कार्यकर्त्ता के बजाय साम दाम दण्ड भेद में माहिर दबंग धनाढ्य उम्मीदवार की तलाश करती हैं जो येन केन प्रकारेण चुनाव जीत सके ताकि पार्टी चुनाव के बाद सरकार बना सके।

राजनैतिक दलों की इस सोच ने राजनीत का पूरा परिदृश्य ही बदल दिया और राजनीत में धन बल और बाहुबल का बोल बाला हो गया। झोले में पार्टी साहित्य कंधे पर टाँगे साधारण कपड़ो में चप्पल पहने… पार्टी कार्यक्रमों में दरी चादर बिछाने वाले कार्यकर्त्ता समाप्त हो गए और हमारे राजनेता हाईटेक वीपन से लैस हाईटेक लाइफ जीने वाले आम आदमी से अलग दबंग छवि के लोग हो गए जिन्हें पद और पैसा के लिए कुछ भी करने में संकोच नहीं है। ये अपने स्वार्थ के लिए हर तरह का अपराध कर सकते हैं इसीलिए जब कोई अधिकारी इनके दबाव में नहीं आता है तो  वो गोंडा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरह या तो मारा जाता है या फिर महत्वहीन पद पर भेज दिया जाता है।  आज की राजनीत पर मशहूर शायर और कवि अदम गोंडवी ने लिखा था कि "राइफल की छांव में, मुस्कान होठों पर लिए, श्वेत खादी में अहिंसा के पुजारी आ गये"।

अनुराग मिश्र

उप संपादक

तहलका न्यूज

लखनऊ

मो – 09389990111

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