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सुख-दुख...

टाइम्स नाऊ वाले अर्नव गोस्वामी से मेरा मोहभंग हो गया

बाल ठाकरे नहीं रहे…एक इंसान होने के नाते उनकी आत्मा की शांति की कामना…लेकिन जिस तरह से मीडिया में उनको हीरो बताया और बनाया जा रहा है…महान होने का तमगा दिया जा रहा है…दुख जताया जा रहा है…उस पर मुझे सख्त ऐतराज है…पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूं कि मीडिया बाल ठाकरे को ऐसे प्रोजेक्ट कर रहा है, जैसे वे एक महान देशभक्त थे और राष्ट्र सेवा में ही अपना जीवन अर्पित कर दिया था…बेहद शर्मनाक…

बाल ठाकरे नहीं रहे…एक इंसान होने के नाते उनकी आत्मा की शांति की कामना…लेकिन जिस तरह से मीडिया में उनको हीरो बताया और बनाया जा रहा है…महान होने का तमगा दिया जा रहा है…दुख जताया जा रहा है…उस पर मुझे सख्त ऐतराज है…पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूं कि मीडिया बाल ठाकरे को ऐसे प्रोजेक्ट कर रहा है, जैसे वे एक महान देशभक्त थे और राष्ट्र सेवा में ही अपना जीवन अर्पित कर दिया था…बेहद शर्मनाक…

दरअसल मेरी नजर में बाल ठाकरे संकुचित विचार वाले एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनके लिए देश का संविधान, इसकी विविधता, नागरिकों को देश में कहीं भी जाकर आजीविका कमाने का अधिकार और देश का गणतांत्रित ढांचा कोई मायने नहीं रखता था…वो सिर्फ हिंसा, डर और नफरत फैलाने की राजानीति करना जानते थे…वक्त आने पर हिंदू हृदय सम्राट का लाबादा भी ओढ़ लेते थे…अगर आपको याद हो तो जरा पीछे जाइए और सोचिए कि किस तरह बाल ठाकरे की शह पर शिव सैनिक पहले दक्षिण भारतीयों और फिर उत्तर भारतीयों (खासकर बिहार और यूपी) पर कहर बनकर टूटते थे-टूटते हैं मुंबई में…कैसे शिव सेना के 'गुंडे' गरीब-लाचार उत्तर भारतीय टैक्सी चालकों पर डंडे बरसाते हैं..उनकी कार के शीशे तोड़ते हैं…वैलेंटाइन डे पर ये शिव सैनिक भारतीय सभ्यता के ठेकेदार बनकर कैसे कपल्स को पीटते हैं…उनको सरेआम बेइज्जत करते हैं…

मुझे बेहद दुख है कि बाल ठाकरे की मौत पर लता मंगेशकर से लेकर अमिताभ बच्चन और सोनिया गांधी तक ने शोक जताया है…देश को तोड़ने की बात करने वाले-कहने वाले शख्स के लिए ये सम्मान? आखिर कहां जा रहे हैं हम…कहां जा रहा है ये देश….? तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि बाल ठाकरे से प्रेरणा लेकर संकुचित क्षत्रीय हितों की बात करने वाले नेताओं को हम सिर माथे पर बिठाएंगे…जो अपने इलाके के लोगों को छोड़कर पूरे देश को बेगाना समझता हो, उसे महान हीरो बताकर उसकी जयकार करेंगे? क्या हुआ है हम सबको…क्या हुआ है भारतीय मीडिया को….कोई मुझे बताएगा कि बाल ठाकरे ने ऐसा कोई एक काम भी किया हो देश के लिए, जिसके लिए यह राष्ट्र उसका ऋणी हो…उसे याद करे? नफरत फैलाने के अलावा उस इंसान ने किया ही क्या था…और अपने ट्वीट में बाल ठाकरे को महान बताने वाले अमिताभ बच्चन क्यों ये भूल गए कि शिव सैनिकों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा था…उनके घर पर अटैक किया था…क्या सदी के महानायक की यादाश्त इतनी कमजोर है?

मुझे सबसे ज्यादा आश्रचर्य इस बात पर हो रहा है कि भारतीय मीडिया, खासकर टीवी चैनल्स बाल ठाकरे को महान क्यों बता रहे हैं…हिंदी और अंग्रेजा दोनो चैनल्स…टाइम्स नाऊ वाले अर्नव गोस्वामी को मैं लीक से हटकर चलने वाला मानता था…लेकिन वो भी बैठ गए हैं बाल ठाकरे का गुणगान करने के लिए…मीडिया के विद्यार्थियों को इस बात पर शोध करना चाहिए कि बाल ठाकरे की मौत पर भारतीय टीवी मीडिया का उनका महिमागान क्या बताता और दर्शाता है…

दरअसल बाल ठाकरे के गुणगान में एक डर फैक्टर भी है….मुंबई में बेस्ड टीवी-फिल्म इंडस्ट्री और कारपोरेट्स की बाल ठाकरे के प्रति सहानुभूति समझ आती है…लेकिन बाकी लोगों को क्या हुआ है??? सुना है 5 करोड़ गुजरातियों की बात करने वाले नरेंद्र मोदी भी बाल ठाकरे को श्रद्धांजिल देने कल मुंबई जाने वाले हैं…लेकिन वे भूल गए हैं कि इन्ही बाल ठाकरे ने मुंबई से गुजरातियों को खदेड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी…यकीन न हो तो बाल ठाकरे के विकीपीडिया पेज से ये लाइन्स कापी-पेस्ट कर रहा हूं..जरा गौर फरमाइए..

In 1960, Bal Thackrey launched a cartoon weekly Marmik with his brother.[12] He used it to campaign against the growing numbers and influence of non-Marathi people in Mumbai targeting Gujaratis and South Indian labor workers.[12]

सोच रहा हूं कि नीतीश कुमार और अखिलेश यादव जा रहे हैं कि नहीं बाल ठाकरे को श्रद्धांजिल देने…और कौन-कौन जाएगा…बीजेपी तो राष्ट्रीय शोक में डूबी है…इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी पहले ही ठाकरे दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं और मौत की खबर आने के बाद कई दिनों से अंतर्ध्यान लालकृष्ण आडवाणी आज अचानक से टीवी चैनलों पर प्रकट हो गए हैं..लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज भी बढ़चढ़कर कैमरे पर अपना दुख जता रही हैं…तभी तो कहता हूं कि इस देश का भगवान ही मालिक है….बाल ठाकरे की मौत पर पॉलिटिकल क्लास, मीडिया और विपक्ष का आचार-व्यवहार बहुत कुछ कह रहा है….कौन कहता है कि नाथूराम गोडसे मर गया…वो अभी भी जिंदा है….हमारे आपके बीच-हम सबके बीच..हम हिंदुस्तानियों के बीच…संभल कर रहिएगा.

तेजतर्रार पत्रकार नदीम अख्तर का यह लिखा उनके फेसबुक वॉल से लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

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