: नंबर वन अखबार के मैनेजरों की करतूत : दुर्गापूजा में बोनस के नाम पर ठेंगा : दैनिक जागरण की हर यूनिट में बोनस के नाम पर इस बार ठेंगा दिखा दिया गया है। नंबर वन अखबार दैनिक जागरण के मालिकों की यह करतूत है और इसमें दिमाग लगाने वाले उनके पालतू मैनेजर हैं जो सीरिंज लेकर खून खींचने को तो तैयार रहते हैं लेकिन इन्हें सरकारी नियम कायदे की भी परवाह नहीं।
नियम के मुताबिक दस कर्मचारियों से उपर वाले संस्थान को पूरे देश में अपने कर्मियों को साल में एक बार 8.33 प्रतिशत कम से कम बोनस देना है। लेकिन दैनिक जागरण तो नंबर एक अखबार है, अगर नहीं भी दे तो सरकार या श्रम विभाग इनका क्या कर लेगा। मैनेजरों ने अपनी बाजीगरी भी दिखाई है।
इस बार जागरण वालों ने इंक्रीमेंट देने में चार महीने की देरी लगाई। उसी लिहाज से सभी को बकाया देना पड़ा। उसी बकाये राशि को जागरण वालों ने बोनस-एक्सग्रेसिया के तौर पर दिखा दिया है। लंबी-चौड़ी हांकने वाले प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष काटजू साहब इस पर क्या करेंगे। कोर्ट भी अखबारों से डरती है।
इनका क्या होगा। होगा तो उन लोगों का जो ढेर सारी बीमारियां लेकर इनकी नौकरी बजाते हैं। और ये हैं कि दुनिया जहान की बुराइयों को ठीक करने का दावा करते हैं लेकिन जिनके खून से इनके घरों के दीए जलते हैं उसकी कोई कद्र नहीं। जय हो। अनाम खत देश की गूंगी-बहरी-लूली-लंगड़ी सिस्टम के खिलाफ।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





