हर साल की तरह इस बार भी बिहार में दैनिक जागरण के कर्मचारियों को बोनस मिला। बताते हैं कि एडिटोरियल के प्रत्येक कर्मचारी को जिनकी बेसिक सेलरी 10000 रुपये से नीचे है, 9400 रुपया बोनस देने के लिए आया था। पिछले साल बोनस का पैसा सीधे कर्मचारियों के खाते में डाला गया था, कर्मचारियों को पिछले साल 8400 रुपये मिला था।
इस साल कर्मचारियों को पैसा खाते में न डालकर लिफाफे में दिया गया। इस दौरान बोनस लिस्ट को मोड़कर कर्मचारियों से हस्ताक्षर कराया गया ताकि कर्मचारियों को यह पता न चले कि उनके लिए बोनस कितना आया है। कर्मचारियों को 9400 रुपये में से मात्र 3500 रुपये ही दिये गए। बाकी के पैसे किसने खा लिए, यह रहस्य है।
नौकरी के डर से किसी भी कर्मचारी ने इसका विरोध नहीं किया। यह हाल मुजफ़फरपुर, पटना भागलपुर यूनिटों का है। देश-दुनिया की खबरें छापने का दावा करने वाले दैनिक जागरण अपने यहां हो रहे घोटाले पर नजर नहीं रखता है। सवाल यह है कि जब पिछले साल कर्मचारियों के बोनस का पैसा सीधे उनके खाते में डाला गया था तो इस बार उन्हें लिफाफे में क्यों दिया गया?
बोनस लिस्ट को मोड़कर क्यों कर्मचारियों से हस्ताक्षर कराया गया? जब पिछले साल कर्मचारियों को बोनस के रूप में 8400 रुपये दिये गए तो इस बार उन्हें 3500 रुपये ही क्यों मिला? उत्तर प्रदेश में दैनिक जागरण के ही कर्मचारियों को बोनस के रूप में 8400 दिये गए हैं तो बिहार में 3500 रुपये कर्मचारियों को क्यों मिला? ऐसे तमाम सवाल है जिससे साबित होता है कि दैनिक जागरण, बिहार में कुछ न कुछ तो गड़बड़ जरूर हुआ है और इस घपले की जांच कराई जानी चाहिए।





