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नरेंद्र मोदी के नाम से बने नमो टीवी के प्रसारण को हरी झंडी

गुजरात के बहुचर्चित चैनल नमो टीवी की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। गुजरात चुनाव से ऐन पहले लांच हुए इस चैनल को आईपीटीवी के तौर पर 2 अक्टूबर को लांच किया गया था, लेकिन 5 अक्टूबर को ही इसे बंद करना पड़ा था। अब चुनाव आयोग ने इसे दोबारा चालू करने के लिए सहमति दे दी है। इस टीवी चैनल को नरेन्द्र मोदी नाम के शुरुआती अक्षरों 'न' और 'मो' से मिलाकर बनाया गया है। 

गुजरात के बहुचर्चित चैनल नमो टीवी की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। गुजरात चुनाव से ऐन पहले लांच हुए इस चैनल को आईपीटीवी के तौर पर 2 अक्टूबर को लांच किया गया था, लेकिन 5 अक्टूबर को ही इसे बंद करना पड़ा था। अब चुनाव आयोग ने इसे दोबारा चालू करने के लिए सहमति दे दी है। इस टीवी चैनल को नरेन्द्र मोदी नाम के शुरुआती अक्षरों 'न' और 'मो' से मिलाकर बनाया गया है। 

माना जा रहा है कि गुजरात सरकार इस पर अपनी उपलब्धियों का बखान करेगी, लेकिन चैनल को ब्लैक आउट कर दिया गया था। हालांकि चैनल के संचालकों ने इसे बंद करने की वज़ह तकनीकी बताई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ऐसा तब हुआ जब चुनाव आयोग ने ब्रॉडकास्टर्स की एक मीटिंग बुलाई और उन्हें पेड न्यूज़ के गाइडलाइन्स पर सख्ती से अमल करने को कहा। आयोग ने ब्रॉडकास्टर्स से साफ-साफ कहा है कि जब तक इस चैनल को क्लीयरेंस नहीं मिल जाती तब तक इसका प्रसारण नहीं किया जाए।
 
इसके बाद चैनल के मुख्यालय अहमदाबाद के चुनाव अधिकारी ने चुनाव आयोग से इस मामले पर अपना फैसला सुनाने की अर्ज़ी लगाई थी। यह चैनल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर लॉन्च हुआ था और इस पर मोदी के भाषण चलाए जा रहे थे। मोदी विरोधियों ने इसके खिलाफ मुहिम छेड़ी और कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज़ जताया तब कहीं जाकर इसका प्रसारण बंद हो पाया। कांग्रेस की मांग है कि इस चैनल को मिलने वाली फंड की भी जांच होनी चाहिए।
 
आयोग ने जिला चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया है कि वो चैनल को प्रसारण की इज़ाजत दे सकते हैं, लेकिन उसके पास गुजरात सिनेमा रेग्यूलेशन ऐक्ट, 2004 और केबल टीवी नेटवर्क ऐक्ट 1995 के तहत लाइसेंस होना भी जरूरी है। इसके अलावा, चुनाव के दौरान सभी चैनलों पर प्रसारित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों को मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटि से अनुमति लेनी होगी। आयोग का कहना है कि चुनाव के दौरान मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का पालन करवाने की जिम्मेदारी भी जिला चुनाव अधिकारी की ही होगी।
 
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब नरेन्द्र मोदी ने सिर्फ चुनावी मुहिम के लिए मीडिया को ज़रिया बनाया हो। करीब पांच साल पहले गुजरात चुनाव के दौरान भी उन्होंने वंदे गुजरात नाम से एक इंटरनेट टीवी प्रोटोकॉल लॉन्च किया था पर कई शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने उस पर पाबंदी लगा दी थी। लेकिन इस बार मोदी समर्थकों ने ज्यादा सावधानी बरती है और कोई भी कागजी कार्रवाई ढीला नहीं रख रहे हैं।
 
चैनल को गुजरात के उद्योग मंत्री सौरभ पटेल और भाजपा के राज्य स्तर के एक पदाधिकारी पारिंदु भगत उर्फ काकुभाई के जिम्मे सौंपा गया है। चैनल राज्य भर के केबल नेटवर्कों पर तो दिखेगा ही, राज्य के सैटेलाइट चैनलों पर भी इसके कार्यक्रम प्रसारित होंगे। नमो टीवी ने इस प्रसारण के लिए पांच क्षेत्रीय चैनलों से व्यापारिक करार किया है। जहां केबल और सैटेलाइट की पहुंच नहीं है वहां ये मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी अपनी पहुंच बनाएगा।
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