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सुख-दुख...

लोक गायिका विजया भारती का आरोप- मुझे पागल साबित करने पर तुला है मेरा पत्रकार पति (सुनें टेप)

: मुझे मार-पीट-बांध कर जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है : पागल घोषित करने की पूरी साजिश रच ली गई है : लोक गायिका विजया भारती इन दिनों बेहद मुश्किल में हैं. अभी-अभी उन्होंने जानकारी दी है कि उन्हें जबरन कुछ लोग उठाकर मारते पीटते बांध कर ले गए और एक अस्पताल में भर्ती करा दिया है, जो लाजपत नगर में स्थित है. उन्होंने अपने पत्रकार पति ओंकारेश्वर पांडेय पर आरोप लगाया है कि वे उन्हें पागल घोषित करने पर तुले हुए हैं, इसीलिए उन्हें नशे की दवाइयां जबरन खिलाई जा रही है, कई इंजेक्शन जबरन लगा दिए गए हैं.

: मुझे मार-पीट-बांध कर जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है : पागल घोषित करने की पूरी साजिश रच ली गई है : लोक गायिका विजया भारती इन दिनों बेहद मुश्किल में हैं. अभी-अभी उन्होंने जानकारी दी है कि उन्हें जबरन कुछ लोग उठाकर मारते पीटते बांध कर ले गए और एक अस्पताल में भर्ती करा दिया है, जो लाजपत नगर में स्थित है. उन्होंने अपने पत्रकार पति ओंकारेश्वर पांडेय पर आरोप लगाया है कि वे उन्हें पागल घोषित करने पर तुले हुए हैं, इसीलिए उन्हें नशे की दवाइयां जबरन खिलाई जा रही है, कई इंजेक्शन जबरन लगा दिए गए हैं.

उल्लेखनीय है कि विजया भारती का अपने पत्रकार पति ओंकारेश्वर पांडेय के साथ लंबे समय से झगड़ा चल रहा है. विजया भारती का आरोप है कि उनके पति लंबे समय से उन्हें मारते पीटते रहे हैं. विजया भारती ने आरोप लगाया कि- ''पिछले साल दिसम्बर में ओंकारेश्वर ने दूसरी मंजिल से धक्का दे दिया, जिससे मेरी दाहिने कुल्हे की हड्डी छह टुकड़ों में बंट गई. धक्का देने के बाद ओंकारेश्वर गाड़ी उठा कर वहां से भाग गये. उस हालत में भी मैं खुद उठी, डाक्टर के पास गई, एक्स-रे कराया, और फिर महुआ के सेट पर शूटिंग के लिए पहुंची." 

भोजपुरिया समाज में खासा प्रसिद्ध विजया भारती की शादी ओंकारेश्वर पाण्डेय (द संडे इंडियन के संपादक) से 1994 में हुई. शादी के बाद से ही दोनों के रिश्ते में खटपट शुरू हो गई. विजया भारती का कहना है कि वे इस बहुरुपिया (ओंकारेश्वर पांडेय) के छलावे में आ गई और फिर तबसे झेल रही हैं. मारपीट, गाली-गलौज रोजाना का सिलसिला है. अब वो बच्चों को मेरे खिलाफ भड़का कर अपने पास किए हुए है. मुझे पागल घोषित कराने की पूरी तैयार कर ली है. इसके लिए डाक्टर तक सेट कर लिए हैं. इस स्थिति से अब बचाइए आप लोग. जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है तो उन्होंने लाजपत नगर में विमहैंस अस्पताल का नाम बताया. साथ ही यह भी बताया कि उनका बेटा अब उनके हाथ से फोन छीनने की कोशिश कर रहा है.

विजया भारती ने अपने दुख की कहानी कुछ पत्रकार साथियों को फोन पर कुछ महीनों पहले सुनाई थी, जिसे उन पत्रकार साथियों ने रिकार्ड कर अपने अपने न्यू मीडिया माध्यमों से प्रसारित किया ताकि विजया को न्याय दिलाया जा सके, उनकी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके. भोजपुरिया डॉट कॉम और मोहल्लालाइव डाट काम के संचालकों से बातचीत के ये टेप आज भड़ास पर भी अपलोड किए जा रहे हैं ताकि विजया भारती की हताश आवाज को, न्याय मांगती आवाज को न्यू मीडिया माध्यमों के जरिए न्याय दिलाने वाले मंचों माध्यमों तक पहुंचाया जा सके. लीजिए सुनिए टेप… इस टेप के जरिए विजया भारती के दुखों की कहानी खुद उन्हीं की जुबानी सुनी जा सकती है. नीचे वो तीन टेप दिए जा रहे हैं.

इस प्रकरण को लेकर एक बार ओंकारेश्वर पांडेय ने अपनी तरफ से जो सफाई पेश की थी, वो इस प्रकार है – "मैं अपनी पत्नी से (जाहिर है आप सबसे ज्यादा) प्यार करता था, हूं और रहूंगा। मेरी पत्नी ने जो आरोप मुझ पर लगाये हैं, उनको मैं बेबुनियाद कहूंगा तो वो हर अभियुक्त कहता ही है, ऐसा माना जाएगा। किसी भी पति और पत्नी के बीच सबसे विश्वस्त एक ही तीसरा व्यक्ति हो सकता है, वो है उसकी संतान। हमारी भी संतानें हैं। एक बेटा और एक बेटी। बेटी की शादी हो चुकी है। उसकी नयी जिंदगी को आप सभी शुभकामनाएं ही दें, तो बेहतर। बेटा से जो भी चाहे, सच जान सकता है। और आप चाहते हैं कि वास्तव में सच जाना जाए, तो आपमें से बहुत से लोग पत्रकार भी हैं, अपने रिपोर्टर के जरिये सच की पड़ताल कर करा लें। मैंने अभी अभी महुआ टीवी पर उनके आरोपों के जवाब में जो कहा है, उसे आपको भी बता देना चाहता हूं। मैं अपनी पत्नी पर कभी कोई आरोप नहीं लगाऊंगा, क्योंकि वो मेरी पत्नी थी, हैं, और ईश्वर करें कि रहें भी। मारपीट कभी नहीं की, बेटा गवाह है। अन्य आरोप मनगढ़ंत और बेबुनियाद हैं। उनकी मानसिक पीड़ा के इलाज के लिए दो बार मैक्स हॉस्पीटल के प्रसिद्ध मनो चिकित्सक को दिखा चुका हूं। और भी कई बातें हैं, जो मैं उनके लाख लांछन के बावजूद इस मंच से नहीं कहूंगा। मेरी प्यारी पत्नी, मेरे बच्चे प्यार से रहें, जीवन में तरक्की करें, आपसे बस इसी तरह की दुआ की उम्मीद है। मैं, अगर कहीं से भी गलत होऊंगा, तो मामला अदालत में है, वहां मैं जरूर विस्तार से अपनी बात रखूंगा, और मुझे देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। निश्चिंत रहें, आपकी विजया रात का खाना मेरे साथ ही खाएंगी, और मुझे भी खिलाएंगी, चाहें तो आकर देख लें। एक बात और, आप सभी लोग अपने अपने परिवारों से जुड़े हैं। सोशल मीडिया को नितांत निजी मामलों के एकतरफा निपटारे का ऐसा मंच न बनाया जाए, जो परिवार जोड़ने की बजाय तोड़े। मेरा यही विनम्र सुझाव है… धन्यवाद।"


(सुनें)

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