Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

साढ़े तीन दशक में कई नई प्रतिभाएं तराश गए धीरेंद्र अवस्‍थी

कानपुर। पत्रकारिता के एक आयाम का आज सुबह तब अंत हो गया जब इस क्षेत्र में हमेशा ही नई प्रतिभाओं को निखारने और तराशने में तन्मयता से जुटने वाले शिल्पी, दैनिक जागरण समेत देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके, मौजूदा समय में 'खोजी नारद' सांध्य दैनिक के स्थानीय संपादक, देश के वरिष्ठतम पत्रकार धीरेंद्र अवस्थी का असमय निधन हो गया।

कानपुर। पत्रकारिता के एक आयाम का आज सुबह तब अंत हो गया जब इस क्षेत्र में हमेशा ही नई प्रतिभाओं को निखारने और तराशने में तन्मयता से जुटने वाले शिल्पी, दैनिक जागरण समेत देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके, मौजूदा समय में 'खोजी नारद' सांध्य दैनिक के स्थानीय संपादक, देश के वरिष्ठतम पत्रकार धीरेंद्र अवस्थी का असमय निधन हो गया।

वह पिछले छह महीने से मुख कैंसर व फेफड़े की गंभीर बीमारियों से पीडि़त थे। मुंबई में इलाज के बाद शहर के हैलट अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। वह अपने पीछे दो बेटे व पत्नी को छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर से पूरा पत्रकार एवं साहित्य जगत शोक में डूब गया।

मूलरूप से रमाबाईनगर (कानपुर देहात) के शिवली कस्बा निवासी धीरेंद्र अवस्थी तकरीबन 45 साल पहले शहर आए थे। पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्र के घर के नजदीक पत्नी गीता अवस्थी के संग 87/346, आचार्य नगर कानपुर में निवास बनाया। उन्होंने वर्ष 1975 में दैनिक आज से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। शुरुआत से ही जुझारू, ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार की छवि रखने वाले श्री अवस्थी इसके बाद दैनिक जागरण से जुड़ गए। दैनिक जागरण में वह गोरखपुर, बरेली के बाद फिर कानपुर में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं देते रहे। कुछ दिन के लिए जागरण से उनका अलगाव हुआ और वह सियासत हिंदी से जुड़े। फिर जिंदगी में बदलाव हुआ और वह दैनिक जागरण कानपुर में आ गये। यहां से हिंदुस्तान लखनऊ संस्करण में चले गए। यहां से लौटने पर वह जागरण, इंदौर के संपादकीय प्रभारी बनाकर भेजे गये। कुछ दिन बाद इंदौर में तबीयत बिगडऩे पर वह कानपुर आ गये।

एक बार फिर से धारा बदली और वह राष्‍ट्रीय सहारा, कानपुर संस्करण से जुड़ गए। तीन साल सेवाएं देने के बाद मोहभंग हुआ और अपने अजीज विवेक वाजपेयी की मनुहार पर साप्ताहिकी प्रकाशन में छाप छोड़ चुके खोजी नारद के सांध्य संस्करण में बतौर स्थानीय संपादक जुड़ गये। उनकी छत्रछाया व देखरेख के कौशल से चंद महीनों में ही खोजी नारद ने सांध्य दैनिक के रूप में अच्छी-खासी ख्याति अर्जित कर ली थी, पर इसी बीच खोजी नारद परिवार एक झटका तब लगा जब वह मुख कैंसर से पीडि़त हो गये।

स्थानीय स्तर पर उपचार के बाद उन्हें मुंबई के एक ख्यातिलब्ध हास्पिटल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। वहां सफल आपरेशन के बाद श्री अवस्थी सकुशल अपने शहर लौटे। उनकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था। इसी बीच अचानक फिर से कुदरत ने करवट बदली और उनकी तबीयत बिगड़ गई। फेफड़ों में दिक्कत के चलते उन्हें हैलट में भर्ती कराया गया। यहां आईसीयू में उनका उपचार चल रहा था। कल देर रात चिकित्सकों के जवाब देने के बावजूद भी उनके बेटे चिकित्सकों के हाथ-पांव जोड़कर उपचार की दुहाई दे रहे थे। आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु का समाचार मिलते ही शहर के पत्रकारों, साहित्यकारों एवं गणमान्य नागरिकों समेत हर करीबी में शोक की लहर दौड़ गई।

श्री अवस्थी अपने पीछे पत्नी गीता अवस्थी, दो बेटे प्रवेश अवस्थी (सोनू) व प्रशांत अवस्थी (मोनू) को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा मेडिकल क्षेत्र में काम कर रहा है तो छोटे बेटे ने पिता की राह पकड़ी है। परिजनों ने बताया कि शाम तीन बजे आचार्यनगर स्थित घर से अंतिम यात्रा भैरव घाट के लिए रवाना होगी। श्री अवस्थी ने अपने 36 वर्षों के पत्रकारिता कार्यकाल में सैकड़ों युवाओं को इस क्षेत्र की बारीकियां सिखायीं। उनके अनुभवों के जरिए कलम की धार के बल पर तमाम युवा प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। श्री अवस्थी हमेशा से ही नए-नए युवकों को आगे लाने के प्रयास में जुटे रहे। वह कुछ नया करने की कोशिश में जीवन पर्यंत संलग्न रहे। उनकी मृत्यु से पत्रकारिता के साथ ही साहित्य जगत की भी अपूर्णनीय क्षति हुई है। उनकी कमी को हमेशा महसूस किया जाता रहेगा। उनके बाद खाली हुए कोने को शायद ही अब कभी भरा जा सकेगा।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...