नीचे दो वीडियो के लिंक दिए जा रहे हैं. इन दी वीडियो में दो नजारे हैं. एक में है एक डीएम द्वारा एक व्यक्ति को थप्पड़ मारना. डीएम ने जिसे थप्पड़ मारा उसका जो कुसूर दिख रहा है, वो ये कि उसने बंदूक पकड़ रखी है और दूसरा वह साहब सुब्बा लोगों के इलाके में उनके मकानों के आसपास फटक रहा था.
बताइए भला, वीवीआईपी एरिया में यूं ही टहलना कोई कलक्टर साहब कैसे बर्दाश्त कर सकता है क्योंकि कलक्टर का पद तो अंग्रेजों के समय से बनाया हुआ है, इसलिए अंग्रेजों का खून तो कलक्टर के अंदर दौड़ ही रहा होगा. उस जमाने में गोरे साहब लोगों के इलाके में काले लोगों के प्रवेश करने पर पिटाई का प्रावधान था, अब गोरे काले का भेद तो काफी हद तक खत्म हो गया है लेकिन खास आदमी और आम आदमी के बीच भेदभाव भरपूर कायम है.
प्रकरण यूपी के गाजीपुर जिले का है. इस जिले की नियति है शोषित होते रहना. नेता शोषण करता है. अफसर शोषण करता है. क्योंकि दोनों को यह लगता है कि इस पिछड़े जिले से और क्या मिल सकता है, सिवाय दोनों हाथों से भरपूर उगाही के. इस जिले में आने वाले ज्यादातर अफसर अपने कार्यकाल के दौरान अपने स्वार्थों की सिद्धि में लगे रहते हैं. जनता गई भांड़ में. आम आदमी की दुर्गति हो रही है तो हुआ करे. ऐसे दौर में अगर कोई डीएम किसी जन पर हाथ छोड़ता है तो उससे कोई आश्चर्य नहीं होता बल्कि यह समझ बलवती होती है कि आगे आने वाले दिनों में सिस्टम के प्रति जनता का मोहभंग और तेजी से होगा और यह भी कि सिस्टम में बैठे लोग जनता को भेड़ बकरी से ज्यादा नहीं समझते इसलिए उन्हें उनके हाल पर छोड़कर अपनी एलीट दुनिया में बिजी रहते हैं.
एक और वीडियो है. आईपीएस अमिताभ से जुड़ा हुआ. कभी इनका पूरा नाम अमिताभ ठाकुर हुआ करता था लेकिन जातिवादी सोच कम करने वास्ते पहल खुद से शुरू करने की नैतिकता के तहत इन्होंने ठाकुर शब्द अपने नाम से हटा दिया. सिस्टम में रहते हुए सिस्टम के दुखों से भरपूर दो-चार हुए और हो रहे हैं अमिताभ. इन्होंने खुद का प्रमोशन न किए जाने और जान बूझ कर परेशान किए जाने का आरोप यूपी के बड़े अफसर फतेह बहादुर पर लगाते हुए इसके प्रमाण में कई दस्तावेजों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.
डीडी मिश्र के बाद अमिताभ दूसरे आईपीएस हैं जो माया राज के बड़े अफसरों की भ्रष्ट शैली के खिलाफ खुलकर आवाज मुखर कर रहे हैं. डीडी मिश्र ने तो एक दिन अचानक से मुंह खोला और फिर अचानक से ही मुंह बंद कर लिया लेकिन अमिताभ लगातार लड़ रहे हैं. कई वर्षों से लड़ रहे हैं. इनकी तनख्वाह रोक दी गई. इन्हें स्टडी लीव नहीं दी गई. इनका प्रमोशन रोक दिया गया. इनके साथ पोस्टिंग में भेदभाव किया गया. पर अमिताभ चुप नहीं बैठे. हारे नहीं. किसी के चरणों में जाकर नहीं गिरे. किसी नेता किसी अफसर से सोर्स नहीं लगवाया. वे कानून और संविधान के प्रावधानों के तहत अपनी लड़ाई खुद लड़ते रहे और अमिताभ का कदम कदम पर साथ देती रहीं हौसला बढ़ाती रहीं उनकी पत्नी नूतन ठाकुर.
इन्हीं अमिताभ पर न्यूज24 में एक खबर का प्रसारण किया गया. युवा पत्रकार मयंक सक्सेना की आवाज इस स्टोरी में है. मयंक ने इस वीडियो को भड़ास तक पहुंचाया जिसके लिए हम आभारी हैं. आइए, दो वीडियो देखिए और अफसरशाही के दो पहलूओं को समझिए. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया
….दो वीडियो… दो चेहरे….
थप्पड़ मारते इस डीएम का 'दर्शन' करें
https://www.bhadas4media.com/video/viewvideo/528/–news-incident-event/dmkaattackwmv.html
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