लखनऊ। देश के करोड़ों बच्चों को जिनकी उम्र 0-6 साल के बीच है, उनके पुष्टाहार और गुणवत्तापूर्ण आहार देने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1975 में बाल विकास योज़ना की शुरुवात की थी, जो आज दुनिया में अपनी तरह की अलग और अनोखी योजना है जो करोड़ों भारतीय बच्चों के पुष्टाहार के लिए बनाई गई थी । सरकार ने गरीब और कुपोषण के शिकार बच्चों की बढती संख्या को देखते हुए इस योजना को लागू किया था ।
भारत सरकार ने बच्चों के पुष्टाहार को ध्यान में रखते हुए और उनके दिमागी, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए इस महत्वकांक्षी योजना की नीवं रखी थी । पर करोड़ों हज़ार की इस योजना में भी घोटालेंबाजों ने उन बच्चों के मुंह से निवाला छीन लिया जिनको बमुश्किल एक वक्त का भोजन भी नसीब होता होगा । बाल विकास एवं पुष्टाहार की इस योजना में राज्य और केंद्र सरकार की 50% की बराबर हिस्सेदारी है । केंद्र से आये बजट से राज्य सरकार अपने संसाधनों के माध्यम से योजना को पूरे राज्य में लागू करती है ।
2005-06 में उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए करीब 10 हज़ार करोड़ रुपये भेजे थे, जो टेंडर के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में खर्च होने थे । प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस योजना को लागू करवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, पर सरकारी टेंडर होने की वजह से इस योजना को लागू करवाने में प्रदेश सरकार की हिला हवाली सामने आई और योजना में देरी हुई।
प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आहट ने इस योजना के क्रियान्वयन में देरी कर दी, विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता बदल गई। मायावती के सत्ता पर काबिज होते ही प्रदेश के बड़े शराब कारोबारी पोंटी चड्डा की नज़र इस योजना पर पड़ी या यूँ कहें की पोंटी की नज़र उन निरीह और कुपोषण के शिकार बच्चों के आहार पर पड़ी जिनके लिए भारत सरकार अरबो रुपयें खर्च कर रही थी ।
मायावती की खास कृपा इस शराब कारोबारी पर थी। पोंटी ने अपनी पहुँच का फ़ायदा उठाते हुए उन बच्चों के मुंह का निवाला अपनी तिजोरियों में रुपयों के रूप में भर लिया जिनके लिए भारत सरकार ने राहत पहुँचाने की कोशिश की थी। पोंटी चड्डा और उसकी सहयोगी सुनीता की कंपनियों डी ग्रेट वेल्यु , एवीटी फूड्स, पीडीएच फ़ूड को उत्तर प्रदेश के बाल विकास पुष्टाहार की सप्लाई का ठेका दे दिया गया। उस समय जब ये टेंडर सरकार ने जारी किये तब और भी कई कंपनियों ने ठेके पाने के लिए टेंडर डाले थे।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने इन कंपनियों को ठेके देने में नियमों और सप्लाई की गुणवत्ता की शर्तों की जमकर अनदेखी की थी । पोंटी और उसके सहयोगियों की कंपनियों की सप्लाई शुरू होने की बाद बीते पांच सालों में प्रदेश के बाल विकास पुष्टाहार की गिरी गुणवत्ता किसी से छुपे नहीं है। जिसके खिलाफ इस टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों, जो नियम और इस ठेके को पाने की सभी शर्ते पूरी करती थी, ने कोर्ट का रूख किया । हाल में ही विशम्भर दयाल राम निवास गुप्ता एंड कंपनी ने ईलाहाबाद हाईकोर्ट में भारत सरकार के विरुद्ध ठेके को लेकर मामला दायर किया था जिसकी सुनवाई चल रही है ।
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश जरी किया कि अगली सुनवाई या फैसला आने तक कोई भी टेंडर न निकला जाए। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए 2012-13 की टेंडर नोटिस जारी कर दी और नई टेंडर प्रक्रिया की भी शुरुवात कर दी। बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने हाईकोर्ट में मामला रहते हुए भी दिनांक 31-10-2012 को टेंडर खोला वहीं दूसरे टेंडर को खोलने की तारीख 01-11-2012 है, जबकि तीसरा टेंडर 02-11-2012 को खोला जायेगा । कुल मिलाकर इस साल भी अनुमानित करीब 3 हज़ार करोड़ के पुष्टाहार की सप्लाई का ठेका होना है, जो प्रतिवर्ष के लिए है। सूत्रों की माने तो ये ठेके पोंटी के करीबी लोगों को खुश करने की विभागीय मंत्री की कवायद माना जा सकता है ।
पोंटी चड्डा की कंपनी ने बीते पांच सालों में इस योजना में करीब 10 हज़ार करोड़ रुपयों की हेराफेरी की है। बसपा सरकार के दौरान ठेके इस शराब व्यवसाई को ऐसे बांटे गए जैसे रेवड़ी । कहा जाता है की माया सरकार के दौरान अपना सिक्का चलाने वाले पोंटी चड्डा की पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की मायावती के सबसे करीबी मंत्री इन्द्रजीत सरोज सिर्फ इस शराब कारोबारी के एक फोन पर उसके चेक निर्गत करवा दिया करते थे ।
हालात बसपा सरकार से इतर नहीं है, इस कारोबारी ने प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार को भी अपनी उँगलियों पर नाचना शुरू कर दिया है । महिला कल्याण और बाल विकास पुष्टाहार मंत्री राम गोविन्द चौधरी भी आज उसी स्थिति में काम कर रहे है जैसे बसपा के कद्दावर मंत्री इन्द्रजीत सरोज किया करते थे । सरकार ने और विभाग ने मामला कोर्ट में रहने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया को शुरू कर एक तरह से हाईकोर्ट की अवमानना की है।
शीतांशु पति त्रिपाठी की रिपोर्ट. साभार- पर्दाफाश.
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