अजमेर। 27 अक्टूबर यानि बकरीद के दिन अजमेर के एक तीन सितारा होटल में जो कुछ हुआ वह सरासर चोरी और सीनाजोरी थी। भारत में स्थित पाक दूतावास के काउंसलर अबरार हाशमी राजस्थान के सीआईडी अधिकारियों को धमका रहे थे, ‘यह कोई तरीका नहीं हुआ। वीजा के नाम पर हमारे पूर्व प्रधानमंत्री को नाश्ता करने से रोका जा रहा है। आप लोगों का व्यवहार ठीक नहीं है।’ सीआईडी टीम पाक के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष शुजात हुसैन चौधरी के साथ आए पाक नेताओं के पासपोर्ट-वीजा की जांच करना चाहती थी। इसी बात को लेकर हाशमी भड़क उठे थे।
मामला राजनीतिक रंग ना ले ले और पूर्व प्रधानमंत्री का नाश्ता कहीं मुद्दा ना बन जाए, इसलिए सीआईडी टीम कुछ समय के लिए खामोश हो गई। नाश्ते के बाद जब सीआईडी टीम ने पासपोर्ट वीजा दिखाने के लिए कहा तो हाशमी फिर उनसे लड़ने-भिड़ने पर उतारू हो गए। तेज-तेज आवाज में बोलने लगे। बेसिर पैर के आरोप लगाने लगे। हाशमी ने यहां तक कह दिया कि पहले सीआईडी अधिकारी उन्हें अपने पहचान पत्र दिखाएं। आखिरकार सीआईडी के एफआरओ श्रवण कुमार मंडा और बीडी शर्मा के सब्र का बांध टूट गया। और उन्होंने हाशमी को आड़े हाथों ले लिया, ‘हमारे देश में आकर हम पर ही हावी हो रहे हो। पासपोर्ट-वीजा तो आपको दिखाने ही पडेंगे।’ उन्होंने एलान कर दिया हम जब तक नहीं कहेंगे पाक नेता यहां से कहीं नहीं जा सकेंगे और ना ही उनके साथ एस्कोर्ट जाएगी।
जुबानी जंग के बाद हारकर पाक अधिकारियों को ई-मेल के जरिए पासपोर्ट-वीजा की प्रतियां मंगानी पड़ी। ये पासपोर्ट-वीजा जयपुर की एक होटल में थे। सीआईडी अधिकारियों को जब तसल्ली हुई, उसके बाद ही पाक नेताओं की रवानगी हो पाई। इस घटनाक्रम में दो घंटे लग गए। जाहिर है तब तक पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी भी होटल की लॉबी में बैठे रहे।
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी के साथ पूर्व शिक्षा मंत्री इमरान मशूद, जावेद चटठा, राजा हामिद, यूसुफ सलाउद्दीन, मोहम्मद इकबाल, काउंसलर हाशमी और अन्य अधिकारी ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत के लिए सुबह 8 बजे अजमेर पहुंचे थे। दरगाह में ईद-उल-जुहा की नमाज के बाद सभी तीन सितारा होटल मानसिंह पैलेस में नाश्ता करने जा पहुंचे। बताया जाता है कि तय कार्यक्रम में पाक नेताओं का होटल मानसिंह जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था। दरगाह में उनके पासपोर्ट और अजमेर आने का वीजा चैक नहीं किए गए थे। इसलिए सीआईडी अधिकारी होटल जा पहुंचे।
अपनी ड्यूटी करते हुए उन्होंने पासपोर्ट वीजा मांगे तो हाशमी भड़क गए। दरअसल पाक के सात लोग अजमेर आने थे। इनमें एक नाम तो सूची में मिटाया हुआ था। बचे छह में से भी तीन ही अजमेर पहंुचे थे। ऐसे में इस बात को लेकर भी बहस हुई कि बाकी तीन कहां हैं? सभी नेता जयपुर में ठहरे थे। इसलिए होटल मानसिंह में उनके लिए कमरे भी बुक नहीं थे। सारा घटनाक्रम होटल की लॉबी में हुआ। हाशमी का तर्क था कि मैं भारत की कई होटलों में खाना खा चुका हूं। कई जगह जा चुका हूं परंतु अजमेर में ही हमसे पासपोर्ट-वीजा मांगा गया और इसके नाम पर नाश्ता करने से रोका गया।
हैरानी की बात यह है कि जिस समय पाक दूतावास के काउंसलर हाशमी सीआईडी के मंडा और शर्मा से उलझ रहे थे, खबर हो जाने के बावजूद जिला प्रशासन या राजस्थान पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचे। प्रशासन की ओर से प्रोटोकॉल अधिकारी सुनीता डागा मौजूद थी। संबंधित हलके के थानाधिकारी भी बाद में पहुंचे।
सियासत और हकीकत
ईद की नमाज के तुरंत बाद पत्रकारों से बातचीत में चौधरी ने कहा कि कश्मीर मुद्दा हल करने के लिए पाकिस्तान और भारत को सख्त फैसले लेने होंगे। पाकिस्तान कश्मीर पर कब्जा नहीं करना चाहता परंतु वहां के लोगों को उनके हक दिलाना चाहता है। बाद में बोले, उन्हें अपने हक मिलने चाहिए।
यह हिन्दुस्तान है इसलिए
जिस दिन पाक पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी के साथ आए नेताओं के साथ सीआईडी अधिकारी अपनी पासपोर्ट-वीजा जांच की ड्यूटी निभा रहे थे और पाक काउंसलर हाशमी उनसे भिडे़ जा रहे थे, उसी दिन अमरीका जा रहे पाक की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान को अमरीकी आव्रजन अधिकरियों ने कनाडा के टोरंटो हवाई अड़डे पर उतारकर दो घंटे पूछताछ की। हाशमी या और कोई पाकिस्तानी वहां अजमेर जैसी हिमाकत करके दिखाएं, उन्हें हैसियत पता चल जाएगी।
पहले भी हुई है हिमाकत
अजमेर में पाक की यह पहली हिमाकत नहीं है। कुछ महीने पहले ही पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री मकदूम अमीन फहीम भारत-पाक के बीच व्यापार बढ़ाने सहित करीब 63 मसलों पर बातचीत करने भारत आए थे। बाद में वे गरीब नवाज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह जियारत के लिए अजमेर आ गए। पुलिस, प्रशासन और गुप्तचर अधिकारियों को उनके अजमेर हैलीपेड पर उतरने, वहां से सर्किट हाउस और दरगाह जियारत कर वापस लौट जाने की जानकारी थी। इस कार्यक्रम को धता बताते हुए मंत्री फहीम सर्किट हाउस से सीधे आधा किलोमीटर दूर दरगाह के रास्ते में स्थित तीन सितारा होटल मेरवाड़ा स्टेट जा पहुंचे जहां पांच सौ किलोमीटर दूर बाड़मेर, जैसलमेर आदि इलाकों से आए करीब दस हजार लोगों की मीटिंग को उन्होंने संबोधित किया। बगैर तय कार्यक्रम के यह मीटिंग कैसे हुई, इतने लोग कैसे अजमेर आए, महंगा होटल किसने बुक करवाया, पैसे कहां से आए, अनुमति कब, किसने दी, इन सवालों का आज तक जिला प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है।
लेखक राजेंद्र हाड़ा अजमेर के निवासी हैं. करीब दो दशक तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे. अब पूर्णकालिक वकील हैं. यदा-कदा लेखन भी करते हैं. लॉ और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहे हैं. उनसे संपर्क 09549155160, 09829270160 के जरिए किया जा सकता है.





