तीन पत्रकारों ने एक कॉलगर्ल के साथ रंगरेलियां मनायीं। अचानक खबर मिलने पर पुलिस ने छापा मारा। सारे लोग पकड़े गये। रंगेहाथों। पुलिस की मौजूदगी में लोगों ने इन पत्रकारों को जमकर पीटा। इसी बीच एमएलए से लेकर लखनऊ के बड़े पत्रकारों की सिफारिशें पहुंची। और नतीजा, मामला हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। यह मामला है उप्र के सोनांचल क्षेत्र का।
नवंबर की नौ तारीख दिन का। यह इलाका ऊर्जांचल के तौर पर पहचाना जाता है। लेकिन इस कृत्रिम बिजली के झटकों ने इस पूरे इलाके में पत्रकारों के नजरिये को लेकर जोरदार शॉक दिया है। इस घटना को लेकर लोगों में खासा गुस्सा है। पतित पत्रकारों के प्रति। उनके समर्थक विधायकों के प्रति। ऐय्याश पत्रकारों के प्रति। पुलिस के प्रति भी।
बात है ओबरा की। यहां के एक आभिजात्य वीआईपी गेस्टहाउस में तीन दिन पहले यहां के तीन बडे पत्रकारों ने यहां अपना गंदा चेहरा दिखाया। यह वही गेस्ट हाउस वह है जहां कभी देश की बड़ी हस्तियां और शख्सियतें टिक चुकी हैं और प्रदेश-देश के नामचीन अफसरों ने भी यहां कई बार कुछ दिन व्यतीत किया है। ताजा घटना में शामिल ये तीनों पत्रकार हैसियत के तौर पर करोड़ों रूपयों के मालिक हैं। इनमें से वे लोग भी हैं जो कई क्रशर और खनन व्यवसाय से जुड़े हैं।
एक पत्रकार पत्रिका में संयुक्त संपादक हैं तो बाकी लोग खनन माफिया बताये जाते हैं। इनमें और उनके सहयोगियों के नाम यहां पत्रकारों के क्लब और बड़े होटल मे बुक कराये जाते हैं। लखनऊ में इनकी आमद-रफ्त नियमित होती हैं। इनके खास दोस्तों में वे लोग बताये जाते हैं जो कभी लखनऊ में सरे आम घोड़ों पर चढ़ कर कानून और व्यवस्था चलाने में मशहूर हैं। ऐसे एक अन्य अफसर ऐसे हैं जो सीडीओ की अपनी तैनाती के दौरान मनरेगा में खासे बदनाम हो चुके हैं।
बताते हैं कि इस गेस्टहाउस में एक राष्ट्रीय दैनिक के एक पत्रकार ने एक आलीशान कमरा बुक कराया था। इन लोगों ने लखनऊ से एक कॉलगर्ल को बुलाया था कि वे अपने दोस्तों के साथ मनोरंजन कर सकें। खबर के मुताबिक इन तीनों नामख्यात पत्रकारों ने अपनी रंगरेलियां शुरू कर दीं कि अचानक ही गेस्ट हाउस के कर्मचारियों ने पुलिस को घटना की खबर दे डाली। इन लोगों की हरकतों से आजिज पुलिस इनकी करतूतों से पहले से कुख्यात और परेशान थी। पता चलते ही पुलिस ने छापा मार दिया।
तीनों लोग मौके से ही नंगे पकड़े गये। पूछताछ के बाद इन लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। लेकिन इसी बीच स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया और पुलिस थाने में ही इन लोगों को जमकर पीटा।
लेकिन इसी बीच शुरू हो गया दबावों का दौर। बड़े अफसर, बड़बोले पुलिस के बड़े अफसरों और दिग्गज पत्रकारों के साथ ही एमएलए के दबाव आने शुरू हो गये। लखनऊ के एक सफेदपोश पत्रकार तो इस मामले में दिन-रात एक करते रहे। उधर ऐसे दबावों के चलते बेहाल छुटभैया पुलिस अफसरों के पसीने छूट गये और बाद में अंतत: पकड़े गये इन पत्रकारों को रिहा करना पड़ा।
ब्योरे के मुताबिक उर्जा-राजधानी स्थित अतिथि गृह में हुई छापेमारी में पुलिस ने तीन पत्रकारों को एक कालगर्ल के साथ आपत्तिजनक स्थिति में रंगेहाथ धर लिया था। लेकिन यूपी सरकार के बड़े नेताओं के नजदीक माने जाने वाले इन पत्रकारों को सत्ता पक्ष और पुलिस के आला अधिकारियों के दबाव में अंततः छोड़ना पड़ा। बताते हैं कि छापामारी के दौरान वहां मौजूद कॉलगर्ल ने खुद ही पूरा मामला हाथ में ले लिया और पुलिसवालों को जमकर लताड़ लगायी।
खबर है कि पुलिस पर दबाव डालने वाले इन पत्रकारों ने उन पत्रकारों को भी मन्नत-अरदास और हाथ-जोड़ की, जो स्थानीय तौर पर मोबाइल-न्यूज से जुड़े हुए हैं। ऐसे पत्रकार चाहते हैं कि इस
खबर को फ्लैश नहीं किया जाए।
लेखक कुमार सौवीर यूपी के वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.





