खबर है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर हस्ताक्षर अभियान चला रहे दैनिक जागरण के खिलाफ देहरादून और लखनऊ में आधा दर्जन से अधिक पत्रकारों ने बगावत कर दी है। संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है जब जागरण के दमघोटू माहौल में खबरें बांचने वाले पत्रकारों ने इतनी बड़ी संख्या में अपने ही मैनेजरनुमा संपादकों को आंखे दिखाने का बहादुरीपूर्ण प्रदर्शन किया है। कोरे पेपर और शपथयुक्त पेपर में हस्ताक्षर न करने वाले पत्रकार डेस्क व रिपोर्टिंग दोनों के हैं।
खबर है कि देहरादून व लखनऊ ब्यूरो में से मात्र कुछ ही पत्रकारों ने हस्ताक्षर करने से इनकार करने का साहस दिखाया। देहरादून में गुरुवार शाम को स्थानीय संपादक कुशल कोठियाल ने जनरल मैनेजर की केबिन में डेस्क व फील्ड के सभी पत्रकारों को पेपर पर हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया, जिस पर ज्यादातर पत्रकारों ने हस्ताक्षर कर लिए, लेकिन सात पत्रकारों ने साइन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद संपादकीय कक्ष में स्थानीय संपादक ने विरोध दर्ज करने वाले पत्रकारों को बुलाकर उन्हें धमकाने के लहजे में साइन करने को कहा। लेकिन देर रात तक इनमें से किसी ने भी हस्ताक्षर नहीं किए थे।
जागरण सूत्रों ने बताया कि संपादक ने सभी को अपने फैसले पर विचार करने को कहते हुए नौकरी से निकालने की चेतावनी दी है। संभव है आज-कल तक कुछ और लोग हथियार डाल दें। जागरण सूत्रों ने बताया कि जनरल मैनेजर की केबिन में जब यह हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा था तो उस वक्त संपादक के साथ सीनियर पदों पर बैठे चार और पत्रकार भी प्रबंधन की ही भाषा में बात कर रहे थे। वक्त-बे-वक्त पत्रकार हितों की बात करने वाले इन चेहरों के इस रुख को लेकर भी जागरण में गुस्सा है।
उधर, लखनऊ में कई पत्रकारों ने संपादक शशांक शेखर त्रिपाठी से कह दिया कि बेहतर परफारमेंस और अन्य त्याग-बलिदान के लिए तो हम कर्मी हाजिर रहते हैं और अपने खून पसीने को जलाकर अपनी निष्ठा व कर्तव्यशीलता को दिखाते रहते हैं लेकिन जब हम लोगों के बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की बात आई, जब कुछ पैसे अतिरिक्त देने की बात आई तो प्रबंधन व संपादक को सांप सूंघ गया है और सब चाहते हैं कि कर्मियों को कुछ न मिले। सूत्रों के मुताबिक शशांक शेखर त्रिपाठी जो लंबे समय से खुद को पत्रकार व स्टाफ फ्रेंडली साबित करते रहे हैं, दुविधा में फंस गए हैं। उनका झूठ सामने आ चुका है कि वे स्टाफ के नहीं बल्कि प्रबंधन के ही आदमी हैं और वे सबसे पेपर पर साइन कराकर ही मानेंगे।
मेरठ में संपादकीय प्रभारी मनोज झा स्टाफ के लोगों को बहला फुसला कर मैनेजर अखिल भटनागर के कमरे में ले जाते रहे और साइन करने को मजबूर करते रहे पर कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और अपना विरोध दर्ज कराया। बताया जाता है कि जागरण प्रबंधन के फैसले से पूरे ग्रुप के पत्रकारों में आक्रोश है। ये पत्रकार अपने आक्रोश को किसी अन्य फार्मेट में अभिव्यक्त करने के तरीके खोज तलाश रहे हैं।





