Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

पत्रिका प्रबंधन से परेशान व्यास के पास अब इस्तीफा देने के अलावा कोई चारा नहीं

राजस्थान पत्रिका पत्रिका प्रबंधन ने वरिष्ठ पत्रकार साथियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का नया हथकंडा अपना लिया है। यह हथकंडा है प्रबंधन की मनमर्जी से जहां चाहे वहां तबादला, ताकि बेबस पत्रकार खुद ही बाय-बाय कह दे। बेरहम पत्रिका प्रबंधन को न तो अपने पत्रकार कार्मिकों की पारिवारिक मजबूरियों की कोई परवाह है, न ही उनके भविष्य से कोई सरोकार। इसी का खामियाजा राजस्थान पत्रिका जोधपुर संस्करण से जुड़े कई पत्रकार उठा रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका पत्रिका प्रबंधन ने वरिष्ठ पत्रकार साथियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का नया हथकंडा अपना लिया है। यह हथकंडा है प्रबंधन की मनमर्जी से जहां चाहे वहां तबादला, ताकि बेबस पत्रकार खुद ही बाय-बाय कह दे। बेरहम पत्रिका प्रबंधन को न तो अपने पत्रकार कार्मिकों की पारिवारिक मजबूरियों की कोई परवाह है, न ही उनके भविष्य से कोई सरोकार। इसी का खामियाजा राजस्थान पत्रिका जोधपुर संस्करण से जुड़े कई पत्रकार उठा रहे हैं।

इसके ताजा शिकार बने हैं जोधपुर संस्करण में चीफ रिपोर्टर रहे सुरेश व्यास। पत्रकारिता में दो दशक से सक्रिय व्यास की कलम हमेशा ही सिस्टम की खामियों के खिलाफ चलती रही है। अपने आप में एक संस्थान की भूमिका अदा करते आए व्यास शुरू से ही प्रबंधन के कई वरिष्ठ लोगों की आंख के किरकिरी बने रहे, नतीजा यह हुआ कि कुछ अरसे पहले उन्हें परेशान करने के लिए जोधपुर से उदयपुर शिफ्ट किया गया।

कारण यह बताया गया कि कंपनी नीतिगत निर्णय के तहत वरिष्ठ साथियों की अदला-बदली कर रही है। उदयपुर में सुरेश व्यास ने कुछ महीने गुजारे ही थे कि कुछ दिनों पहले उन्हें कंपनी का एक तुगलकी तबादला आदेश मिला, जिसमें उन्हें कोलकाता ज्वाइन करने को कहा गया है। जबसे उन्हें नया तबादला आदेश मिला है, कोई उनकी गुहार नहीं सुन रहा। फिलहाल छुट्टियां लेकर अपने गृहनगर बैठे व्यास के पास अब इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

पिछले महीने ऐसे ही शिकार हुए जोधपुर संस्करण के वरिष्ठ पत्रकार साथी सुनील चैधरी। राजस्थान पत्रिका में डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से सेवाएं दे रहे चैधरी को बिना कोई कारण बताए तत्काल सूरत ज्वाइन करने के आदेश थमा दिए गए। चैधरी की पीड़़ा भी किसी ने नहीं सुनी। मजबूरन उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इससे ठीक पिछले महीने एक साथ तीन पत्रकारों पर पत्रिका प्रबंधन ने गाज गिराई।

तीनों रिपोर्टर है- सौरभ पुरोहित, मधु बैनर्जी और गजेंद्र दहिया। इनमें से दो का तबादला अलवर और एक का बांसवाड़ा कर दिया गया। तीनों ने ही पत्रिका प्रबंधन से इस्तीफा देकर पिंड छुड़ाया। अब तो यह हालत हो गई है कि पत्रिका प्रबंधन ने पत्रकारों को नौकरी से निकालने के लिए यह पैमाना बना लिया है कि जिस पत्रकार को जितना जल्दी निकालना है, उसे उतनी ही दूरी पर तैनाती का आर्डर थमा दो। दुखद पहलू यह है कि यह सिलसिला जोधपुर से ही शुरू हुआ। हरिओम पंजवाणी, केआर गोदारा, माणक मोट मणि, विद्याधर हर्ष, बाबूलाल टाक सरीखे कई पत्रकार इसके शिकार बने। कुछ ने मजबूरी में अपना घर छोड़ा तो कुछ छोड़कर वापस राजस्थान आ गए। हे भगवान, पत्रिका प्रबंधन को थोड़ी सद्बुद्धि दे।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर इस कानाफूसी में किसी को कोई कमी-बेसी दिखे तो दुरुस्तीकरण के लिए नीचे दिए गए कमेंट बाक्स का सहारा ले सकता है या फिर [email protected] पर मेल भेज सकता है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...